नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में भूपेंद्र जाज ने अपनी पूरी ज़िंदगी कैब चलाते हुए गुज़ारी. वह लंबे समय तक काम कर रहे थे, ताकि उनका बेटा अर्पित दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने और चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का अपना सपना पूरा कर सके.
अर्पित ने भी स्कूल में खूब मेहनत की थी, CUET परीक्षा में अच्छे नंबर हासिल किए थे और दिल्ली यूनिवर्सिटी के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज में एडमिशन लिया था. 20 साल के अर्पित के लिए दिल्ली आना खास था. साउथ कैंपस के आसपास रहने वाले हज़ारों स्टूडेंट्स की तरह बी.कॉम सेकंड ईयर स्टूडेंट अर्पित ने भी सत्या निकेतन की तंग, अंधेरी और संकरी गलियों में एक PG में कमरा लिया था. इन गलियों में मुश्किल से धूप आती है और यहां आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए फायर सेफ्टी एग्जिट भी नहीं हैं.
लेकिन अर्पित का सपना रविवार दोपहर उस समय अधूरा रह गया, जब कई मंजिला PG की इमारत अचानक गिर गई. इसमें कई लोग, जिनमें स्टूडेंट्स भी शामिल थे, मलबे के नीचे दब गए. अर्पित उन सात लोगों में से एक थे, जिनकी मौत हुई.
इमारत गिरने के एक दिन बाद, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया.
AIIMS के अनुसार, कुल सात मरने वालों में पांच स्टूडेंट्स शामिल हैं. इनमें मध्य प्रदेश के देवास के अर्पित जाज, उत्तर प्रदेश के चंदौली के अभिषेक कुमार, छत्तीसगढ़ के दुर्ग के युवराज सोनी, उत्तर प्रदेश के औरैया के पवन कुमार और मध्य प्रदेश के कटनी के अक्षत सिंह शामिल हैं. इस घटना में दो मजदूरों, परम लाल कोरी और सुरिंदर सिंह की भी मौत हुई. दिप्रिंट आपको यहां इमारत के मलबे में दब कर मारे गए पांचों स्टूडेंट्स की कहानी बता रहा है.
‘मैंने अपने बेटे की आंख दान कर दी’
इमारत गिरने से कुछ घंटे पहले अर्पित ने देवास में घर पर अपनी मां को वीडियो कॉल किया था. यह रोज की तरह सामान्य बातचीत थी. परिवार को अंदाज़ा भी नहीं था कि करीब डेढ़ घंटे बाद ऐसी दुखद घटना होने वाली है.
भूपेंद्र ने दिप्रिंट को बताया, “अर्पित पूरी तरह अपने भविष्य पर ध्यान दे रहा था. उसने अपने कॉलेज की पढ़ाई के साथ CA फाउंडेशन परीक्षा का पहला राउंड भी पास कर लिया था. हमने उसे दिल्ली भेजने के लिए बहुत मेहनत की. मैं कैब चलाता हूं. उसकी मां घर चलाने और अर्पित और उसकी बहन की पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद करने के लिए छोटी सी कॉस्मेटिक की दुकान चलाती थी.”
अब जाज की सिर्फ एक मांग है कि सरकार इन पुराने और असुरक्षित हॉस्टल और PG को तुरंत बंद करे. “ये मौत के जाल हैं.”
जाज ने कहा, “AIIMS के डॉक्टरों ने हमें बताया कि मेरे बेटे की एक आंख खराब हो गई है, लेकिन दूसरी आंख दान की जा सकती है. मुझे लगा कि यह सही होगा. हमने उसकी कॉर्निया दान करने का फैसला किया. मैंने सोचा कि इससे शायद किसी और को दुनिया देखने में मदद मिले.”
उन्होंने कहा, “उसे उस हालत में देखना बहुत दर्दनाक था, लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक दिन मैं उस व्यक्ति से मिल पाऊंगा, जिसे उसकी कॉर्निया मिली है.”
‘काश उसने मुझे पहले बताया होता’
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में संतोष सिंह एक सवाल से परेशान हैं.
उनका बेटा अभिषेक कुमार, मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बी.कॉम स्टूडेंट था. वह सत्या निकेतन के ‘Daze’ PG हॉस्टल में रहता था और हर महीने 15,000 रुपये किराया देता था. परिवार को पता ही नहीं था कि इमारत असुरक्षित थी.
संतोष ने वाराणसी से दिप्रिंट को बताया, “अभिषेक ने हमें कभी नहीं बताया कि इमारत इतनी खराब हालत में है.” उनके परिवार वाले उनका अंतिम संस्कार कर रहे थे. “काश उसने हमें पहले बता दिया होता, तो शायद हम उसे किसी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर देते. जब हम वहां गए थे, तो हम सोच भी नहीं सकते थे कि ऐसी घटना हो सकती है.”
इमारत के बेसमेंट में निर्माण का काम चल रहा था. इस बात से परिवार गुस्से में है.
संतोष ने पूछा, “जब स्टूडेंट वहां रह रहे थे, तब निर्माण का काम क्यों करने दिया गया? पहले PG को खाली कराना चाहिए था. बच्चों को इतनी खतरनाक जगह पर रखना गलत था.”
