मुंबई: लाल रंग की मशहूर बस, जो उपनगरीय रेलवे के बाद मुंबई की दूसरी लाइफलाइन मानी जाती है, पिछले लगभग 100 सालों से शहर की सड़कों पर चल रही है. फिल्मों, इतिहास की किताबों और पेंटिंग्स जैसी लोकप्रिय संस्कृति में यह बस लंबे समय से शहर की पहचान का हिस्सा रही है और अक्सर मुंबई को दिखाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है.
लेकिन पिछले एक दशक में बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) द्वारा चलाई जाने वाली BEST बसों की मौजूदगी कम होती गई है. लगातार फंड की कमी, बढ़ते घाटे और घटते बस बेड़े ने शहर के इस पुराने प्रतीक को कमजोर कर दिया है.
“बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) द्वारा मंजूर किया गया बजट केवल लगभग 1,000 करोड़ रुपये है, जो बहुत कम है. मुझे समझ नहीं आता कि बीएमसी ज्यादा फंड क्यों नहीं दे सकती? BEST खुद बीएमसी का ही हिस्सा है. मैं इस मुद्दे को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के सामने उठा रही हूं,” BEST समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने दिप्रिंट से कहा. यह 17 सदस्यों की समिति है जो BEST के कामकाज को संभालती है.
2013 से बीएमसी BEST को बजट सहायता दे रही है. लेकिन 2019 में नकदी संकट से जूझ रही BEST को बचाने के लिए उसका बजट बीएमसी के बजट में मिला दिया गया.
लेकिन BEST को मिलने वाला बजट अब तक उत्साहजनक नहीं रहा है.
बजट के विलय के बाद से BEST को पिछले दशक में बड़े सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए तय बजट का केवल 2–5 प्रतिशत हिस्सा मिला है. इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट निजी वाहनों की यात्रा आसान बनाने पर केंद्रित रहे हैं.
इस समय शहर में 2,792 BEST बसें हैं. शहर की आबादी के हिसाब से मुंबई में लगभग 12,000 बसें होनी चाहिए. लेकिन कई अधिकारियों के अनुसार BEST को ठीक से चलाने के लिए 7,000–8,000 बसों की जरूरत है.
“हमारे संचालन को सही तरीके से चलाने के लिए हमारे बेड़े में कम से कम 7,000 बसें होनी चाहिए,” विश्वासराव ने दिप्रिंट से कहा.
BEST समिति का कहना है कि वह बस सेवा को फिर से बेहतर बनाने पर काम कर रही है.
BEST को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक उसके बेड़े में लगभग 2,512 इलेक्ट्रिक बसें जुड़ जाएंगी और 2027 तक 1,500 और बसें जुड़ेंगी, BEST के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया. इन बसों की खरीद के लिए BEST को कम से कम 4,000 करोड़ रुपये की जरूरत है.

“सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ गया है और हमारी बसें ट्रैफिक में फंस जाती हैं, जिससे इंतजार का समय बढ़ जाता है. इसके अलावा हमारे पास बसों की संख्या भी कम है. हमारी समस्याओं का एकमात्र समाधान बसों की संख्या बढ़ाना है,” अधिकारी ने कहा.
दिप्रिंट ने BEST की महाप्रबंधक सोनिया सेठी से संदेश और फोन के जरिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. जवाब मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी.

घटता बस बेड़ा
डबल डेकर BEST बसें 1937 में शुरू होने के बाद से 1990 के दशक तक बहुत लोकप्रिय थीं. लेकिन समय के साथ शहर बढ़ता गया और पुरानी डबल डेकर बसें इस्तेमाल के लिए ठीक नहीं रहीं, जिसके कारण उन्हें बंद कर दिया गया. इसके बाद BEST ने सिंगल डेकर, मिडी और मिनी बसों का इस्तेमाल शुरू किया.
मौजूदा 2,792 बसों में से केवल 249 बसें BEST की अपनी हैं जबकि बाकी बसें वेट लीज पर हैं. वेट लीज मॉडल में BEST बसों की मालिक नहीं होती. निजी ऑपरेटर बसें, ड्राइवर और कंडक्टर उपलब्ध कराते हैं.

