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Wednesday, 15 July, 2026
होमहेल्थअनुभव के बिना AIIMS की डिग्री: अब मदुरै के अस्थायी परिसर से पास आउट होगा पहला MBBS बैच

अनुभव के बिना AIIMS की डिग्री: अब मदुरै के अस्थायी परिसर से पास आउट होगा पहला MBBS बैच

जैसे-जैसे नया बैच शामिल होने की तैयारी कर रहा है, पुराने बैच के छात्र अभी भी कामचलाऊ व्यवस्थाओं और कम क्लिनिकल अनुभव जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, क्योंकि AIIMS मदुरै की स्थायी इमारत अभी तैयार होने में काफी समय है.

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थोप्पुर: तमिलनाडु के थोप्पुर में AIIMS मदुरै का शिलान्यास हुए सात साल हो चुके हैं. उस समय इस परियोजना का काफी प्रचार-प्रसार किया गया था.

लेकिन आज भी वादा किया गया अत्याधुनिक कैंपस तैयार नहीं हो पाया है. मेडिकल संस्थान फिलहाल थोप्पुर से करीब 140 किलोमीटर दूर रामनाथपुरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज के अस्थायी कैंपस से संचालित हो रहा है.

रामनाथपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर “AIIMS को आवंटित” लिखे नोटिस लगे हैं. यहां सफेद कोट पहने तीन बैचों के छात्र सरकारी मेडिकल कॉलेज के साथ साझा किए जाने वाले अलग-अलग कॉन्फ्रेंस हॉल में थ्योरी की पढ़ाई करते हैं. क्लिनिकल ड्यूटी के लिए, AIIMS मदुरै के छात्र मेडिकल कॉलेज के ट्रेनीज़ के साथ रोटेशन शेयर करते हैं.

जहां 50 MBBS छात्रों का एक नया बैच आने वाले एकेडमिक सेशन में शामिल होने की तैयारी कर रहा है, वहीं पुराने बैच के छात्र अभी भी कामचलाऊ व्यवस्थाओं और क्लिनिकल अनुभव की कमी से जूझ रहे हैं, क्योंकि AIIMS मदुरै की स्थायी इमारत अभी तैयार होने में काफी समय है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2019 में मदुरै शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर थोप्पुर में AIIMS मदुरै का शिलान्यास किया था.

तमिलनाडु सरकार ने 2020 में जमीन सौंप दी थी और जुलाई 2020 में गजट अधिसूचना के जरिए संस्थान की औपचारिक स्थापना की गई. इसके बाद 2022 में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के साथ लोन समझौता हुआ.

Seven years since PM Modi laid the foundation state, the promised state-of-the-art campus of AIIMS Madurai is far from ready | Shweta Tripathi | ThePrint
पीएम मोदी द्वारा आधारशिला रखे जाने के सात साल बाद भी, एम्स मदुरै का अत्याधुनिक कैंपस तैयार होने से अभी बहुत दूर है | श्वेता त्रिपाठी | दिप्रिंट

हालांकि, निर्माण कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ. इस देरी को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए. केंद्र सरकार का कहना है कि पिछली DMK सरकार के समय प्रशासनिक और जमीन से जुड़ी दिक्कतों के कारण देरी हुई. वहीं DMK नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार ने फंड देने में देरी की.

स्थायी कैंपस अभी भी बन रहा है. ऐसे में छात्रों का कहना है कि उन्हें वैसा AIIMS अनुभव नहीं मिला जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी. उनका मेडिकल प्रशिक्षण बंट गया है क्योंकि क्लिनिकल ट्रेनिंग तीन अलग-अलग संस्थानों में हो रही है.

AIIMS मदुरै के पांचवें वर्ष के एक छात्र ने कहा, “हमारी क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरे कोर्स के दौरान तीन अलग-अलग संस्थानों में कराई गई. शुरुआत में रामनाथपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में, फिर बाद में JIPMER (जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) में.”