संतोष को रविवार शाम करीब 5:45 बजे अपने बेटे के दोस्तों से इमारत गिरने की जानकारी मिली. उन्होंने तुरंत वाराणसी से दिल्ली के लिए बस पकड़ी.
संतोष के अनुसार, अभिषेक के दोस्तों ने इमारत की खराब होती हालत को देखते हुए उसे वहां से चले जाने के लिए कई बार कहा था. उन्होंने कहा, “जब भी उसके दोस्त वहां जाते थे, वे देखते थे कि इमारत का ढांचा लगातार खराब हो रहा है.”
वह चाहते हैं कि सरकार व्यवस्था को ठीक करे, ताकि किसी और बच्चे की जान न जाए.
‘रेस्क्यू करने में इतना वक्त क्यों लगा?’
उत्तर प्रदेश के औरैया में दुख साफ दिखाई दे रहा है और गुस्सा भी. मंगलवार को मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बी.एससी कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट पवन कुमार का शव उनके घर पहुंचा.
पवन के पिता रिटायर्ड डॉक्टर हैं. उन्होंने अपने बेटे को बेहतर पढ़ाई के मौके के लिए दिल्ली भेजा था. पवन की बड़ी बहन अपर्णा ने दिप्रिंट से बात करते हुए पूछा, “लोगों के मारे जाने तक सुरक्षा नियमों को बार-बार नज़रअंदाज़ क्यों किया जाता है?”
अपर्णा ने कहा, “हर साल कोई न कोई घटना होती है.”
उन्होंने 2024 में ओल्ड राजिंदर नगर में बेसमेंट में पानी भरने से छात्रों की मौत की घटना को याद किया.
“बेसमेंट का गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल हो रहा है और पैसे के लालच में लोग भ्रष्टाचार कर रहे हैं. किसी घटना के बाद हमेशा बहुत हंगामा होता है, लेकिन उसके बाद क्या होता है? इसकी जिम्मेदारी कौन लेता है?”
अपर्णा ने कहा कि परिवार असली जिम्मेदारी तय होते देखना चाहता है, सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं. “हमें कोई राजनीति नहीं चाहिए. हम सिर्फ जमीन पर बदलाव देखना चाहते हैं. स्टूडेंट्स को बचाने में इतना समय क्यों लगा? बच्चों को घंटों मलबे के नीचे क्यों पड़ा रहने दिया गया?”
‘रक्षा बंधन के बाद अभी-अभी दिल्ली लौटा था’
इमारत गिरने के कई घंटों बाद तक दुर्ग में युवराज सोनी के परिवार को पता ही नहीं था कि दिल्ली में क्या हुआ था. उनके चचेरे भाई नितेश सोनी ने दिप्रिंट को यह जानकारी दी.
युवराज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज (ईवनिंग) में बी.कॉम स्टूडेंट थे और छत्तीसगढ़ के दुर्ग से दिल्ली आए थे. वे CA बनना चाहते थे.
युवराज स्थानीय मेडिकल स्टोर चलाने वाले एक कारोबारी के बेटे थे और दो भाई-बहनों में से एक थे. नितेश ने कहा, “उसने अपने आखिरी दिन घर पर रक्षा बंधन मनाते हुए बिताए थे और 31 अगस्त को दिल्ली वापस आया था. वापस आने के कुछ समय बाद ही वह सत्या निकेतन के PG में रहने चला गया था.”
परिवार ने अस्पताल में शव की पहचान की और फिर छत्तीसगढ़ लौट गया. वे अभी भी इस घटना को समझने और इससे उबरने की कोशिश कर रहे हैं.
‘पहले घटनास्थल पर, फिर AIIMS में उसे खोजा’
एक और मृत स्टूडेंट अक्षत कटनी के रहने वाले थे. उन्होंने 16 अगस्त 2025 को ‘Daze’ हॉस्टल में कमरा लिया था. एक रिश्तेदार ने दिप्रिंट को बताया कि परिवार को रविवार शाम 7:30 बजे ही घटना की जानकारी मिली.
रिश्तेदार ने कहा, “जब अक्षत के पिता ने हमें फोन किया, तो हम दिल्ली पहुंचने के लिए ट्रेन में बैठ गए. जब हम वहां पहुंचे, तो हर तरफ अफरा-तफरी थी. बहुत दुखद दृश्य था. इतने सारे बच्चे घायल हुए थे, कई की मौत हो गई थी. हर तरफ अफरा-तफरी थी.”
उन्होंने बताया कि परिवार ने पहले मलबे में अक्षत को खोजने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वह नहीं मिला. “इसके बाद हमें उसे खोजने के लिए AIIMS जाना पड़ा. वहां हमने उसकी पहचान की.”
रिश्तेदार ने बताया कि अक्षत पढ़ाई में अच्छे थे. उन्होंने CUET पास किया था और दिल्ली यूनिवर्सिटी के PGDAV कॉलेज में बी.कॉम में एडमिशन लिया था. वह UPSC की तैयारी कर रहे थे.
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