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Thursday, 14 May, 2026
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ऑनलाइन गेमिंग की लत में बना कातिल: पिता का गला काटा, मां के सिर पर हमला

अमृतसर और लखनऊ से लेकर हैदराबाद तक, दिप्रिंट ने पता लगाया कि ऑनलाइन बेटिंग गेम्स की लत ने लोगों को अपने ही करीबियों के खिलाफ कैसे हिंसक बना दिया.

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यह तीन पार्ट की सीरीज़ की आखिरी रिपोर्ट है. पार्ट 1 और 2 यहां पढ़ सकते हैं.

नई दिल्ली: यह अमृतसर की मोहकमपुरा कॉलोनी में रहने वाले दो प्रवासी भाइयों के लिए एक आम शाम जैसी ही थी. ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होने के बावजूद दोनों भाइयों ने फैक्ट्रियों में मेहनत करके दो मंजिला घर बनाया था और एक ऐसी ज़िंदगी खड़ी की थी, जिसे बेहतर भविष्य का सपना देखने वाले प्रवासी मजदूरों के हिसाब से अच्छा माना जाता है.

उनके बच्चे या तो शादीशुदा थे या पढ़ाई कर रहे थे और ऐसा लगता था कि सबकुछ ठीक चल रहा है. छोटे भाई शिव नाथ भारती याद करते हैं कि दोनों भाइयों और उनके परिवारों के बीच रिश्ते भी लगभग बिल्कुल अच्छे थे.

फिर उनकी ज़िंदगी में ऑनलाइन गेमिंग का खतरा आ गया. पिछले साल 20-21 मई की रात के बीच बड़े भाई की पत्नी बबीता देवी ने तेज़ चीखें सुनीं. आवाज़ उनकी बेटी निशा (21) के कमरे से आ रही थी, जिसकी उसी रात हत्या कर दी गई.

अमृतसर पुलिस को दिए अपने बयान में बबीता ने बताया कि जब वह बेटी के कमरे में पहुंचीं तो उन्होंने क्या देखा. उनके मुताबिक, शिव नाथ भारती का छोटा बेटा संजीव कथित तौर पर चाकू से निशा पर बार-बार हमला कर रहा था. बबीता का दावा है कि उसके हाथों में ग्लव्स थे.

जांच के बाद पंजाब पुलिस ने कहा कि संजीव ऑनलाइन गेम और बेटिंग का आदी था. वह कथित तौर पर अपनी बड़ी कजिन के कमरे से पैसे और कीमती सामान चुराने की कोशिश कर रहा था. जब निशा ने उसे रोकने की कोशिश की तो संजीव ने उस पर कई बार चाकू से हमला किया. चोटों की वजह से उसकी मौत हो गई.

संजीव के पिता बबीता देवी की कहानी से सहमत नहीं हैं, लेकिन वह पंजाब पुलिस की इस बात से इनकार भी नहीं करते कि उनका बेटा ऑनलाइन गेम्स का आदी था.

बेटिंग गेम्स का स्क्रीनग्रैब | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट
बेटिंग गेम्स का स्क्रीनग्रैब | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट

यह ऑनलाइन बेटिंग पर दिप्रिंट की तीन पार्ट वाली सीरीज की आखिरी रिपोर्ट है. पहली रिपोर्ट में इस इंडस्ट्री की गहराई से पड़ताल की गई थी, जबकि दूसरी रिपोर्ट ऑनलाइन बेटिंग की लत से जुड़ी आत्महत्याओं पर केंद्रित थी.

तीसरे पार्ट में बताया गया है कि खासकर युवाओं के बीच ऑनलाइन बेटिंग की बढ़ती पहुंच कैसे परिवारों को तोड़ रही है. बढ़ते कर्ज और नुकसान की भरपाई के सीमित रास्तों ने कई लती लोगों को अपने जान-पहचान वालों, दोस्तों, रिश्तेदारों और यहां तक कि अपने माता-पिता के खिलाफ भी गंभीर अपराध करने के लिए मजबूर कर दिया.

