नई दिल्ली: “आज IPL मैच है, तुम्हें किसी टीम पर बेट लगानी चाहिए. अगर 500 रुपये लगाओगे तो 2,500 बन जाएंगे. 200 रुपये लगाओगे तो 1,000 बन जाएंगे. इतना आसान है. ज्यादा मत सोचो. क्या मैं तुम्हें बेटिंग आईडी दूं?”
यह मैसेज टेलीग्राम पर अचानक आता है. इसे भेजता है अन्ना*, जो 2010 से ऑनलाइन सट्टा चला रहा है. उसके मौजूदा ग्रुप में 1.2 लाख से ज्यादा सदस्य हैं और हर दिन पांच नए लोग जुड़ते हैं. वह लोगों को एआई से बनी तस्वीरें भेजता है, जिनमें लोग क्रिकेट, रम्मी या कैसीनो से पैसे कमाते दिखते हैं. साथ ही ऐसे फॉरवर्ड मैसेज भी भेजे जाते हैं, जिनमें उसके प्लेटफॉर्म को “सरकार, गूगल, बॉलीवुड स्टार्स और क्रिकेटरों द्वारा वेरिफाइड” बताया जाता है.
इनमें से कुछ भी सच नहीं है, लेकिन यह तरीका और इसके पीछे का पूरा सिस्टम—अब उस इंडस्ट्री का नया चेहरा बनता जा रहा है, जिसे सरकार 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान से जोड़ चुकी है. अन्ना जैसे अनियमित प्लेटफॉर्म कुछ क्लिक में पहुंच जाते हैं, कानून से बच निकलते हैं और लोगों को हारते हुए दांव के चक्कर में फंसा देते हैं, ताकि वे अपना खोया पैसा वापस पाने के लिए बार-बार बेट लगाते रहें.
दिप्रिंट से बात करते हुए अन्ना ने इस पूरे कारोबार की झलक दिखाई. वह हैदराबाद से रात 3 बजे से लेकर रात 11:30 बजे तक काम करता है. वह लोगों को कॉल और मैसेज कर अलग-अलग साइटों पर बेट लगाने के लिए कहता है. उसकी सभी साइटों का एक ही नारा है—“बड़ा खेलो और बड़ा जीतो.”
उसने कहा, “मेरा काम बहुत मुश्किल है. मुझे लोगों को मैच याद दिलाने के लिए कॉल करनी पड़ती है. मेरा काम यह बताना नहीं है कि कौन-सी टीम सबसे अच्छी है. मेरा काम सिर्फ यह बताना है कि किस टीम का कितना मार्जिन है. हमारा प्लेटफॉर्म 24 घंटे में पैसा निकालने की सुविधा देता है, अगर बेट अच्छा चल रहा हो. पैसे निकालने के लिए PAN कार्ड की ज़रूरत नहीं होती.”
कैश-आउट सुविधा के जरिए खिलाड़ी उस समय पैसा निकाल सकता है, जब उसकी पसंदीदा टीम हारने लगती है.
अन्ना ने कहा, “इसी तरह लोग मुनाफा कमाते हैं, या बहुत सारा पैसा गंवा भी सकते हैं, लेकिन अगर पैसा हार भी जाओ तो चिंता मत करो. फिर से बेट लगाकर पैसा वापस पाया जा सकता है. हर कोई जानता है कि मैच का नतीजा तय नहीं होता.”
लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए वह अक्सर यूपीआई ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट शेयर करता है—ज्यादातर पांच अंकों वाली रकम के. ये उन लोगों को दिए गए भुगतान होते हैं जिन्होंने बेट लगाई होती है.
उसने कहा, “स्क्रीनशॉट लोगों को मोटिवेशन देते हैं.”

अन्ना पहले ऑफलाइन सट्टा चलाता था और फोन कॉल पर निर्देश लेता था, लेकिन इंटरनेट की पहुंच, खासकर छोटे शहरों में बढ़ने के बाद, वह टेलीग्राम पर आ गया, जहां अब उसके ज्यादातर ग्राहक मौजूद हैं.
उसने कहा कि क्रिकेट अब भी सबसे ज्यादा कमाई वाला सट्टा फॉर्मेट है. इसके मुकाबले लूडो “कुछ भी नहीं” है—500 रुपये की बेट पर सिर्फ 975 रुपये मिलते हैं.
सरकार इस बढ़ती शिकायतों वाली 100 अरब डॉलर की इंडस्ट्री से चिंतित है, जो खुद को साधारण गेमिंग के रूप में पेश करती है. इसी वजह से केंद्र सरकार इस साल ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन नियम लेकर आई.
