scorecardresearch
Thursday, 16 July, 2026
होमदेशदिल्ली दंगा: फौजी बनने का सपना देखने वाले IB स्टाफर अंकित शर्मा की प्रमोशन से पहले हुई थी हत्या

दिल्ली दंगा: फौजी बनने का सपना देखने वाले IB स्टाफर अंकित शर्मा की प्रमोशन से पहले हुई थी हत्या

सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया, जबकि छह अन्य को बरी कर दिया.

Text Size:

नई दिल्ली: इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के स्टाफर अंकित शर्मा, जो उस समय 26 साल के थे, फरवरी 2020 में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोशन का इंतज़ार कर रहे थे. इसी दौरान उनकी हत्या कर दी गई और उनका शव उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग पुलिया इलाके के एक नाले में फेंक दिया गया.

दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट, क्रिकेट खिलाड़ी और सरकारी कर्मचारी अंकित ने अपने लिए एक रास्ता चुन लिया था, लेकिन 23 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में उनके इलाके में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए और सब कुछ बदल गया. अंकित का शव उनके घर से सिर्फ 200-300 मीटर दूर एक नाले से मिला था. दंगों में मारे गए 53 लोगों में अंकित भी शामिल थे.

सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य लोगों को दोषी ठहराया, जबकि छह अन्य को बरी कर दिया. अदालत के 320 पन्नों के आदेश में कहा गया कि ताहिर ने उस भीड़ को उकसाया था, जिसने अंकित पर हमला किया और उनकी हत्या कर दी.

उनके भाई अंकुर ने दिप्रिंट को बताया कि अंकित की हत्या उस समय हुई, जब वह ड्यूटी पर थे. अंकुर ने कहा, “मेरा भाई मेहनती सरकारी कर्मचारी था. इलाके में आगजनी हो रही थी, लेकिन वह एक बार भी बाहर जाने से नहीं हिचका. ड्यूटी के दौरान ही उसकी हत्या कर दी गई.”

उन्होंने यह भी बताया कि अंकित ने 2016 में सरकारी नौकरी के लिए कई प्रवेश परीक्षाएं दी थीं. उसी साल उन्होंने दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल, दोनों पदों की परीक्षा पास कर ली थी.

लेकिन उनका सपना आईबी में शामिल होने का था. उन्होंने वहां हेड कांस्टेबल के पद की परीक्षा भी पास कर ली थी.

आईबी अपनी अलग परीक्षा कराता है और उसका अपना अलग कैडर होता है. 2017 में अंकित की पोस्टिंग दिल्ली स्थित आईबी मुख्यालय में हुई. 2017 और 2018 में उन्हें मध्य प्रदेश के शिवपुरी और राजस्थान के जोधपुर में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. 2017 से वह हेड कांस्टेबल के पद पर काम कर रहे थे.

‘वह अपनी नौकरी के बारे में बात नहीं करता था’

अंकित का परिवार करीब 20 साल पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से दिल्ली आकर बस गया था. उनके पिता गृह मंत्रालय में नौकरी करते थे. परिवार उत्तर-पूर्वी दिल्ली की गलियों से अच्छी तरह परिचित था—संकरी गलियां और ऐसे पड़ोसी, जो परिवार जैसे बन गए थे.

अंकुर ने दिप्रिंट को बताया, “वह (अंकित) किसी से भी दोस्ती कर लेता था. उसके कुछ दोस्त ऐसे भी थे, जिन्हें अब हम याद भी नहीं कर पाते. उसके मोहल्ले, कॉलेज और नौकरी—हर जगह दोस्त थे. जिसे भी मदद की जरूरत होती, वह हमेशा उसके लिए खड़ा रहता था.”

जिस दिन अंकित लापता हुए थे, उस दिन भी परिवार को पहले लगा था कि वह किसी दोस्त के घर होंगे. अंकुर ने कहा, “उसके सभी दोस्त आज भी हमें फोन करते हैं. जब भी हमें भाई की याद आती है, वे हमारे साथ खड़े रहते हैं. वह हमारे लिए ऐसी यादें छोड़ गया है, जिन्हें हम हमेशा संभालकर रखेंगे.”

अंकुर ने बताया कि अंकित हमेशा फौज में जाना चाहते थे. “उनका पूरा ध्यान सेना या पुलिस में भर्ती होने पर था. वह भारत के लिए काम करना चाहते थे.”

उन्होंने कहा कि गांव में बड़े होने की वजह से फौज में जाने की प्रेरणा मिलती थी. “गांव का लगभग हर लड़का सेना में जाता था. अंकित भी वही करना चाहते थे.”

अंकुर ने बताया कि उनके भाई को हरियाणवी गाने गुनगुनाना और दोस्तों को क्रिकेट खेलने के लिए परेशान करना पसंद था. उन्होंने कहा कि अंकित चार साल की उम्र से ही उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कच्चे मैदानों, गलियों और पार्कों में क्रिकेट खेल रहे थे. उन्हें हॉकी, कबड्डी और कुश्ती भी पसंद थी. “वह दिल्ली की IB टीम की ओर से भी क्रिकेट खेलते थे. उन्होंने कई पुरस्कार जीते थे.”

दोनों भाइयों की उम्र में एक साल का अंतर था. दोनों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. अंकित ने हंसराज कॉलेज से और अंकुर ने श्याम लाल कॉलेज से पढ़ाई की. अंकित ने 2016 में आईबी की प्रवेश परीक्षा पास की और 2017 में इस केंद्रीय एजेंसी में शामिल हो गए.

घर में अंकित ज्यादातर अपने तक ही रहते थे. अंकुर ने कहा, “वह अपनी नौकरी के बारे में बात नहीं करते थे. उन्हें कई जगहों पर जाना पड़ता था.” उन्होंने बताया कि हत्या से कुछ हफ्ते पहले ही अंकित ने परिवार से कहा था कि जल्द ही उनका प्रमोशन होकर एएसआई बनने वाला है.

अंकुर ने कहा, “जब भी हम सेल्फी लेते हैं, उनकी बहुत याद आती है. एक खालीपन है, जो कभी नहीं भर सकता.”

उन्होंने कहा कि परिवार को सबसे ज्यादा अंकित की याद रक्षाबंधन पर आती है.

अंकुर ने दिप्रिंट से कहा, “मेरी बहन आज भी इस दुख से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है. मेरे माता-पिता भी नहीं. हमने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी बेरहमी से हत्या होगी.”

उन्होंने बताया कि अंकित को पहाड़ बहुत पसंद थे, खासकर उत्तराखंड, कश्मीर और हिमाचल. अंकुर ने कहा, “मुझे अपने भाई की बहुत याद आती है, जो मुझे पहाड़ों पर बाइक चलाने के लिए कहता रहता था. मुझे बहुत डर लगता था. मेरे भाई को अभी बहुत कुछ देखना था, बहुत घूमना था. लेकिन वह बहुत जल्दी हमें छोड़कर चला गया.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: उग्र भीड़, 51 घाव और नाले में मिली लाश: दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की पड़ताल


 

share & View comments