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Thursday, 14 May, 2026
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भारत टैक्सी ने लखनऊ और चंडीगढ़ को अपने नेटवर्क में जोड़ा, ड्राइवर-ओन्ड प्लेटफॉर्म की ग्रोथ बढ़ी

कोऑपरेटिव समर्थित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म, जो जीरो-कमीशन मॉडल पर काम करता है, अगले महीने मुंबई में लॉन्च की तैयारी कर रहा है और एक साल के भीतर देश के सभी बड़े शहरों में विस्तार की योजना बना रहा है.

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नई दिल्ली: प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स के विकल्प के तौर पर खुद को पेश करने वाला कोऑपरेटिव समर्थित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म भारत टैक्सी ने अपने राष्ट्रीय विस्तार प्लान को तेज़ करते हुए लखनऊ और चंडीगढ़ में सॉफ्ट लॉन्च शुरू कर दिया है.

भारत टैक्सी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “भारत टैक्सी एप्लिकेशन पर लखनऊ और चंडीगढ़ शहरों के लिए बुकिंग शुरू हो गई है.”

एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि प्लेटफॉर्म ने लखनऊ में करीब 25,000 ड्राइवर और चंडीगढ़ में 15,000 ड्राइवर जोड़े हैं. रजिस्टर्ड फ्लीट में बाइक टैक्सी, थ्री-व्हीलर और कैब शामिल हैं.

यह नया विस्तार भारत टैक्सी के फरवरी 2026 में सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के तहत औपचारिक लॉन्च के कुछ महीनों बाद आया है. यह एक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी है, जो मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के तहत रजिस्टर्ड है. हालांकि, यह कोऑपरेटिव जून 2025 में बनाई गई थी, लेकिन कमर्शियल ऑपरेशन इस साल की शुरुआत में शुरू हुए.

फिलहाल यह सेवा एनसीआर क्षेत्र में दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद में चल रही है. इसके अलावा गुजरात में अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में भी सेवा उपलब्ध है. कंपनी का दावा है कि लॉन्च के बाद से उसने बाइक, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी कैटेगरी में 5.5 लाख ड्राइवर रजिस्टर किए हैं.

पहले अधिकारी ने बताया कि लखनऊ और चंडीगढ़ के बाद भारत टैक्सी अगले एक महीने में मुंबई में एंट्री की तैयारी कर रही है. इसके बाद जून के आखिर या जुलाई तक जयपुर में भी सेवा शुरू की जाएगी.

अधिकारी ने कहा, “अगले एक साल में भारत टैक्सी की सेवाएं भारत के सभी बड़े शहरों और कस्बों में उपलब्ध होंगी.”

कंपनी की विस्तार रणनीति एनसीआर मॉडल जैसी दिखाई देती है, जहां यह पब्लिक संस्थानों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करती है. लखनऊ में भारत टैक्सी यात्रियों की सुरक्षा और सेवा को मजबूत करने के लिए ट्रैफिक पुलिस और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है.

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में ऑपरेशन शुरू होने के बाद मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ भी इसी तरह की साझेदारी की योजना बनाई जा रही है.

कंपनी अपने बिजनेस मॉडल के जरिए खुद को बड़े ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स से अलग दिखाने की कोशिश भी कर रही है. भारत टैक्सी जीरो-कमीशन मॉडल पर काम करती है और खुद को ड्राइवर-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म बताती है, जहां कमाई का बड़ा हिस्सा ड्राइवरों यानी “सारथियों” के पास ही रहता है.

शुरुआत में प्लेटफॉर्म ड्राइवरों से कोई शुल्क नहीं लेता था. हालांकि, अब ऑपरेशनल खर्चों को पूरा करने के लिए मामूली सब्सक्रिप्शन आधारित पेमेंट स्ट्रक्चर शुरू किया गया है.

अधिकारी ने कहा, “हम फिलहाल अपने सारथी (ड्राइवर) पार्टनर्स से रोजाना सब्सक्रिप्शन फीस या प्रति राइड मामूली शुल्क ले रहे हैं.”

भारत टैक्सी के अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स के विपरीत यह प्लेटफॉर्म पीक ऑवर्स में यात्रियों से सर्ज प्राइसिंग नहीं लेता. हालांकि, लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति में ट्रैफिक से जुड़ी अतिरिक्त कीमत ली जा सकती है.

अधिकारी ने कहा, “अगर ड्राइवर लंबे समय तक ट्रैफिक में फंसा रहता है, तो उसका खर्च देना पड़ेगा.”

कोऑपरेटिव समर्थित यह सेवा ऐसे बेहद प्रतिस्पर्धी बाज़ार में उतर रही है, जहां पहले से स्थापित प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स का दबदबा है. ये कंपनियां ड्राइवर और यात्रियों को बनाए रखने के लिए भारी इंसेंटिव और डिस्काउंट पर निर्भर रहती हैं.

दूसरे अधिकारी ने कहा, “भारत टैक्सी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट हैं. वे बड़े डिस्काउंट और ड्राइवरों को ज्यादा पेआउट देकर लगातार पैसा खर्च कर रहे हैं, लेकिन यह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है.”

दिप्रिंट ने भारत टैक्सी के प्रतिस्पर्धियों उबर और ओला से ईमेल के जरिए प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं मिला था.

भारत टैक्सी का कहना है कि उसका कोऑपरेटिव ढांचा उसे वेंचर-समर्थित राइड-हेलिंग कंपनियों से अलग बनाता है. इस मॉडल में ड्राइवर खुद कोऑपरेटिव के हिस्सेदार होते हैं, इसलिए मुनाफा और लंबे समय तक टिकाऊ व्यवस्था इसकी रणनीति का मुख्य हिस्सा है.

दूसरे अधिकारी ने कहा, “कोऑपरेटिव मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी को अपने सदस्यों यानी सिर्फ सारथियों के लिए ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना होता है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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