अगस्त 2025 में संसद में यह कानून पेश करते हुए केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि करीब 45 करोड़ लोग ऑनलाइन पैसे वाले गेम्स से प्रभावित हुए हैं और यूजर्स 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा चुके हैं. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह नुकसान किस समय अवधि में हुआ.
सरकारी बयान के मुताबिक मार्च 2026 के आखिर तक सरकार ऑनलाइन बेटिंग और जुए से जुड़ी 8,376 वेबसाइट URLs ब्लॉक कर चुकी थी. इस महीने नियम लागू होने के बाद कार्रवाई और तेज़ होने की उम्मीद है.
पूरे भारत में ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग की लत आम लोगों को कर्ज के जाल में धकेल रही है. कई मामलों में यह लत लोगों को चोरी, हिंसा, यहां तक कि परिवार के सदस्यों की हत्या या आत्महत्या तक ले जा रही है.
हाल ही में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली का एक मामला इसकी गंभीरता दिखाता है. 22 साल के राहुल मीणा को पिछले महीने एक आईआरएस अधिकारी की बेटी से रेप और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया. वह उसी घर में काम करता था. पुलिस के मुताबिक राहुल पर 5 से 7 लाख रुपये का कर्ज था, जिसमें बड़ा हिस्सा ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा था. जांचकर्ताओं का कहना है कि वह कर्ज चुकाने के लिए चोरी करने के इरादे से घर में गया था, लेकिन मामला उससे कहीं ज्यादा गंभीर हो गया.
पुलिस ने राहुल को “विकृत मानसिकता” वाला बताया और कहा कि जब 19 साल की लड़की ने चोरी का विरोध किया, तो उसने किसी भारी चीज से हमला कर उसे बेहोश कर दिया. इसके बाद उसने रेप और हत्या की.
पुलिस का आरोप है कि राहुल ने कुछ दिन पहले राजस्थान के अलवर में भी एक महिला के साथ यौन अपराध किया था.
दिल्ली की इस घटना ने दिखाया कि ऑनलाइन बेटिंग का असर सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता.

पहली बेट
चंडीगढ़ का 20 साल का बीकॉम छात्र अमन*, जो चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की तैयारी कर रहा है, 2024 में इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहा था, तभी उसने मशहूर पंजाबी गायक करन औजला और कनाडाई रैपर ड्रेक को स्टेक का प्रचार करते देखा.
अमन ने उस समय सोचा, “अगर मुझे ऑनलाइन बेट लगानी है, तो शायद मैं इस प्लेटफॉर्म पर भरोसा कर सकता हूं.”
2017 में शुरू हुआ ऑस्ट्रेलिया और कुराकाओ से जुड़ा Stake खुद को LinkedIn बायो में दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला बेटिंग प्लेटफॉर्म बताता है, लेकिन इसका तरीका लगभग सभी बेटिंग प्लेटफॉर्म जैसा ही है.
अमन ने कहा, “छोटे ग्रुप मीम पेजों पर विज्ञापन देते हैं. उनके पास लोगो होता है, एक आकर्षक लाइन होती है और लोग फंस जाते हैं. यह लग्जरी लाइफ का सपना बेचता है.”
अकाउंट बनाना आसान था. इसके लिए सिर्फ आधार कार्ड चाहिए था. कोई भी यूजर 500 रुपये की सिक्योरिटी फीस से शुरुआत कर सकता है—या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसा लगा सकता है—और 10 रुपये जैसी छोटी बेट से खेल शुरू कर सकता है.
अमन ने कहा, “ऐप यह सुनिश्चित करता है कि लोग छोटी रकम से शुरुआत करें. यही लोगों को आकर्षित करता है. कई एआई मॉडल और स्पोर्ट्स एनालिस्ट रेट और मल्टीप्लायर तय करते हैं.”
उसने बताया कि ‘रेट’ यानी किसी घटना की संभावना AI मॉडल से तय होती है. मौसम, होम ग्राउंड, खिलाड़ियों की फिटनेस और फॉर्म ये सभी चीज़ें मिलकर तय करती हैं कि मैच कौन जीतेगा.
जब अमन ने पहली बार 300-400 रुपये लगाए, तो वह बढ़कर 2,100 रुपये हो गए. उसका आत्मविश्वास बढ़ गया, लेकिन उसने अपने एक करीबी दोस्त को भी देखा, जिसने 2,000 रुपये से शुरुआत की थी और पिछले आईपीएल सीजन में बेटिंग करते-करते करीब 70,000 रुपये हार गया.
