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Monday, 11 May, 2026
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मोदी की ‘बचत’ सलाह पर विपक्ष हमलावर, कांग्रेस ने संसद सत्र बुलाने की मांग की

बीजेपी के अमित मालवीय ने PM की बातों का बचाव करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है.

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक बचत को लेकर की गई सात सूत्रीय अपील पर विपक्षी दलों ने हमला बोला. कांग्रेस ने राज्य चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद दिए गए पीएम के बयान पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की.

कांग्रेस के राहुल गांधी उन विपक्षी नेताओं में शामिल थे जिन्होंने रविवार को दिए गए पीएम के संबोधन की आलोचना की. इस संबोधन में मोदी ने लोगों से ईंधन बचाने, गैर-ज़रूरी विदेशी यात्राएं कम करने, जहां संभव हो वहां फिर से वर्क फ्रॉम होम अपनाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट व कारपूलिंग का इस्तेमाल करने की अपील की थी.

वैश्विक अस्थिरता के बीच आत्मनिर्भरता और तैयारी पर जोर देते हुए पीएम ने आयात पर निर्भरता कम करने और कोविड के समय की आदतों को फिर अपनाने की बात भी कही. उन्होंने गैर-ज़रूरी सोने की खरीद से बचने, इलेक्ट्रिक वाहनों और रेल आधारित माल ढुलाई को बढ़ावा देने, खाने के तेल की खपत कम करने और रासायनिक खादों का कम इस्तेमाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय “चुनौतीपूर्ण दौर” से गुज़र रही है.

राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि PM की अपील “उपदेश” नहीं बल्कि “नाकामी के सबूत” हैं.

उन्होंने लिखा, “12 साल में उन्होंने देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है कि अब जनता को बताया जा रहा है क्या खरीदना है, क्या नहीं खरीदना है, कहां जाना है, कहां नहीं जाना है. हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है ताकि खुद जवाबदेही से बचा जा सके.”

गांधी ने मोदी को “समझौता कर चुके पीएम” भी कहा.

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने पीएम की बातों के पीछे की “असली स्थिति” बताने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की.

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सागरिका घोष ने बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.

उन्होंने PM के “लक्जरी डिप्लोमेसी टूर” और चुनाव प्रचार व वीआईपी मूवमेंट में खर्च हो रहे ईंधन का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ लोगों से बचत करने को कहा जा रहा है. उन्होंने एक्स पर लिखा, “जनता के लिए मितव्ययिता…राजा मस्त, जनता त्रस्त.”

कांग्रेस ने हमला और तेज़ करते हुए पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट कर आरोप लगाया कि PM ने “एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी से बचने” की कोशिश की है और समय रहते कदम उठाने की बजाय आर्थिक बोझ जनता पर डाल दिया है.

पार्टी ने इस स्थिति को “मोदी द्वारा बनाई गई आपदा” बताया. कांग्रेस ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक असर के लिए सरकार ने तैयारी नहीं की और वह चुनाव और राजनीतिक प्रचार में व्यस्त रही. पार्टी ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी ने पहले ही सरकार को इस स्थिति को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

अमित मालवीय ने प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए कहा कि यह अपील वैश्विक अस्थिरता, सप्लाई चेन में रुकावट और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की वजह से बढ़ते महंगाई दबाव के बीच भारत की आर्थिक मजबूती बढ़ाने के लिए की गई थी.

सोमवार को एक्स पर किए गए विस्तृत पोस्ट में मालवीय ने कहा कि मोदी का संदेश इस बात पर जोर देता है कि देश की आर्थिक ताकत सिर्फ सरकार नहीं बल्कि नागरिकों की भी “साझा जिम्मेदारी” है. उन्होंने ईंधन की खपत कम करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने, गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं और सोने की खरीद से बचने और घरेलू उत्पादों व पर्यटन को प्राथमिकता देने की PM की अपील का समर्थन किया.

कनिका पसरिचा ने PM के संदेश को आर्थिक नजरिए से समझाया.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “हम तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था हैं, इसलिए अगर कच्चे तेल की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती है तो यह भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है. कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी हमारे सालाना डॉलर खर्च को काफी बढ़ा देती है, चालू खाते के घाटे को बढ़ाती है और रुपये व महंगाई पर दबाव डालती है.”

उन्होंने कहा, “इसके साथ ही सोने का आयात बढ़ना और विदेश यात्राओं पर ज्यादा खर्च भी डॉलर के बाहर जाने को बढ़ा रहा है. PM का संदेश मूल रूप से डॉलर की मांग को नियंत्रित करने के बारे में है, ताकि तेल की खपत, सोने की खरीद और विदेशी यात्राओं को कम किया जा सके, खासकर ऐसे समय में जब पूंजी निवेश कमजोर है और पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है.”

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक चलने वाली भू-राजनीतिक अस्थिरता के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाती है. पश्चिम एशिया युद्ध का असर पहले ही विमानन, होटल, सिरेमिक, उर्वरक और ज्वेलरी सेक्टर पर बढ़ती ऊर्जा लागत और शिपिंग रूट्स में बाधा के रूप में दिखने लगा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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