क्रूरता और धोखे की एक के बाद एक कहानी

रविंदर (19) ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में पूरी तरह फंस चुका था. हैदराबाद के सेरिलिंगमपल्ली इलाके में राजमिस्त्री का काम करने वाले उसके पिता उसकी रोज़मर्रा की गतिविधियों पर लगातार नज़र नहीं रख पाते थे. पिछले साल मार्च से जून के बीच चार महीनों में रविंदर करीब 3 लाख रुपये की बेटिंग लगा चुका था.

इस सीरीज की पिछली रिपोर्टों में दिप्रिंट ने बताया था कि बेटिंग में नुकसान और उस नुकसान की भरपाई की कोशिश कैसे एक कभी खत्म न होने वाले संकट को जन्म देती है.

रविंदर का मामला भी अलग नहीं था. काफी पैसा हारने और दोस्तों व परिवार से उधार लेने के बाद वह बुरी तरह फंस चुका था. तभी उसे एक उम्मीद की किरण दिखाई दी.

मामले की जानकारी रखने वाले तेलंगाना पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “उसके पिता गांव की ज़मीन गिरवी रखकर 6 लाख रुपये लाए थे, ताकि वह पैसे अपने रिश्तेदारों को दे सकें.”

इस पैसों के ढेर में रविंदर को एक ऐसा सहारा दिखा, जिससे वह एक ही बार में अपना 3 लाख रुपये का कर्ज चुका सकता था.

अधिकारी ने कहा, “उसने बिना पिता को बताए उस रकम में से 3 लाख रुपये निकाल लिए और पूछे जाने पर पिता को गुमराह किया. इस बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई और आखिर में रविंदर ने वादा किया कि उसका दोस्त पैसे लौटा देगा.”

इसके बाद रविंदर ने अपने ही पिता के खिलाफ साजिश रचना शुरू कर दी. पिछले साल 1 जुलाई को उसने अपने पिता को गाचीबौली की एक सुनसान जगह पर बुलाया. उसने कहा कि उसका दोस्त पैसे लौटाना चाहता है. माहौल हल्का करने के बहाने रविंदर ने अपने पिता को “क्लोज योर आइज” नाम का खेल खेलने के लिए मना लिया.

अपने बेटे की साजिश से अनजान रविंदर के पिता हनुमंथु ने आंखों पर पट्टी बांधने के लिए हामी भर दी. यह कपड़ा रविंदर अपने साथ लाया था.

कुछ मिनट बात करने के बाद रविंदर ने कथित तौर पर छिपा हुआ चाकू निकाला और अपने पिता का गला काट दिया.

रविंदर यहीं नहीं रुका. जेल जाने से बचने के लिए उसने एक और झूठी कहानी बनाने की कोशिश की. अधिकारी ने कहा, “उसने अपने चाचा और रिश्तेदारों को फोन करके बताया कि उसके पिता ने आत्महत्या कर ली है.”

हालांकि, उसकी बातें बार-बार बदल रही थीं, जिससे उसके चाचा को शक हुआ. इसके बाद उन्होंने साइबराबाद पुलिस से संपर्क किया. लगातार पूछताछ के बाद रविंदर ने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूल कर लिया.

तीन महीने बाद, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां निखिल यादव ने अपनी मां रेनू यादव की हत्या कर दी. उसने तीन दिन तक लखनऊ पुलिस और अपने परिवार को गुमराह किया, लेकिन आखिर में उसका “जरा भी पछतावा न होने वाला” रवैया ही उसके खिलाफ सबूत बन गया.

गिरफ्तारी के बाद लखनऊ हत्या मामले का आरोपी | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट
गिरफ्तारी के बाद लखनऊ हत्या मामले का आरोपी | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट

उसकी मां रेनू यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उसकी क्रूरता की हद दिखा दी. रिपोर्ट के मुताबिक, बेटे द्वारा पहुंचाई गई सात चोटों की वजह से उनकी मौत हुई.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि उनके सिर के अलग-अलग हिस्सों पर गहरी और फटी हुई चोटें थीं. सिर की चोटों के कारण कोमा में जाना उनकी मौत की अंतिम वजह बना.

