नयी दिल्ली, छह अक्टूबर (भाषा) सांख्यिकी मंत्रालय ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरित मुफ्त खाद्यान्न को उचित रूप से दर्शाने के लिए एक कार्यप्रणाली का प्रस्ताव किया है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का उपयोग मौद्रिक नीति, जीवन-यापन की लागत की गणना और सामाजिक कल्याण योजनाएं बनाने में किया जाता है।
सीपीआई, परिवारों द्वारा उपभोग की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं और सेवाओं के खुदरा मूल्यों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) सीपीआई का आधार संशोधन कर रहा है। इस प्रक्रिया में मूल्य संग्रह का दायरा बढ़ाना, मौजूदा पद्धतियों को बेहतर बनाना, नए आंकड़े स्रोतों की खोज और मूल्य संग्रह एवं सूचकांक संकलन में आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग शामिल है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा कि जनवरी 2023 से सरकार ने मुफ्त खाद्यान्न वितरण योजना शुरू की थी, जिसमें 75 प्रतिशत ग्रामीण और 50 प्रतिशत शहरी आबादी शामिल है। मंत्रालय ने कहा कि सीपीआई और मुद्रास्फीति मापन में इसके प्रभाव का उचित आकलन जरूरी हो गया है।
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, भारतीय रिजर्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, अन्य संयुक्त राष्ट्र संस्थानों और सरकारी संगठनों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है।
इस विषय पर नवंबर 2024 में एक विचार-मंथन सत्र भी आयोजित किया गया था, जिसके बाद मंत्रालय ने दिसंबर 2024 में पहला चर्चा पत्र प्रकाशित किया।
भाषा पाण्डेय रमण
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