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Sunday, 21 June, 2026
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एफटीए के साथ भारत की वाहन कंपनियों की निगाह ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार पर

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नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारतीय वाहन विनिर्माताओं के लिए ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बाजार में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स जैसी कंपनियां इस समझौते के तहत ब्रिटेन में इलेक्ट्रिक वाहन के निर्यात की संभावनाओं का आकलन कर रही हैं।

दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते से 2030 तक द्वपिक्षीय व्यापार दोगुना होकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। यह समझौता 15 जुलाई से लागू होगा।

भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के अनुसार, भारत को ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन चालित यात्री वाहनों के बाजार में चरणबद्ध तरीके से शुल्क-मुक्त निर्यात की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था समझौते के छठे वर्ष से लागू होगी और निर्धारित कोटा प्रणाली के तहत संचालित होगी।

महिंद्रा एंड महिंद्रा के अध्यक्ष (वाहन कारोबार) वेलुसामी आर ने कहा कि यह समझौता भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ‘राइट-हैंड-ड्राइव’ बाजार है और कंपनी अपने इलेक्ट्रिक एसयूवी पोर्टफोलियो के वैश्विक विस्तार के तहत इस अवसर का अध्ययन करेगी।

मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा कि कंपनी पहले ही अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवी ई-विटारा का यूरोप में निर्यात शुरू कर चुकी है और ब्रिटेन उसके प्रमुख बाजारों में शामिल है। उनके अनुसार, यह समझौता ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ की दिशा में सकारात्मक कदम साबित होगा।

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रवक्ता ने भी इस समझौते को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने तथा टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध और कोटा-आधारित व्यवस्था भारत निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ब्रिटेन में नए निर्यात अवसर उपलब्ध कराएगी।

समझौते के तहत 80,000 पाउंड तक की कीमत वाले भारतीय इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन यात्री वाहनों को निर्धारित कोटा के भीतर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। छठे वर्ष में कुल 17,600 वाहनों के निर्यात की अनुमति होगी, जबकि 15वें वर्ष तक यह कोटा बढ़कर 88,000 वाहनों तक पहुंच जाएगा।

हालांकि, भारत में बनी 80,000 पाउंड से अधिक दाम के इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन यात्री वाहनों पर एफटीए के तहत किसी तरह की शुल्क रियायत नहीं मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय वाहन उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के साथ-साथ भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सीईटीए दस्तावेज के मुताबिक, समझौते के 15वें वर्ष से ‘20,000 पाउंड से कम’ और ‘20,000-40,000 पाउंड’ श्रेणियों में शुल्क-मुक्त निर्यात का कोटा 34,000-34,000 वाहन प्रतिवर्ष होगा, जबकि ‘40,000-80,000 पाउंड’ श्रेणी के लिए यह सीमा 20,000 वाहन प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है।

भाषा अजय अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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