अमन ने बताया, “जब मेरे दोस्त ने पैसा हारना शुरू किया, तो उसका पूरा ध्यान सिर्फ उतनी ही रकम वापस पाने पर था. वह लगातार बेट लगाता रहा, जब तक नुकसान बहुत बड़ा नहीं हो गया.”
ये प्लेटफॉर्म उन लोगों पर भी नज़र रखते हैं जो खेलना बंद करने लगते हैं.
अमन ने कहा, “मैंने करीब 3.5 लाख रुपये लगाए थे. जब मैंने कुछ समय के लिए खेलना बंद किया, तो कस्टमर केयर वाले मुझे बार-बार कॉल करने लगे. उन्होंने पूछा कि क्या मुझे कोई दिक्कत है या मैं किसी टूर्नामेंट का इंतज़ार कर रहा हूं. वे मुझे 500-1,000 रुपये के कूपन कोड, एक्स्ट्रा बोनस और कैशबैक देते रहे…सिर्फ इसलिए कि मैं फिर से बेटिंग शुरू कर दूं. मैं इसमें नहीं फंसा, लेकिन लोग फंस जाते हैं.”
उसने कहा, “इसी तरह बेटिंग की लत लगती है.” उसके मुताबिक यह तब होता है जब खिलाड़ी अपनी भविष्यवाणी पर भरोसा करने लगता है और जुए को कमाई का जरिया मानने लगता है.
सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर भी लोगों को और आकर्षित करते हैं. वे क्षेत्रीय भाषाओं में वीडियो बनाकर बताते हैं कि किस टीम पर बेट लगानी चाहिए.
Stake ने दिप्रिंट के सवालों वाले ईमेल का जवाब नहीं दिया.

जाल
2020 में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पहले औरंगाबाद) के रहने वाले 34 साल के आदेश थोले को king567.in.net वेबसाइट पर ऑनलाइन गेम खेलकर जल्दी पैसा कमाने का ऑफर मिला. शुरुआत में यह उन्हें न तो भरोसेमंद लगा और न ही आकर्षक.
लेकिन कॉल करने वाले लगातार संपर्क करते रहे. आखिरकार उन्होंने मान लिया. वेबसाइट पर करीब 300 गेम अलग-अलग रेट के साथ दिखे. उन्होंने रजिस्ट्रेशन किया और 10,000 रुपये जमा कर खेल शुरू किया.
अगले कुछ महीनों में उनका जोखिम लेने का स्तर बढ़ता गया. पेट्रोल पंप चलाने वाले इस कारोबारी ने बड़ी-बड़ी बेट लगानी शुरू कर दीं.
2021 में थोले ने Baccarat नाम के कार्ड गेम में 4.1 लाख रुपये लगाकर 1.5 लाख रुपये का मुनाफा कमाया. इससे उनका कुल बैलेंस 5.6 लाख रुपये हो गया.
उन्होंने पैसे निकालने की रिक्वेस्ट डाली और पैसा वापस भी मिल गया—5 बार में 1-1 लाख रुपये और एक बार में 1.6 लाख रुपये. उनका भरोसा और बढ़ गया, जब उन्होंने 40,000 रुपये की बेट पर 1.19 लाख रुपये जीते और रकम सीधे अकाउंट में आ गई.
इसके बाद कुछ लोगों ने, जो खुद को गेमिंग कंपनी का डायरेक्टर बताते थे, उन्हें और बड़ी रकम लगाने के लिए प्रेरित किया. इनमें के. सी. वीरेंद्र के भाई और भतीजे—के.सी. थिपेस्वामी और पृथ्वी नागराज शामिल थे. वीरेंद्र कर्नाटक के चित्रदुर्ग से कांग्रेस विधायक हैं.
जैसे-जैसे थोले की जीत बढ़ती गई, वैसे-वैसे प्लेटफॉर्म ने उनके पैसे रोकने शुरू कर दिए. कभी “सर्वर एरर” तो कभी “तकनीकी खराबी” का बहाना बनाया गया.
थोले का कहना है कि कुछ वर्षों में उन्होंने कुल 8.4 करोड़ रुपये की बेट लगाई और आखिरकार दिवालिया हो गए क्योंकि प्लेटफॉर्म ने उनके पैसे निकालने की रिक्वेस्ट रोक दी.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मैंने औरंगाबाद में अपना घर और पेट्रोल पंप दोनों खो दिए. मैं पूरी तरह बर्बाद हो गया हूं. मेरी हालत ऐसी हो गई है कि मेरे पिता हर महीने खर्च के लिए पैसे भेज रहे हैं.”