BEST का बस बेड़ा लगातार कम हो रहा है. 2022 में उसके पास 3,400 बसों का बेड़ा था और 2023 के अंत तक 3,000 इलेक्ट्रिक बसें जोड़ने की योजना थी. संगठन ने 2027 तक पूरे बेड़े को इलेक्ट्रिक बनाने और बसों की संख्या 10,000 तक पहुंचाने की योजना बनाई थी.
लेकिन 2025 तक कुल बेड़ा घटकर 2,855 रह गया, जिनमें केवल 920 बसें BEST की अपनी थीं. 2027 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा तैयार करने की योजना थी.
BEST ने 4,750 सिंगल डेकर एसी इलेक्ट्रिक बसों और 200 डबल डेकर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार ठेकेदारों को ऑर्डर दिए हैं. 2021-22 में दक्षिण मुंबई के कुछ रूटों पर डबल डेकर बसें फिर से शुरू की गईं.
अब तक 938 बसें मिल चुकी हैं, जिनमें 154 डबल डेकर बसें शामिल हैं, और बाकी बसों की डिलीवरी 2026-2027 तक चरणों में होगी. इस समय BEST के पास केवल 1,324 इलेक्ट्रिक बसें हैं, जिनमें 50 डबल डेकर हैं. इसी महीने एक डबल डेकर बस आग लगने से नष्ट हो गई, जिससे संख्या घटकर 49 रह गई.
अधिकारियों ने कहा कि देरी के लिए ठेकेदारों पर जुर्माना लगाया गया है, लेकिन सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण काम प्रभावित हुआ है.
यात्रियों के लिए घटते बस बेड़े का मतलब बस स्टॉप पर ज्यादा इंतजार है, जो अब औसतन लगभग 30 मिनट है. “यह पिछले साल के 40 मिनट से कम है, लेकिन 30 मिनट भी बहुत ज्यादा है. पिछले कुछ सालों में ट्रैफिक काफी बढ़ गया है और इसलिए हमारी बसों को ज्यादा समय लगता है. लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल करने लगे हैं,” ऊपर बताए गए अधिकारियों में से एक ने कहा.

इसके कारण यात्रियों की संख्या लगातार कम हो रही है. इसमें कारों, ऐप आधारित टैक्सियों, साझा टैक्सियों और ऑटो रिक्शा की बढ़ती संख्या का भी असर है.
करीब एक दशक पहले तक BEST बसें हर दिन लगभग 45 लाख यात्रियों को ले जाती थीं. कोविड से पहले यह संख्या घटकर 32 लाख हो गई. कोविड के दौरान यह संख्या और घटकर 28 लाख हो गई. और अब BEST अधिकारियों के अनुसार यह संख्या घटकर 20 लाख रह गई है, जो BEST के इतिहास में सबसे कम है.
BEST के एक पूर्व महाप्रबंधक, जिन्होंने नाम नहीं बताने की शर्त पर बात की, ने दिप्रिंट को बताया कि सबसे बड़ी चुनौती बसों की कम संख्या है. “मेरे समय में हमारा ध्यान छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा वाली बसों पर था.”
उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति हर दिन बोरीवली से नरीमन पॉइंट तक उत्तर से दक्षिण की यात्रा बस में नहीं करना चाहेगा, क्योंकि इसमें कम से कम 2 घंटे लग सकते हैं.

“इतनी लंबी दूरी के लिए उपनगरीय ट्रेनें बेहतर विकल्प हैं. हमने मेट्रो रेल के लिए फीडर सेवाओं के बारे में भी सोचा था, जो अंतिम दूरी की कनेक्टिविटी दे सकें,” अधिकारी ने कहा.
ऊपर बताए गए वरिष्ठ BEST अधिकारी भी इससे सहमत हैं. BEST बसें फीडर और अंतिम दूरी की कनेक्टिविटी का काम करती हैं. लेकिन यात्रियों को परेशानी होती है क्योंकि कई रूट बंद कर दिए गए हैं, बदल दिए गए हैं या उनके बारे में सोचा ही नहीं गया.