पुलिस जांच में पता चला कि रेनू यादव पर बार-बार हमला किया गया था. आरोप है कि उनके बेटे ने पहले स्क्रूड्राइवर से हमला किया और फिर गैस सिलेंडर से वार किया.

हालांकि, लखनऊ में उनके घर के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज में निखिल सामान्य तरीके से तैयार होकर बाइक पर घर से निकलता दिखा. घर से निकलने से थोड़ी देर पहले उसने अपने पिता को फोन करके कहा था कि किसी ने उसकी मां पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया है.

जांच के बाद लखनऊ पुलिस ने कहा कि निखिल लखनऊ के के.के.वी. डिग्री कॉलेज में बैचलर ऑफ आर्ट्स का छात्र था. पुलिस के अनुसार, वह बेटिंग प्लेटफॉर्म्स का नियमित इस्तेमाल करता था और उसने अपने कर्ज चुकाने के लिए मां के गहने गिरवी रख दिए थे.

पूछताछ के दौरान निखिल ने बताया कि हत्या वाले दिन उसकी मां बार-बार उस कमरे में आ रही थीं, जहां से वह गहने चुराने की कोशिश कर रहा था. इससे पहले रात में भी वह उसी कमरे में सोई थीं, जिससे वह चोरी नहीं कर पाया.

इन लतों की वजह से लोगों में आने वाली क्रूरता के पैटर्न का अध्ययन करने वाले क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट रज मित्रा ने कहा, “लत की सबसे बड़ी बात, खासकर ऑनलाइन बेटिंग में, यह है कि यह सही और गलत की समझ को बदल देती है.” उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि लत में फंसे लोग नैतिकता और सामान्य समझ से खुद को अलग कर लेते हैं.

उन्होंने आगे कहा, “अपराध, अपराध जैसा नहीं लगता. इंसान पूरी तरह खुद तक सीमित हो जाता है. गलत उम्मीदें बहुत तेज़ी से बढ़ती हैं. जब कोई कर्ज में होता है, तो उसे लगता है कि वह नुकसान की भरपाई कर लेगा. लेकिन उसका वास्तविकता से संपर्क टूटने लगता है.”

घटनास्थल से पुलिस द्वारा जब्त की गई चीजें | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट
घटनास्थल से पुलिस द्वारा जब्त की गई चीजें | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट

अधूरे रह गए सपने

पिछले साल अमृतसर में हुए मामले और इस साल मार्च में दिल्ली के कैलाश हिल्स में हुई घटना में डराने वाली समानता है.

इस साल के मामले का आरोपी राहुल मीणा था, जिसने एक आईआरएस अधिकारी की बेटी की हत्या कर दी. 22 साल की यह युवती आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएट थी और यूपीएससी की तैयारी कर रही थी. राहुल पहले आईआरएस अधिकारी के घर में काम करता था, लेकिन करीब डेढ़ महीने पहले बिलों में कथित गड़बड़ी के कारण उसे नौकरी से निकाल दिया गया था.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, राहुल ने इलाके के कई घरेलू कामगारों से कर्ज लिया हुआ था. जिन लोगों ने राहुल को पैसे उधार दिए थे, उनकी शिकायत मिलने के बाद आईआरएस अधिकारी ने उसे काम और घर दोनों छोड़ने के लिए कहा था.

ऑनलाइन गेम्स की लत के कारण पहले से ही कर्ज में डूबे राहुल के मन में आईआरएस अधिकारी और उनके परिवार के प्रति गुस्सा भर गया था, जिसने 22 अप्रैल को हुई हत्या की ओर धकेला.

पुलिस के अनुसार, घटना के समय पीड़िता के माता-पिता जिम गए हुए थे. राहुल को उनकी लोकेशन पता थी और यह भी मालूम था कि घर में एंट्री पासकी से होती है.

उसने युवती को पढ़ाई करते हुए देखा और कथित तौर पर उससे पैसे मांगे.

