नई दिल्ली: दिप्रिंट को जानकारी मिली है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले में एक मिनी-एटीएम और मनी-ट्रांसफर काउंटर से किए गए चार ऐसे लेनदेन का पता लगाया है, जिनका इस्तेमाल पश्चिम बंगाल जैसे दूर के इलाकों से जरूरी और रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान खरीदने जैसे असामान्य कामों के लिए किया गया. चुराचांदपुर सीमा पार होने वाले ड्रग्स के कारोबार का एक अहम केंद्र है.
मैदा, खाने का तेल और आटा जैसे सामान के लिए किए गए इन लेनदेन के कुछ दिनों बाद, जिनकी कुल रकम 30 लाख रुपये से ज्यादा थी, सामान पाने वालों ने कथित तौर पर इन सामानों को मिजोरम की राजधानी आइजोल भेज दिया. इसके लिए उन्होंने चूड़ाचांदपुर स्थित ‘गो अल्फा ट्रिप’ नाम के मनी-ट्रांसफर काउंटर के नाम पर बिल जारी किए.
इसके अलावा, एजेंसी ने आइजोल के लोगों के नाम पर मौजूद बैंक अकाउंट में जमा ड्रग्स के पैसे का भी पता लगाया. यह पैसा आगे चार तरह के लोगों या कारोबारियों को भेजा गया—पेट्रोल पंप, किराना दुकान, जूते और कपड़े के व्यापारी, दवा के थोक विक्रेता और मनी एक्सचेंजर. मिजोरम के दो ऐसे पेट्रोल पंपों ने कथित तौर पर एजेंसी के सामने माना कि उन्हें 2.21 करोड़ रुपये और 40.25 लाख रुपये का भुगतान मिला था. उन्होंने अज्ञात ड्राइवरों को डीजल बेचा और दावा किया कि उन्हें पता था कि यह ईंधन म्यांमार में दोबारा बेचा जा रहा था.
इन जांच के नतीजों के आधार पर एजेंसी के अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला है कि मणिपुर और मिजोरम के सीमावर्ती राज्यों के जरिए भारत और म्यांमार के बीच चल रहे अवैध सीमा पार कारोबार में कथित तौर पर एक ‘बार्टर सिस्टम’ था. इसमें म्यांमार के सप्लायरों को सीधे पैसे देने के बजाय जरूरी सामान के रूप में भुगतान किया जाता था, जिससे कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए इसका पता लगाना आसान नहीं था. इसके बाद इन सामानों को कथित तौर पर म्यांमार में बेच दिया जाता था और उससे मिले पैसे का इस्तेमाल सप्लायरों का भुगतान करने के लिए किया जाता था.
ड्रग्स के इन बार्टर आधारित कारोबार के अलावा करीब 175 करोड़ रुपये का पैसा भी ड्रग्स बेचकर जुटाया गया था. यह पैसा मणिपुर और मिजोरम के म्यूल अकाउंट के जरिए म्यांमार भेजा गया और बाद में सीमा वाले जिले में मनी एक्सचेंजर के जरिए ट्रांसफर किया गया.
एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया, “प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों, गो अल्फा ट्रिप के लेजर, चूड़ाचांदपुर के मिनी-एटीएम/कस्टमर सर्विस प्वाइंट काउंटर, बैंक रिकॉर्ड और अकाउंट धारकों की ओर से दिए गए दस्तावेजों से पता चला है कि ड्रग्स का पैसा सिर्फ मिजोरम के हवाला अकाउंट में ही नहीं भेजा जाता, बल्कि इसे आम और बाजार में आसानी से बिकने वाले सामान में भी बदल दिया जाता है—पेट्रोल और डीजल, गेहूं का आटा, खाने का तेल, किराने का सामान, दवाइयां, जूते और कपड़े. इन सामानों को आइजोल और मिजोरम के सीमा वाले शहरों में भेजा जाता है और वहां से आगे म्यांमार भेज दिया जाता है.”
“इस तरह सीमा पार ड्रग्स सप्लायरों को सामान के रूप में भुगतान किया जाता है और ड्रग्स की रकम का हिसाब बिना किसी पैसे के सीमा पार किए ही बराबर कर दिया जाता है.”