“हम लाभ कमाने का काम नहीं करते बल्कि सेवा देते हैं. और इस संस्था को फिर से बेहतर बनाने के लिए सरकार को हमें प्राथमिकता देनी चाहिए. मुंबई में हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं बनाई जा रही हैं, जो मुख्य रूप से कार इस्तेमाल करने वालों के लिए हैं. अगर उस पैसे का कुछ हिस्सा यहां लगाया जाए तो यह लाइफलाइन फिर से जीवित हो सकती है,” ऊपर बताए गए दूसरे अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा.
बजट का दबाव
पिछले कुछ वर्षों में, महायुति सरकार ने बीएमसी के जरिए गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड, कोस्टल रोड और दहिसर के एलिवेटेड लिंक रोड जैसी परियोजनाओं के लिए बड़े बजट आवंटित किए हैं.
ये सभी मिलकर इस वित्तीय वर्ष के नागरिक निकाय के पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा हैं — लगभग 80,800 करोड़ रुपये के बजट में से करीब 48,000 करोड़ रुपये.
बीएमसी बजट के अनुसार, 2012-13 से लेकर जनवरी 2026 तक बीएमसी ने BEST उपक्रम को 12,028.81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है.
फिलहाल, BEST लगभग 10,000 करोड़ रुपये के भारी घाटे में है. पिछले साल BEST ने एसी और नॉन-एसी दोनों बसों का किराया दोगुना कर दिया था. नॉन-एसी बसों का न्यूनतम किराया 5 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया और एसी बसों का किराया 6 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये कर दिया गया.
एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया. “इस किराया बढ़ोतरी से यात्रियों की संख्या भी कम हुई है. पहले नॉन-एसी बस का किराया 10 रुपये था. बाद में इसे घटाकर 5 रुपये किया गया था और फिर पिछले साल दोबारा 10 रुपये कर दिया गया. लेकिन 2019 में बीएमसी ने हमें राजस्व के नुकसान की भरपाई करने की सलाह दी थी, जो नहीं हुआ और हम लगातार नुकसान झेलते रहे.” अधिकारी ने यह भी कहा.
‘कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने में असमर्थ’
BEST की खराब आर्थिक स्थिति का असर उसके कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है.
विश्वासराव ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने BEST चलाने के लिए कम से कम 4,000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन की मांग की है. “हम अपने कर्मचारियों को ग्रेच्युटी नहीं दे पा रहे हैं. वे परेशान हैं क्योंकि हमारे पास उनके बकाया देने के लिए पैसे नहीं हैं.”
उन्होंने आगे कहा. “बीएमसी को इस बारे में सच में कुछ करना चाहिए और मैं इस मुद्दे पर व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे) से बात करने वाली हूं.”
शिवसेना यूबीटी की पार्षद और BEST की पैनल सदस्य प्रवीणा मोरजकर ने दिप्रिंट से कहा कि आम नागरिकों के लिए BEST को फिर से मजबूत करना जरूरी है.
“मैंने मांग की थी कि BEST को बचाने के लिए उसे पूरी तरह बीएमसी में मिला दिया जाए. कोई निजीकरण नहीं होना चाहिए. समिति में हम सभी अपने BEST को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.” मोरजकर ने कहा.
उन्होंने आगे कहा. “कर्मचारियों को उनका बकाया, पीएफ नहीं मिल रहा है. ड्यूटी के दौरान अगर किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को भी कोई सहायता नहीं मिल रही है. यह बहुत दुखद स्थिति है. हमारी बीएमसी एशिया की सबसे अमीर संस्था है. इसलिए अगर बीएमसी हमें अपने में मिला लेती है, तो इससे BEST को मदद मिलेगी.”