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “जब युवती ने पैसे देने से मना किया और उसे जाने के लिए कहा, तो उसने किसी धारदार चीज़ से उस पर हमला किया. हमें शक है कि वह लैंप था. वह नीचे गिर गई. बेहोश होने के बावजूद वह ज़िंदा थी. आरोप है कि इसके बाद राहुल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. फिर वह उसे नीचे वाले फ्लोर पर घसीटकर ले गया ताकि लॉकर तक पहुंच सके. उसने बायोमेट्रिक लॉक खोलने के लिए उसके खून लगे हाथों की उंगलियों का इस्तेमाल किया, लेकिन लॉक नहीं खुला. इसके बाद उसने स्क्रूड्राइवर और दूसरे औज़ारों से लॉक तोड़ने की कोशिश की.”

आरोप है कि यह दो दिनों में राहुल द्वारा किया गया दूसरा रेप था. एक दिल्ली पुलिस अधिकारी ने कहा कि इससे उसके “विकृत” दिमाग का पता चलता है.

राहुल करीब 2 से 2.5 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गया. वह कैब से पालम रेलवे स्टेशन पहुंचा. पुलिस के अनुसार, “उसका प्लान था कि पैसे लेकर अलवर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन पकड़े, परिवार को पैसे देकर कर्ज चुकाए और फिर हमेशा के लिए अलवर छोड़ दे.”

लेकिन जब राहुल पालम पहुंचा, तब तक ट्रेन निकल चुकी थी. अब उसे नया प्लान बनाना था.

उसने द्वारका में ऑनलाइन होटल बुक किया और कुछ समय वहां छिपा रहा. वह अगली पैसेंजर ट्रेन से अलवर जाने का इंतज़ार कर रहा था. हालांकि, शाम तक दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ लिया.

पुलिस के एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि राहुल के भी सपने थे, जब वह 12वीं क्लास में था. तीन साल पहले फेसबुक स्क्रॉल करते समय उसने ऑनलाइन बेटिंग के विज्ञापन देखे और उन्हें आजमाने के लिए तैयार हो गया.

अधिकारी ने कहा, “राहुल तीन पत्ती कार्ड गेम और लूडो खेलता था. उसने छोटी रकम से बेटिंग शुरू की. जब पैसे हार गया, तो उसका ध्यान पैसे वापस निकालने पर था. इसलिए उसने और बेट लगाए. यह एक खतरनाक चक्र बन गया, जो कभी खत्म नहीं हुआ. वह लगातार उधार लेता रहा और लगातार हारता रहा. उस समय तक उस पर करीब 5 से 7 लाख रुपये का कर्ज हो चुका था, जिसे वह चुका नहीं पा रहा था और लोग उससे पैसे वापस मांगने लगे थे.”

एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि उस समय राहुल को लगने लगा था कि पैसे वापस पाने का उसके पास जुआ खेलने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है. उसे आईआरएस अधिकारी के घर से 20,000 रुपये मिलते थे, लेकिन वह काफी नहीं था.

उक्त अधिकारी ने कहा, “वह लगातार जुआ खेलता रहा, यह सोचकर कि कुछ और पैसे जीत जाएगा और फिर जिन लोगों का पैसा देना है, उन्हें लौटा देगा. पैसे जुटाने के लिए उसने मोबाइल फोन और घर की दूसरी चीज़ें भी बेच दीं. और जब कुछ भी काम नहीं आया, तो उसका आखिरी रास्ता आईआरएस अधिकारी के घर में लूट करना बन गया.”

राहुल मीणा को पुलिस ले जाते हुए | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट
राहुल मीणा को पुलिस ले जाते हुए | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट/दिप्रिंट

राहुल के पिता अलवर में किसान हैं. पहले वह एक सरकारी दफ्तर में सफाईकर्मी के तौर पर काम करते थे. अधिकारी ने कहा, “मीणा को सिफारिश के जरिए नौकरी मिली थी. अलवर के जीएसटी अधिकारियों ने आईआरएस अधिकारी को राहुल को काम पर रखने की सलाह दी थी. उसका कोई सर्वेंट वेरिफिकेशन नहीं हुआ था.”