उन्होंने आगे कहा, “अब पांचवें वर्ष के छात्रों को इंटर्नशिप के लिए मदुरै मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में पोस्टिंग दी गई है. हम शायद पहले और शायद इकलौते ऐसे छात्र होंगे जिन्होंने AIIMS में दाखिला लिया, लेकिन AIIMS संस्थान में कभी क्लिनिकल अनुभव नहीं मिला.”

रामनाथपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर “AIIMS को आवंटित” लिखे नोटिस लगे हैं.

The fifth floor of Ramanathapuram Government Medical College and Hospital has notices that read “allotted to AIIMS” | Shweta Tripathi | ThePrint
रामानाथपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की पांचवीं मंज़िल पर नोटिस लगे हैं जिन पर लिखा है “AIIMS को आवंटित” | श्वेता त्रिपाठी | दिप्रिंट

कोविड महामारी और हाल के समय में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भी निर्माण में देरी की. इससे परियोजना की लागत भी बढ़ गई.

निर्माण का ठेका पाने वाली कंपनी L&T अब कम से कम एक शैक्षणिक ब्लॉक को जल्द पूरा करने की कोशिश कर रही है. वहीं दो हॉस्टल तैयार हो चुके हैं.

L&T के एक अधिकारी ने कहा, “जमीन पथरीली है, जिससे निर्माण कार्य धीमा हो जाता है. मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष की वजह से ठेकेदारों ने निर्माण सामग्री की कीमत बढ़ा दी है. हम आने वाले महीनों में फेज-1 पूरा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.”

L&T अधिकारियों के ताजा अनुमान के मुताबिक, अगस्त 2026 तक मुख्य इमारतों का कुछ हिस्सा तैयार हो जाएगा. पूरा कैंपस दिसंबर 2027 या 2028 की शुरुआत तक पूरा हो सकता है. सितंबर-अक्टूबर 2026 से कैंपस में कक्षाएं शुरू होने की उम्मीद है.

उप निदेशक रेक्स फिलिप ने दिप्रिंट से कहा, “हम इस साल मार्च में पहले बैच को वहां भेज चुके हैं. प्रबंधन की योजना है कि दो मौजूदा बैचों को थोप्पुर कैंपस में बने हॉस्टलों में शिफ्ट किया जाए. पहला बैच मदुरै मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इंटर्नशिप करेगा.”

इसका उद्देश्य रामनाथपुरम के अस्थायी कैंपस में नए बैच के लिए जगह खाली करना है. डीन डॉ. गणेश बाबू और अन्य अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि यही व्यवस्था की गई है.

AIIMS के एक अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “रामनाथपुरम के अस्थायी कैंपस में हमारे पास छह क्लासरूम, दो लैब और एक लाइब्रेरी है. नए बैच की कक्षाएं भी रामनाथपुरम मेडिकल कॉलेज के इसी ब्लॉक में होंगी.”

उन्होंने आगे कहा, “कैंपस की एक नई इमारत का इस्तेमाल अतिरिक्त क्लासरूम के रूप में किया जाएगा ताकि छात्रों के लिए पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध हों. यह व्यवस्था सिर्फ एक साल के लिए होगी.”

AIIMS की डिग्री, लेकिन AIIMS कैंपस नहीं

पहले बैच के छात्र अब अपना पांच साल का कोर्स पूरा कर रहे हैं. लेकिन उनका AIIMS का अनुभव सिर्फ नाम तक ही सीमित रहा है. उन्होंने कभी किसी समर्पित AIIMS कैंपस में पढ़ाई नहीं की. उन्हें एक महीने के लिए JIPMER पुडुचेरी में प्रशिक्षण दिया गया था.

रामनाथपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज का अस्थायी कैंपस एयर कंडीशनर वाले कमरों, साझा लैब और क्लासरूम से लैस है, लेकिन यह उस समर्पित AIIMS कैंपस जैसा नहीं है जिसकी कल्पना की गई थी.

