scorecardresearch
Wednesday, 28 October, 2026
होमदेशसाइबर अपराध ‘डिजिटल डकैती’ के समान, उच्चतम न्यायालय ने मामलों को एक साथ जोड़ने से इनकार किया

साइबर अपराध ‘डिजिटल डकैती’ के समान, उच्चतम न्यायालय ने मामलों को एक साथ जोड़ने से इनकार किया

Text Size:

नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने साइबर अपराध को ‘‘डिजिटल डकैती’’ करार देते हुए दो व्यक्तियों के खिलाफ 12 राज्यों में लंबित 30 से अधिक आपराधिक मामले एक साथ जोड़ने से बुधवार को इनकार कर दिया।

इन दोनों व्यक्तियों पर अपनी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल विभिन्न अपराधों से हासिल रकम के लेन-देन के लिए करने देने का आरोप है।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा, ‘‘डिजिटल अरेस्ट और इस तरह के साइबर अपराध डिजिटल डकैती हैं… ऐसे लोगों को न्यायिक मंच उपलब्ध कराने का सवाल ही नहीं उठता।’’

प्रधान न्यायाधीश ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले संगठित साइबर अपराध गिरोहों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इनमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘केरलम के एर्नाकुलम में 81 वर्षीय एक व्यक्ति से 1.90 करोड़ रुपये की ठगी की गई और उसकी रकम आपके ‘म्यूल’ खाते (ठगी की रकम के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खाते) में जमा की गई।’’

पीठ ने गौरब कुमार साहा और निधि भंडारी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘आपने अपनी कंपनी के खाते का इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों के लिए करने का फैसला किया।’’

पीठ ने आरोपियों को विभिन्न राज्यों में जारी जांच में इस तरह की कानूनी कार्यवाही के जरिए बाधा डालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति बागची ने सवाल किया कि मामलों को एक साथ जोड़ने का अनुरोध करने वाले आरोपी की सुविधा के लिए पीड़ितों को दिल्ली आने के लिए क्यों मजबूर किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, ‘‘अपनी सुविधा के अनुसार मामलों को किसी स्थान पर स्थानांतरित कराने का आपका अधिकार पीड़ितों और जांच एजेंसी के अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकता… अगर दिल्ली पुलिस जांच की सुविधा के लिए ऐसा कहती है तो हम इस पर विचार कर सकते हैं लेकिन हम आपके अनुरोध के आधार पर देशभर में जारी जांच को कमजोर नहीं होने देंगे।’’

प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया कि अगर किसी पीड़ित से ठगी गई रकम हांगकांग और बैंकॉक में जमा की गई हो तो क्या उसे न्याय पाने के लिए वहां जाने को कहा जा सकता है। याचिकाकर्ताओं ने अंततः अपनी याचिका वापस ले ली।

आरोपियों के खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, केरलम, तेलंगाना और गुजरात समेत विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधों से जुड़े 35 आपराधिक मामले लंबित हैं।

भाषा सिम्मी वैभव

वैभव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments