नई दिल्ली: “डॉ. विवेकी मरीजों की देखभाल के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती हैं. वह दिन-रात काम करती हैं ताकि हर व्यक्ति को वह इलाज मिल सके जिसका वह हकदार है.”
यह जानकारी उस दिल्ली के अस्पताल की वेबसाइट पर दी गई है, जिसे कथित तौर पर एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी नेटवर्क का केंद्र माना जा रहा है.
लेकिन अब पता चला है कि यह प्रोफाइल सिर्फ एक दिखावा थी.
असल में विवेकी एक नर्सिंग प्रोफेशनल है, जिसके पास न एमबीबीएस है और न ही एमडी की डिग्री. इसके बावजूद वह खुद को हीरा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल की मालिक और एमडी बताती थी. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 47-वर्षीय विवेकी हाल ही में पकड़े गए बाल तस्करी रैकेट की मास्टरमाइंड है, जिसका नेटवर्क पूरे उत्तर भारत में फैला हुआ था.
रोहिणी के बेगमपुर स्थित इस निजी अस्पताल में आईवीएफ उपचार के लिए आने वाले निःसंतान दंपतियों को अक्सर विवेकी अपने जाल में फंसा लेती थी और उनमें से कई उसके प्रस्ताव को ठुकराते नहीं थे. पुलिस के अनुसार, बच्चों की तस्करी राजस्थान और गुजरात के गांवों से की जाती थी.
14 जून को रैकेट में उसकी कथित भूमिका सामने आने के बाद विवेकी को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके अलावा 11 अन्य लोग भी जेल में हैं, जिन पर तस्कर, बिचौलिये और खरीदार के रूप में बच्चों की खरीद-फरोख्त कराने का आरोप है.
अब तक जांच में सामने आया है कि पिछले करीब दो वर्षों में यह रैकेट लगभग 30 शिशुओं की तस्करी में शामिल हो सकता है.
पुलिस उपायुक्त (मध्य) रोहित राजबीर सिंह ने कहा कि विवेकी कथित तौर पर इस अवैध तस्करी नेटवर्क को चलाने में अहम भूमिका निभाती थी. वह तस्करी कर लाए गए बच्चों को अपने अस्पताल में रखती थी और बांझपन के इलाज के लिए आने वाले निःसंतान दंपतियों में संभावित खरीदार तलाशती थी.
डीसीपी ने कहा, “जांच में पता चला है कि अस्पताल रिकॉर्ड, प्रसव संबंधी दस्तावेज, जन्म रिकॉर्ड और अन्य सहायक कागजात समेत कई जाली मेडिकल दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि बच्चे के माता-पिता होने का झूठा दावा साबित किया जा सके और शिशुओं का अवैध हस्तांतरण कराया जा सके.”
सिंह ने अस्पताल की वेबसाइट पर किए गए उस दावे को भी गलत बताया, जिसमें विवेकी को “7 साल से अधिक के क्लीनिकल अनुभव वाली एमबीबीएस डॉक्टर” बताया गया था.
उन्होंने कहा, “वह स्त्री रोग विशेषज्ञों की सहायता करती है और उसके पास बीएससी नर्सिंग, एमएससी क्रिटिकल केयर और ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में डॉक्टरेट की डिग्री है.”
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कथित सरगना अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ इसलिए लगाती थी क्योंकि वह नर्सिंग प्रोफेशनल थी और उसके पास डॉक्टरेट की डिग्री थी.
सूत्र ने कहा, “वह केवल सामान्य प्रसव की निगरानी कर सकती थी, सीजेरियन ऑपरेशन नहीं कर सकती थी. यह सब इसलिए किया गया क्योंकि उसने लोगों के बीच एक भ्रम पैदा कर रखा था. वह RMP (रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर) श्रेणी में आती थी और दिल्ली मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत थी.”
दिखावे की दुनिया
हीरा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल अपनी वेबसाइट पर खुद को एक “मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा संस्थान” बताता है, जो उच्च गुणवत्ता, किफायती और संवेदनशील चिकित्सा सेवाएं देने के लिए समर्पित है. वेबसाइट में दावा किया गया है कि विभिन्न प्रकार की चिकित्सा सेवाओं के लिए परिवार इस अस्पताल पर भरोसा करते हैं.
वेबसाइट के कई पन्नों पर विदेशी लोगों की तस्वीरें भी लगी हुई हैं.
वेबसाइट के अनुसार, अस्पताल सामान्य प्रसव, सीजेरियन डिलीवरी, ओपीडी परामर्श, डे-केयर उपचार और सामान्य चिकित्सा जैसी सेवाएं प्रदान करता है.