ये जानकारी देशभर में ईडी की ओर से की गई बड़ी छापेमारी के बाद सामने आई है. ईडी ने पिछले हफ्ते नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और मिजोरम पुलिस के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत ये कार्रवाई की थी. छापेमारी के दौरान 1,400 से ज्यादा बैंक अकाउंट फ्रीज किए गए, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं और 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. तीनों एजेंसियों ने देशभर में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया.
चूड़ाचांदपुर स्थित गो अल्फा ट्रिप काउंटर से हुए संदिग्ध लेनदेन के बारे में बताते हुए एक अधिकारी ने कहा कि 14 दिसंबर 2024 को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी की एक आटा मिल के बैंक अकाउंट में 13.19 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इसके ठीक चार दिन बाद आटा मिल ने गो अल्फा ट्रिप के नाम पर 32,535 किलो आटे का बिल बनाया. यह सामान 27 दिसंबर को आइजोल भेजा गया.
इसी तरह, इस साल 27 अप्रैल को काउंटर ने गुवाहाटी के एक खाने के तेल के व्यापारी को 5-5 लाख रुपये के दो भुगतान किए. अगले ही दिन व्यापारी ने 10 लाख रुपये की कीमत वाले रिफाइंड सोयाबीन तेल के 631 कार्टन के लिए बिल और ई-वे बिल बनाया.
ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, यह सामान करीब 400 किलोमीटर दूर मिजोरम के चम्फाई जिले की एक दुकान में भेजा गया. इससे शक पैदा हुआ कि ये लेनदेन असली नहीं थे. इसी कैश काउंटर ने मिजोरम के त्लाबुंग में एक पेट्रोल पंप को 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए. पेट्रोल पंप ने आइजोल के एक व्यापारी के नाम पर 14 किलोलीटर डीजल का बिल बनाया. इसके बाद यह डीजल भारत-म्यांमार सीमा पर लॉन्गतलाई जिले के जोरिनपुई में पहुंचाया गया. पेट्रोल पंप के मालिक ने कहा है कि जिस काउंटर ने उसे पैसे दिए, उसके साथ उसका कोई लेनदेन नहीं था.
इन लेनदेन के अलावा, ईडी ने इस साल मार्च में एक और संदिग्ध लेनदेन को भी चिन्हित किया. इसमें उसी मनी ट्रेडर ने कथित तौर पर नई दिल्ली के एक कपड़ा व्यापारी को कपड़े खरीदने के लिए 85,983 रुपये दिए थे. जांचकर्ताओं का दावा है कि ये कपड़े म्यांमार भेजे गए थे.
ईडी को मिजोरम में भी इसी तरह का पैटर्न मिला. यहां दो पेट्रोल पंपों को तीन भुगतान करने वालों—एच. खावलियांथांगी, के एंड एच स्टोर और नुमामी—के अकाउंट से 2.21 करोड़ रुपये और 40.25 लाख रुपये मिले. यह भुगतान अज्ञात ड्राइवरों और एक ‘चुंगा’ को बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल बेचने के बदले किया गया था.
हालांकि, एजेंसी के अधिकारियों ने दावा किया कि पेट्रोल पंप के मैनेजरों ने कहा कि उन्हें भुगतान करने वाले व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. उन्हें सिर्फ इतना पता था कि ईंधन को दोबारा बेचने के लिए म्यांमार ले जाया जा रहा था.
इसी तरह, एक किराना दुकान को कथित तौर पर 13.96 करोड़ रुपये मिले. यह भुगतान म्यांमार में रहने वाले लोगों को बड़ी मात्रा में बिस्कुट, नूडल्स, खाने का तेल, दूध और कोल्ड ड्रिंक बेचने के लिए किया गया था. इसके लिए सियाहा और चम्फाई के मनी एक्सचेंजर के जरिए भुगतान की व्यवस्था की गई थी, ताकि दुकान के अकाउंट में पैसा सामान खरीदने वालों के बजाय दूसरे लोगों के अकाउंट से पहुंचे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश: म्यूल अकाउंट-क्रिप्टो-हवाला के जरिए 3.93 करोड़ रुपये कैसे ‘घूमे’