थोले ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बताया, “जब 2 लाख रुपये तक की छोटी रकम निकालने की रिक्वेस्ट की जाती थी, तो वह मंजूर हो जाती थी, लेकिन बड़ी रकम की रिक्वेस्ट या तो रिजेक्ट हो जाती थी या बैकएंड टीम उसे मंजूर नहीं करती थी. वेबसाइट पर कारण दिखाया जाता था—‘withdrawal cancelled by Admin’, ‘technical error’ या ‘bulk reject’.”
ईडी के. सी. वीरेंद्र के कथित बेटिंग नेटवर्क की जांच कर रही थी.
पिछले साल अगस्त में ईडी ने वीरेंद्र को गिरफ्तार किया था. इस साल जनवरी में बेंगलुरु की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दी. अप्रैल में कर्नाटक की विशेष PMLA अदालत ने एजेंसी की शिकायत पर संज्ञान लिया. मामला अभी चल रहा है.
कटघरे में सितारे
बेटिंग प्लेटफॉर्म अपने विज्ञापन और सेलिब्रिटी प्रचार के लिए पुराने और आजमाए हुए तरीकों पर बहुत भरोसा करते हैं.
1xBet से जुड़े एक मामले में ईडी ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच कई पूर्व क्रिकेटरों—युवराज सिंह, शिखर धवन, सुरेश रैना और रॉबिन उथप्पा—के साथ-साथ कलाकार उर्वशी रौतेला, सोनू सूद, मिमी चक्रवर्ती, अंकुश हाजरा और नेहा शर्मा पर कार्रवाई की.
मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत उनकी 19 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल और अचल संपत्तियां भी अटैच की गईं. एजेंसी ने बड़े सितारों के प्रचार और लोगों को आकर्षित करने के बीच सीधा संबंध बताया.
ईडी के एक अधिकारी ने रैना और धवन की संपत्ति अटैच करने के बाद कहा था, “ये लोग पूर्व भारतीय क्रिकेटर हैं और इनके बहुत ज्यादा फॉलोअर्स हैं, इसलिए इनके प्रचार भारतीय दर्शकों तक आसानी से पहुंचे. 1xBet और उसके दूसरे ब्रांड्स का प्रचार करके इन्होंने भारत में प्लेटफॉर्म की पहचान और भरोसा बढ़ाने में मदद की.”

इंसान बनाम मशीन
नवंबर 2024 में दिनेश कुमार गुरुग्राम के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाया कि WinZO गेमिंग ऐप पर यूजर्स के साथ खेले जाने वाले गेम्स में बॉट्स इस्तेमाल किए जा रहे थे, जिससे उन्हें कुल 42 लाख रुपये का नुकसान हुआ.
कुमार ने अपनी शिकायत में कहा, “इन बॉट्स को आम खिलाड़ियों की तरह दिखाया जाता है. ऐसा लगता है कि छिपे हुए एल्गोरिद्म और गलत मुकाबलों के जरिए लोगों को बार-बार पैसा हराने की कोशिश की जाती है.”
उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्होंने Ludo और Snakes & Ladders जैसे गेम्स में पैसा गंवाया, क्योंकि उन्हें लगा कि वे असली लोगों के खिलाफ खेल रहे हैं. बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें जानबूझकर बॉट्स के खिलाफ हराने के लिए सेट किया गया था.
बाद में ईडी ने भी इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया. एजेंसी ने अदालत से कहा कि WinZO के प्रमोटरों ने यूजर्स के खिलाफ रियल टाइम गेम्स में Past Performance of Player (PPP) नाम का एल्गोरिद्म इस्तेमाल किया.
एजेंसी के मुताबिक यह एल्गोरिद्म पुराने यूजर्स के डेटा और प्रोफाइल के आधार पर बनाया गया था और यूजर्स को बताए बिना गेम्स को ऑटोमेट किया गया. लोगों को यह नहीं बताया गया कि उनके सामने असली खिलाड़ी नहीं, बल्कि खास तरीके से तैयार किए गए लर्निंग टूल्स थे.
एजेंसी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि धोखाधड़ी सिर्फ गेम्स में हेरफेर तक सीमित नहीं थी. अगर कोई यूजर जीत भी जाए, तो पैसा निकालने के रास्ते में रोक, इनकार और कई बार पूरा ब्लॉक लगा दिया जाता था.
