नई दिल्ली: उत्तर भारत में बदनाम प्रदूषण के मौसम से पहले, दिल्ली और आसपास के इलाकों की करीब 98 प्रतिशत इंडस्ट्री अब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के उत्सर्जन मानकों का पालन कर रही हैं. इसमें वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCDs) लगाना या पुराने उपकरणों को बेहतर बनाना भी शामिल है.
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के वरिष्ठ अधिकारियों ने 28 सितंबर को बताया कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास काम कर रही 2,350 इंडस्ट्री में से 2,297 अब उत्सर्जन मानकों का पालन कर रही हैं. बाकी 57 इंडस्ट्री को जरूरी APCDs लगाने तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है.
एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, “करीब 98 प्रतिशत इंडस्ट्री अब उत्सर्जन मानकों का पालन कर रही हैं. यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि सर्दियों में प्रदूषण का एक बड़ा स्रोत औद्योगिक प्रदूषण होता है.”
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को आने वाले प्रदूषण सीजन के लिए एक कार्ययोजना पर चर्चा की. अधिकारियों ने बताया कि बैठक में ऐसे कदमों पर ध्यान दिया गया जिनसे प्रदूषण का स्तर नियंत्रण में रहे. इसमें उन स्रोतों पर खास ध्यान दिया गया जो आमतौर पर सर्दियों के महीनों में सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ाते हैं.
मानसून की वापसी के साथ दिल्ली-एनसीआर अब उस मौसम में प्रवेश कर रहा है, जब पंजाब और हरियाणा जैसे आसपास के कृषि प्रधान राज्यों से आने वाला प्रदूषण और दिल्ली के अपने प्रदूषण स्रोत मिलकर राजधानी की हवा को खतरनाक स्तर तक पहुंचा देते हैं.
पिछले साल 1 अक्टूबर से 31 जनवरी के बीच दिल्ली में 11 दिन ऐसे रहे जब प्रदूषण बहुत गंभीर स्तर पर था और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार चला गया था. इस दौरान 68 दिन ‘बहुत खराब’ श्रेणी के भी रहे.
कंस्ट्रक्शन पर रोक और दूसरे कदमों की तैयारी
यह सुनिश्चित करने के लिए कि दिल्ली के अंदर के प्रदूषण स्रोत इस मौसम में समस्या न बढ़ाएं, सरकार इस साल प्रदूषण के सबसे ज्यादा स्तर वाले समय में पहले से तय निर्माण प्रतिबंध लगाएगी.
1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक रहेगी. इसमें खुले में होने वाला सिविल निर्माण कार्य भी शामिल है.
10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच पूरी तरह रोक रहेगी. इस दौरान तापमान गिरता है और हवा की स्थिति प्रदूषण को फैलने नहीं देती.
एजेंसियां दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड वाहनों पर लगी पाबंदियों को भी सख्ती से लागू करेंगी. इसके साथ ही निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रदूषण के सबसे ज्यादा स्तर वाले दिनों में पार्किंग शुल्क भी बढ़ाया जाएगा.
सरकारी और निजी दफ्तरों को भी इन महीनों में कर्मचारियों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इसके लिए कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जा सकती है.
दिल्ली ‘प्रदूषण के मौसम’ के लिए तैयार
पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस सीजन में प्रदूषण से निपटने की योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है. इसमें लंबे समय के उपाय शामिल हैं, जैसे ज्यादा पेड़ लगाना और धूल कम करने के लिए सड़कें बनाना, जो पूरे साल जारी रहेंगे.
दूसरे हिस्से में तुरंत किए जाने वाले कदम शामिल हैं, जैसे निर्माण पर रोक लगाना और खुले में कचरा या दूसरी चीजें जलाने के खिलाफ कार्रवाई बढ़ाना.
सोमवार की बैठक में शामिल दिल्ली सरकार के अधिकारियों ने बताया कि एजेंसियां सक्रिय ‘जन भागीदारी’ पर ध्यान देंगी.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “रणनीति में वाहनों से होने वाले प्रदूषण, सड़क और निर्माण से उठने वाली धूल, कचरे और बायोमास को जलाने, औद्योगिक प्रदूषण, सार्वजनिक परिवहन, हरियाली और प्रदूषण व ट्रैफिक वाले हॉटस्पॉट पर कार्रवाई बढ़ाई जाएगी. नागरिकों, RWA, बाजार संगठनों, इंडस्ट्री और जनप्रतिनिधियों को इस अभियान में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा.”
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