AIIMS Madurai has been allocated six classrooms, two laboratories and one library in the Ramanathapuram govt college building | Shweta Tripathi | ThePrint
एम्स मदुरै को रामनाथपुरम सरकारी कॉलेज की बिल्डिंग में छह क्लासरूम, दो लैब और एक लाइब्रेरी आवंटित की गई है | श्वेता त्रिपाठी | दिप्रिंट

रामनाथपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज की इमारत में AIIMS मदुरै को छह क्लासरूम, दो लैब और एक लाइब्रेरी दी गई है.

छात्रों ने सावधानी से अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्हें पहले से पता था कि AIIMS मदुरै के निर्माण में देरी हो रही है, लेकिन यह उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबी हो गई है.

नाम न छापने की शर्त पर एक छात्र ने कहा, “AIIMS की सही सुविधा और लगातार क्लिनिकल अनुभव न मिलना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती रही है. भविष्य के डॉक्टर होने के नाते हमें कई तरह के मरीजों का इलाज देखने और सीखने का मौका मिलना चाहिए, जो रामनाथपुरम के ग्रामीण इलाके में स्थित मेडिकल कॉलेज में संभव नहीं है.”

उन्होंने कहा, “क्लिनिकल ड्यूटी और लैब का अनुभव मदद करता है, लेकिन AIIMS संस्थान जैसा माहौल उसकी भरपाई नहीं कर सकता, जिसकी हमें उम्मीद थी.”

देश के दूसरे AIIMS संस्थानों में आधुनिक जांच सुविधाएं, रिसर्च के साथ पढ़ाई और बड़ी संख्या में मरीजों के इलाज का अनुभव मिलता है. लेकिन छात्रों का कहना है कि उनकी ट्रेनिंग अब भी बंटी हुई है.

2024 में बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर हुए शुरुआती विरोध प्रदर्शन के बाद छात्र खुलकर अपनी शिकायतें रखने से भी हिचकते हैं.

उन्होंने भाषा की दिक्कतों के कारण अधिकारियों से तालमेल की कमी, रहने की समस्याएं और AIIMS के लिए अलग कैंपस न होने जैसे मुद्दे भी उठाए थे.

विरोध प्रदर्शन के बाद अलग क्लासरूम और लैब जैसी कई बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें दूर कर दी गईं. लेकिन निर्माण में देरी अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.

चार साल पहले जब दिप्रिंट यहां पहुंचा था, तब थोप्पुर का परिसर सिर्फ चारदीवारी के पीछे खाली जमीन था. आज वहां निर्माण कार्य तेज हो गया है. एक शैक्षणिक ब्लॉक लगभग तैयार है और पहले बैच के लिए दो हॉस्टल भी बन चुके हैं.

लेकिन पूरे कैंपस का निर्माण अभी भी काफी दूर है. पहले बैच के छात्रों को तैयार हो चुके हॉस्टलों में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन आसपास निर्माण कार्य चलने के कारण वहां तक पहुंचना आसान नहीं है.

Two hostel facilities for the first batch are ready | Shweta Tripathi | ThePrint
पहले बैच के लिए हॉस्टल की दो सुविधाएं तैयार हैं | श्वेता त्रिपाठी | दिप्रिंट

पहले बैच के लिए दो हॉस्टल तैयार हो चुके हैं.

मदुरै AIIMS परियोजना अभी पूरी भी नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान कोयंबटूर में एक और AIIMS बनाने की मांग की.

अधिकारियों को उम्मीद है कि आंशिक रूप से तैयार बुनियादी ढांचा आगे की व्यवस्था को आसान बनाएगा. फिलहाल पहले बैच के छात्रों को इंटर्नशिप के लिए मदुरै मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा. लेकिन जब तक वे अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे, तब तक भी संभव है कि उन्होंने पूरी तरह से तैयार AIIMS कैंपस न देखा हो.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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