WinZO ने बाद में अपना कामकाज बंद कर दिया.
स्किन्स, क्रिप्टो और VPN का रास्ता
हैदराबाद में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में काम करने वाले 29 साल के रोहित* पिछले 10 साल से गेमिंग कर रहे हैं. जब वह 20 साल के थे और कॉलेज में पढ़ते थे, तब उन्होंने दोस्तों के साथ Counter-Strike: Global Offensive और Dota 2 खेलना शुरू किया.
धीरे-धीरे यह गेमिंग की आदत गेम के “स्किन्स” पर बेटिंग तक पहुंच गई.
रोहित कहते हैं कि पहली जीत का एहसास “बहुत जबरदस्त” था.
स्किन्स ऐसी चीज़ें होती हैं जिन्हें खिलाड़ी गेम के अंदर खरीद या जीत सकते हैं, ताकि उनके किरदार का लुक बदल जाए. यह खास कपड़े, अलग किरदार या विशेष ताकत वाले कैरेक्टर हो सकते हैं. वीडियो गेम्स में स्किन्स अलग-अलग कीमत पर खरीदी जा सकती हैं, या गेम कुछ उपलब्धियां पूरी करने पर इन्हें इनाम में देता है.
स्किन्स पर जुआ अक्सर थर्ड पार्टी वेबसाइट्स पर खेला जाता है. यूजर अपनी स्किन दांव पर लगाता है. जीतने पर वह अपनी स्किन बचा लेता है और सामने वाले की स्किन भी जीत जाता है. हारने पर उल्टा हो जाता है.
स्किन जुए का एक और तरीका है दूसरे खिलाड़ियों के मैच या लाइवस्ट्रीम गेम्स पर बेट लगाना.
रोहित ने बताया कि उस समय उन्हें हर महीने 1,500 रुपये पॉकेट मनी मिलती थी.
उन्होंने कहा, “मैं 100-200 रुपये की स्किन खरीदता था और बेट लगाता था. अगर कुछ जीत जाता या 1,000 रुपये की स्किन मिल जाती, तो बहुत अच्छा लगता था. हम दोस्त आपस में यह भी तुलना करते थे कि किसके पास ज्यादा स्किन्स हैं.”
जब उन्हें 28,000 रुपये महीने वाली इंटर्नशिप मिली, तो दांव भी बड़े हो गए.
उन्होंने कहा, “उन सालों में मेरी एक ही बेट से लाखों रुपये की कमाई हुई. यह बहुत गहरा दलदल है.”
अगर गेम्स पर नहीं, तो रोहित NBA (National Basketball Association), NHL (National Hockey League), MLB (Major League Baseball), EPL (English Premier League) और La Liga जैसी अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं पर बेट लगाते थे.
जब ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म Steam ने स्किन्स की ट्रेडिंग पर रोक लगा दी, तो रोहित और उनके दोस्त क्रिप्टोकरेंसी की तरफ चले गए.
उन्होंने कहा, “हम यूपीआई से किसी व्यक्ति को पैसा भेजते थे और वह हमारे वॉलेट में क्रिप्टोकरेंसी भेज देता था. फिर हम उसी क्रिप्टो पैसे को डॉलर में इस्तेमाल करके वेबसाइट्स पर बेट लगाते थे.”
रोहित ने कहा कि उन्हें ऑनलाइन बेटिंग में लाना बहुत आसान था. हर कोई बड़े मुनाफे का वादा करता है, हालांकि इस इंडस्ट्री में संभलकर चलना पड़ता है.
उन्होंने बताया, “भारत में ऐप्स बैन होने के बाद कुछ प्लेटफॉर्म गैरकानूनी तरीके से चलने लगे. जैसे Roobet (ऑनलाइन कैसीनो) मोबाइल नेटवर्क पर ब्लॉक था, लेकिन लोग वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) इस्तेमाल करके दूसरे देशों के सर्वर से लॉग इन करते थे. अब क्रिप्टो कैसीनो भी इसे रोकने के लिए शुरुआती केवाईसी करने लगे हैं, ताकि हर ग्राहक की प्रोफाइल जांच सकें.”
रोहित के मामले में, बेंगलुरु से हैदराबाद शिफ्ट होने के बाद उनका दूसरा अकाउंट पैसे निकालने से रोक दिया गया.
