नई दिल्ली: भारतीय सेना के एक डॉक्टर से इन्फ्लुएंसर बने व्यक्ति को बुधवार को दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उद्योगपति संजय कपूर से जुड़े पोस्ट साझा करने के मामले में गिरफ्तार किया. लेकिन बाद में उसी रात दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी, सूत्रों ने जानकारी दी.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पहचान डॉ. नीलम सिंह के रूप में हुई है, जो ‘द स्किन डॉक्टर’ नाम से जाने जाते हैं. संजय कपूर की मौत के बाद कपूर परिवार के खिलाफ पोस्ट साझा करने के कारण वह कानूनी परेशानी में फंस गए. इन पोस्ट में कपूर की मौत की परिस्थितियों और उनकी संपत्ति तथा विरासत विवाद पर सवाल उठाए गए थे.
सूत्रों के अनुसार, कपूर परिवार की ओर से वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 303 (चोरी) और 356(2) (मानहानि) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया.
पुलिस ने पहले बुधवार को सिंह को X पर साझा किए गए पोस्ट के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया था. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
सिंह की ओर से पेश हुए सिद्धार्थ हांडा ने दिप्रिंट को बताया कि दिल्ली की अदालत ने रात 10 बजे तक उन्हें जमानत दे दी. उन्होंने कहा, “उन्हें एक ऐसे दस्तावेज़ की पोस्ट के कारण गिरफ्तार किया गया, जो पहले से अदालत में दाखिल हलफनामे का हिस्सा था. मामला प्रिया कपूर और करिश्मा कपूर के बीच चल रही लड़ाई से जुड़ा है.”
हांडा ने कहा कि दिल्ली पुलिस को अदालत ने फटकार लगाई. उन्होंने कहा, “माननीय जज ने कहा कि इस मामले का कोई कानूनी आधार नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा कि सिंह का नाम प्राथमिकी में नहीं है और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है. सिंह से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और फिर रात करीब 10 बजे जमानत मिल गई. उन्होंने कहा, “जज ने कहा कि इसमें कोई मकसद या अपराध नहीं है और ट्वीट करना अपराध नहीं है. अदालत के दस्तावेज सार्वजनिक रिकॉर्ड होते हैं.”
कपूर परिवार का विवाद
सिंह की अब हटाई जा चुकी एक पोस्ट में उन्होंने एक दस्तावेज साझा किया था और कहा था कि संजय कपूर की 12 जून 2025 को प्राकृतिक मौत हुई थी. “उनकी पत्नी प्रिया सचदेव दावा करती हैं कि उन्होंने अपनी मौत से सिर्फ तीन महीने पहले, उनकी मौजूदगी में एक वसीयत बनाई थी, जिसमें अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी उन्हें दे दी. समय को देखकर ही सवाल उठते हैं कि एक पूरी तरह स्वस्थ अरबपति ने अपनी मौत के इतने करीब ऐसी वसीयत क्यों बनाई?” पोस्ट में यह लिखा था.
सिंह ने सवाल उठाया कि नई जानकारी संदेह को और बढ़ाती है. उन्होंने कहा, “वसीयत कथित तौर पर गुरुग्राम में बनाई गई थी, जबकि कॉल रिकॉर्ड दिखाते हैं कि उसी समय वह दिल्ली में थीं. अगर यह सच है, तो वसीयत की सच्चाई पर सही तरीके से सवाल उठता है.” इस कथित पोस्ट को पेड और फर्जी बताया गया है.
सिंह ने कपूर पर और भी पोस्ट किए थे. 13 मई 2025 को उन्होंने X पर लिखा था कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उद्योगपति संजय कपूर की मौत पोलो खेलते समय गलती से मधुमक्खी निगलने के बाद हार्ट फेल होने से हुई.
उन्होंने लिखा, “यह अजीब लगता है, लेकिन असंभव नहीं है. यह या तो एनाफिलैक्सिस नाम की गंभीर एलर्जी के कारण हो सकता है, जिससे हार्ट फेल हो जाता है, या फिर गले में मधुमक्खी के डंक से सूजन, सांस रुकना, ऑक्सीजन की कमी और बाद में हार्ट फेल होना हो सकता है. अन्य कारणों में कौनिस सिंड्रोम और अत्यधिक वैगल प्रतिक्रिया शामिल हो सकते हैं.” उन्होंने आगे लिखा, “निष्कर्ष यह है कि अगर आप गलती से मधुमक्खी निगल लें, तो तुरंत इमरजेंसी रूम जाएं. ज्यादातर मामलों में आप ठीक रहेंगे, लेकिन दुर्लभ स्थिति के लिए सावधान रहना बेहतर है.”
53 वर्षीय संजय कपूर की लंदन में पोलो खेलते समय हुई अचानक मौत के बाद कई आरोप, लालच के कड़वे आरोप और सोना कॉमस्टार पर नियंत्रण की लड़ाई सामने आई है. यह ऑटोमोबाइल कंपनी उनके दिवंगत पिता ने बनाई थी.
कपूर की मां, पत्नी और उनकी दूसरी पत्नी अभिनेत्री करिश्मा कपूर से हुए बच्चे अब इस संघर्ष में शामिल हैं. निजी फोन बातचीत से आगे बढ़कर यह विरासत की लड़ाई दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गई है, जहां कपूर परिवार की तीन पीढ़ियां लगभग 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के लिए लड़ रही हैं.
‘द स्किन डॉक्टर’
नीलम सिंह, जिन्हें नील भी कहा जाता है और जो ‘द स्किन डॉक्टर’ नाम से जाने जाते हैं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोकप्रिय हैं. X पर उनके लगभग दस लाख फॉलोअर्स हैं.
सिंह की वेबसाइट के अनुसार, वह उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले हैं और उनके पिता भारतीय सेना में थे. उनका जन्म महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई देश के अलग-अलग केंद्रीय विद्यालयों में की, जिनमें ग्वालियर, नासिक, सागर और कठुआ शामिल हैं.
सिंह ने पुणे के आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की है और मेडिसिन में मास्टर डिग्री भी हासिल की है. उन्होंने भारतीय सेना में 10 साल तक सेवा की और मेजर रैंक पर रिटायर हुए.
उनकी बायो में लिखा है, “फेसबुक पर चर्चाएं और पोस्ट धीरे-धीरे राजनीतिक होने लगीं और बाकी लोगों की तरह मैं भी इसमें शामिल हो गया. विज्ञान और इतिहास पहले से ही मेरे मजबूत विषय थे. मैंने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक मुद्दों को देखना, पढ़ना और समझना शुरू किया. धीरे-धीरे मुझे सांस्कृतिक मार्क्सवाद और उसके हम सब पर बड़े प्रभाव का एहसास हुआ.”
इसमें आगे लिखा है, “इसलिए मैंने अपनी राय, टिप्पणियां और तथ्य लिखना शुरू किया, जिन्हें मेरे दोस्तों ने पसंद किया और साझा किया. मेरा उद्देश्य अपनी राय किसी पर थोपना नहीं है क्योंकि मुझे लोगों की सोचने-समझने की क्षमता पर भरोसा है. मेरा मानना है कि लोगों को विश्वसनीय स्रोतों और तर्कपूर्ण व्याख्या के साथ तथ्य दिए जाने चाहिए और उनकी व्याख्या लोगों के निर्णय पर छोड़ देनी चाहिए.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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