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Wednesday, 9 September, 2026
होमराजनीतिस्टालिन की जबड़े की चोट का मजाक उड़ाने के आरोप पर विजय की सफाई—इशारा अनजाने में हुआ

स्टालिन की जबड़े की चोट का मजाक उड़ाने के आरोप पर विजय की सफाई—इशारा अनजाने में हुआ

विवाद तब हुआ जब विजय ने DMK की आलोचना करते हुए और इमरजेंसी के दौरान MISA का बार-बार ज़िक्र करने की बात कहते हुए अपने दाहिने हाथ की हथेली को जबड़े के पास रखा.

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चेन्नई: द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के चेहरे पर लगी चोट का कथित तौर पर मजाक उड़ाने को लेकर आलोचना झेल रहे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को सफाई दी. स्टालिन के जबड़े में 1975-77 की इमरजेंसी के दौरान चोट लगी थी. विजय ने कहा कि विधानसभा में उन्होंने जो इशारा किया था, वह अनजाने में हुआ था और उनका किसी को दुख पहुंचाने का इरादा नहीं था.

यह विवाद सोमवार को विधानसभा में पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का विजय के जवाब के दौरान हुआ. DMK की आलोचना करते हुए और इमरजेंसी के समय के आंतरिक सुरक्षा कानून (MISA) का पार्टी की ओर से बार-बार ज़िक्र किए जाने की बात कहते हुए विजय ने अपने दाहिने हाथ की हथेली को जबड़े के पास रखा. DMK समेत विपक्षी नेताओं ने इसे शरीर का मजाक उड़ाना या स्टालिन के जबड़े की चोट के असर की नकल करना माना. स्टालिन को MISA के विरोध के कारण जेल में रखा गया था, इसी दौरान उनके जबड़े में चोट लगी थी.

विजय ने मंगलवार को एक्स पर जवाब देते हुए कहा, “मेरी बॉडी लैंग्वेज, जो बीच में अनजाने में ऐसी दिखाई दी, किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं थी. यह पूरी तरह से अचानक हुआ और इसके पीछे कोई गलत इरादा नहीं था. मैंने अनुरोध किया कि इसे किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया काम न समझा जाए.”

इससे पहले सोमवार को DMK के मुख्य सचेतक ई.वी. वेलु और अन्य नेताओं ने विजय पर चर्चा में उठाए गए मुद्दों का जवाब देने के बजाय स्टालिन को नीचा दिखाने का आरोप लगाया. इसके बाद DMK विधायकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. एम.के. स्टालिन, जो उस समय 20 साल की उम्र में युवा विंग के नेता थे, को 1976 की शुरुआत में गिरफ्तार किया गया था. इमरजेंसी (1975-77) के दौरान करुणानिधि के नेतृत्व वाली DMK सरकार को MISA के तहत बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद स्टालिन को कई महीनों तक मद्रास सेंट्रल जेल में रखा गया, जब तक इमरजेंसी खत्म नहीं हुई. DMK नेता इस निशान को लोकतंत्र पर दबाव के समय दमन के खिलाफ लड़ने से मिला “बहादुरी का निशान” बताते हैं.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने भी विजय के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई. उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की सरकार को बाहर से समर्थन देती है. शनमुगम ने विजय पर स्टालिन के शरीर का मजाक उड़ाने और टूटे हुए जबड़े की नकल करते हुए व्यक्तिगत हमला करने का आरोप लगाया.

मंगलवार को शनमुगम ने पोस्ट किया कि इमरजेंसी के दौरान दमन और ज्यादतियों के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी संघर्ष हुए थे. उस समय कई वामपंथी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और उन पर हमला किया गया. उन्होंने कहा कि पूर्व CM स्टालिन पर पुलिस ने बुरी तरह हमला किया था, जिससे उनका जबड़ा टूट गया था. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति ऐसा करे, किसी के शारीरिक रूप का मजाक उड़ाना निंदनीय है और मुख्यमंत्री द्वारा ऐसा किया जाना “गैर-जिम्मेदारी का काम” है.

उन्होंने यह भी कहा कि जनता के मुद्दों पर बात करने के बजाय व्यक्तिगत हमलों या खुद की तारीफ के लिए टैक्स देने वाले लोगों के पैसे से चलने वाली विधानसभा का इस्तेमाल करना गलत है. उन्होंने कहा कि ऐसे कड़े व्यक्तिगत हमले विधानसभा के बाहर किए जाने चाहिए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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