उन्होंने कहा, “मुझे सही वजह नहीं पता, लेकिन शायद वे आईपी लोकेशन ट्रैक कर लेते हैं. अगर लोकेशन बदलती दिखती है, तो अकाउंट ब्लॉक कर देते हैं और वेरिफिकेशन मांगते हैं.”
रोहित ने बताया कि अब उन्होंने बेटिंग छोड़ दी है.
नए नियम क्या करते हैं
ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन और रेगुलेशन एक्ट, 2025 ने ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेम्स को औपचारिक मान्यता दी, लेकिन सभी तरह के ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया. इसके तहत एक केंद्रीय गेमिंग अथॉरिटी बनाई गई, जो अनुमति प्राप्त गेम्स का रजिस्ट्रेशन करेगी और प्रतिबंध लागू करवाएगी.
22 अप्रैल को प्रेस ब्रीफिंग में MeitY (केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) के सचिव एस. कृष्णन ने कहा था, “मनी गेम्स पर बैन है.”
MeitY और एमएचए मिलकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं. गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) इस पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है कि कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में स्किल-बेस्ड और नॉन-स्किल ऑनलाइन गेम्स, उनकी कमाई का तरीका, निवेशकों को कैसे ठगा जाता है और पैसे की धुलाई कैसे होती है—इन सभी बातों को देखा जाएगा.
लोकप्रिय प्लेटफॉर्म Dream11 के प्रवक्ता ने दिप्रिंट को बताया कि कंपनी ने नियमों का पालन करते हुए “सभी पेड फैंटेसी स्पोर्ट्स कॉन्टेस्ट बंद कर दिए हैं.”
नए नियमों के तहत बैंकों को भी किसी गेम का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जांचना होगा, तभी वे उससे जुड़े लेन-देन की अनुमति देंगे. अगर गेमिंग अथॉरिटी किसी ऑनलाइन मनी गेम के खिलाफ निर्देश जारी करती है, तो बैंकों को तुरंत उससे जुड़े ट्रांजैक्शन रोकने होंगे और मांगी गई जानकारी अथॉरिटी को देनी होगी.
सरकारी सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि केंद्र सरकार इस इंडस्ट्री की गहराई से जांच कर रही है, क्योंकि इस पर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, कई मंत्रालय, विभाग और एजेंसियां मिलकर इस इंडस्ट्री की बढ़त और उसके राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, ताकि नए नियम सुझाए जा सकें.
एक सूत्र ने कहा कि मकसद ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के दायरे में लाना है, ताकि उन पर ज्यादा सख्त निगरानी और वित्तीय जांच हो सके. साथ ही उन ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स की अनियंत्रित बढ़ोतरी को रोका जा सके, जिनकी पहले से यूजर्स को ठगने के मामलों में जांच चल रही है.
अभी ईडी मनी लॉन्ड्रिंग का केस सिर्फ पुलिस एफआईआर के आधार पर ही दर्ज कर सकती है. लेकिन नए नियम आने के बाद सरकार ऐसी कंपनियों को सीधे रेगुलेटरी ढांचे में ला सकती है.
एक पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की, ने दिप्रिंट से कहा कि ऑनलाइन गेमिंग पर पूरी तरह बैन लगाना उल्टा असर डाल सकता है.
उन्होंने कहा, “पूरी तरह बैन लगाना शायद सही तरीका नहीं है. नियम लागू करने की ज़रूरत है. टैक्स लगाइए. कमाई की सीमा तय कीजिए. लोगों को जागरूक कीजिए. जैसे ही बैन लगता है, लोग और ज्यादा गैरकानूनी रास्तों से बेटिंग करने लगते हैं.”
उन्होंने कहा, “हम सभी जानते हैं कि वायदा और विकल्प ट्रेडिंग भी ऑनलाइन बेटिंग जैसी ही है, लेकिन सरकार उसे रेगुलेट करती है. लोगों को उसके असर के बारे में बताया जाता है. कंपनियों ने ज्यादातर गेम्स बंद कर दिए हैं, लेकिन गैरकानूनी और विदेशी प्लेटफॉर्म अब भी चल रहे हैं.”
एक्सपर्ट ने कहा कि लोग हर चीज पर बेट लगाते हैं—पेट्रोल, चुनाव और ऑफलाइन सट्टेबाजी तक. ज़रूरत सिर्फ सीमा तय करने की है.
उन्होंने कहा, “लोगों को अपनी आय से ज्यादा बेट नहीं लगानी चाहिए.”
*लोगों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए नाम बदले गए हैं. उन्होंने दिप्रिंट से गुमनाम रहने की शर्त पर बात की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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