अब आईआरएस अधिकारी का परिवार इस बात का पछतावा कर रहा है कि अगर वेरिफिकेशन हो गया होता, तो शायद उन्हें पहले ही सतर्क कर दिया जाता.

गिरफ्तारी के एक दिन बाद, सफेद कपड़े से चेहरा ढके राहुल को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच साकेत जिला अदालत में पेश किया गया. जमीन की तरफ देखते हुए और धीमी आवाज़ में उसने अदालत से कहा, “गलती हुई है मुझसे, अपराध हुआ है. पश्चाताप है.”

उसने अदालत से कहा, “मैं पैसे लेने के लिए घर में घुसा था.” इसके बाद अदालत ने आगे की जांच के लिए उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

संजीव की कजिन निशा की भी बेहद दर्दनाक मौत हुई. वह अमृतसर के संत सिंह सुखा सिंह (SSSS) कॉलेज ऑफ कॉमर्स फॉर वूमेन में बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लिकेशंस (BCA) के अंतिम वर्ष की छात्रा थी और उसके सामने लंबा करियर पड़ा था.

जिस रात संजीव ने कथित तौर पर चाकू मारकर उसकी हत्या की, उससे पहले तक वह अमृतसर के एक दूसरे संस्थान में बीसीए सेकंड ईयर में पढ़ने वाली अपनी छोटी कजिन के लिए प्रेरणा थी.

जांच में पंजाब पुलिस को पता चला कि संजीव ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म 4Rabet पर लगातार खेलता था और घटना से पहले के कुछ महीनों में वह 5 लाख रुपये से ज्यादा हार चुका था.

जहां मनोवैज्ञानिक रजत मित्रा इस बात की चर्चा करते हैं कि लोग अपराध की ओर कैसे बढ़ जाते हैं, वहीं वह ऐसे मामलों की भी बात करते हैं जहां लोगों ने अपनी जान तक दे दी.

मित्रा ने कहा कि लत में फंसे लोगों के लिए कर्ज का बोझ धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि उसे संभालना मुश्किल हो जाता है. इससे उनमें निराशा बढ़ती है और वे बड़े और खतरनाक कदम उठाने लगते हैं.

उन्होंने आगे कहा, “कर्ज के दबाव में लोग उलझन में पड़ जाते हैं. ऐसा नहीं है कि वे सिर्फ डिप्रेशन में होते हैं. उनमें उम्मीद खत्म होने लगती है. उन्हें पता होता है कि वे अपना नुकसान वापस नहीं निकाल पाएंगे. उस समय उन्हें लगता है कि उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है.”

संजीव के पिता शिव नाथ भारती बताते हैं कि वह अपने बेटे की ऑनलाइन गेम्स की लत को समय रहते समझ नहीं पाए और यह भी नहीं जान पाए कि इसे रोकने के लिए क्या किया जा सकता था.

भारती ने दिप्रिंट से कहा, “मोबाइल फोन में पहले से ही गेम्स होते हैं और हर बार कोई ऐप खोलने पर विज्ञापन भी आते रहते हैं. हम फैक्ट्रियों में काम करते हैं और 24 घंटे बच्चों के व्यवहार पर नज़र नहीं रख सकते.”

हालांकि, वह अपनी भाभी की शिकायतों और पंजाब पुलिस की इस जांच से सहमत नहीं हैं कि उनके बेटे ने यह अपराध किया, लेकिन वह इस बात से इनकार भी नहीं करते कि बेटिंग ने उनके बेटे की जिंदगी पर बुरा असर डाला. उन्होंने माना कि संजीव ने एक बार करीब 60,000 रुपये के लिए अपनी बाइक गिरवी रख दी थी.

उन्होंने कहा, “मुझे इसके बारे में बहुत देर से पता चला, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि उस पर इतने गंभीर आरोप लगेंगे. मेरा बेटा जेल में है और उसे कई साल की सजा का सामना करना पड़ रहा है. मेरा परिवार टूट चुका है और अब उसे फिर से जोड़ पाना मुश्किल है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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