वेबसाइट में कहा गया है, “एनेस्थीसियोलॉजी में हमारी मुख्य विशेषज्ञता के अलावा, हम डेंटिस्ट्री, फिजियोथेरेपी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी और बाल रोग विभाग में भी उन्नत चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं.”
वेबसाइट में यह भी दावा किया गया है कि अस्पताल अब तक 1,000 से अधिक मरीजों का इलाज कर चुका है.
डीसीपी ने कहा कि अस्पताल से जुड़ी इन सभी जानकारियों के बारे में दिल्ली मेडिकल काउंसिल को सूचित किया जाएगा.
दिप्रिंट ने अस्पताल से फोन पर संपर्क कर उसका पक्ष जानने की कोशिश की. जवाब मिलने पर इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.
साजिश और किरदार
रैकेट के काम करने के तरीके को लेकर पुलिस के एक सूत्र ने रीमा पाल का उदाहरण दिया, जिसे विवेकी ने कथित तौर पर गर्भवती महिला बनकर पेश होने के लिए कहा था.
अस्पताल के कर्मचारियों ने रीमा को तीन दिनों के लिए भर्ती रखा, ताकि ऐसा लगे कि उसने वास्तव में बच्चे को जन्म दिया है. उसके नाम पर 1.20 लाख रुपये के कई बढ़े-चढ़े बिल भी बनाए गए.
सूत्र ने कहा, “उन्होंने दंपति से कहा कि यह सिर्फ एक दिखावा है, ताकि मामला असली लगे. चूंकि जन्म प्रमाण पत्र बनवाना था, इसलिए यह दिखाना ज़रूरी था कि रीमा ने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया है. ऐसा कई अन्य दंपतियों के साथ भी हुआ.”
जाली दस्तावेज़ तैयार किए गए और उन पर विवेकी ने हस्ताक्षर किए. पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निःसंतान दंपति तस्करी करके लाए गए बच्चे को अपना बच्चा बता सकते थे.
पुलिस के अनुसार, अस्पताल उस समय की कड़ी का काम करता था जब बच्चे को खरीदा जाता था और बाद में बेचा जाता था. सौदा तय होने तक तस्करी करके लाए गए बच्चों को अस्पताल में रखा जाता था. पुलिस ने बताया कि ज्यादातर बच्चे 4-5 दिन या 3-4 महीने की उम्र के थे.
सूत्र ने कहा, “विवेकी ने जाली दस्तावेज तैयार किए, बच्चों की तस्करी कराई—और यह सब एक पंजीकृत अस्पताल की आड़ में किया गया.”
पुलिस ने प्रतिभा नाम की आरोपी को भी इस रैकेट की एक अहम सदस्य बताया है. उसके पास MRIT (मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी) में मास्टर्स की डिग्री है.
पुलिस के अनुसार, फ्रीलांस लैब टेक्नीशियन के रूप में काम करने वाली प्रतिभा हीरा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में बच्चों की तस्करी कराने में सक्रिय भूमिका निभाती थी.
पुलिस ने बताया कि 34-वर्षीय प्रतिभा पहले भी एक तस्करी मामले में गिरफ्तार हो चुकी है.
एक अन्य पुलिस सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि प्रतिभा कई अस्पतालों में जाती थी और ऐसे निःसंतान दंपतियों की तलाश करती थी, जो बच्चा पाने के लिए बड़ी रकम खर्च करने को तैयार हों.
इसके बाद वह रैकेट के दूसरे सदस्य कालिया से संपर्क करती थी. पुलिस सूत्र के अनुसार, कालिया राजस्थान के पाली से “कम कीमत” पर बच्चे लाता था, जिन्हें बाद में दिल्ली में “बेचा” जाता था.
पुलिस का कहना है कि कानूनी माता-पिता होने का झूठा दावा साबित करने और बच्चों को एक परिवार से दूसरे परिवार तक पहुंचाने के लिए जाली रिकॉर्ड और सहायक दस्तावेज तैयार किए जाते थे.
इसके बाद बच्चों को भारी कीमत पर बेचा जाता था. पुलिस के मुताबिक, एक बच्ची 1 लाख रुपये में और एक लड़का 2 लाख रुपये में खरीदा जाता था.
अब तक पुलिस मध्य प्रदेश और हरियाणा के दो-दो दंपतियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिन्होंने तस्करी करके लाए गए बच्चों को खरीदा था.
तीसरे पुलिस सूत्र ने कहा, “ये लोग आपसी संपर्कों के जरिए बाकी आरोपियों से जुड़े थे. पूरा नेटवर्क आपसी भरोसे पर चलता था. अस्पताल की मालिक (विवेकी) को भी इसमें शामिल किया गया था.”
अधिकारी ने बताया कि रैकेट से मिलने वाली रकम सभी सदस्यों के बीच उनके काम के हिसाब से बांटी जाती थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)