गाजियाबाद: 65 साल के गोपाल सिंह पिछले 20 साल से भी ज्यादा समय से गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित विजया अपार्टमेंट में काम कर रहे हैं. वह सोसाइटी के अंदर और बाहर की गलियों की सफाई करते हैं और कचरा संभालते हैं. अब वह काम करने की परिस्थितियों और नौकरी से निकाले जाने के विरोध में अपने परिवार के साथ सोसाइटी के मुख्य गेट के बाहर फुटपाथ पर लेटे हुए हैं.
इंदिरापुरम रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के साथ दो दिन से चल रहा यह विवाद काफी पुराना है. इस विवाद की मुख्य वजह RWA की यह मांग है कि सिंह और उनका परिवार इमारत का कचरा अपने नंगे हाथों से अलग-अलग करें.
यह दिल्ली-एनसीआर में RWA और इमारतों में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच बढ़ते तनाव की एक बड़ी तस्वीर का हिस्सा है. इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि RWA अपनी सोसाइटियों को कैसे चलाती हैं और नियम कैसे बनाती हैं.
सोमवार को सिंह ने सोसाइटी के बाहर प्रदर्शन और भूख हड़ताल शुरू की. उनका मकसद सिर्फ अपनी नौकरी बचाना नहीं, बल्कि अपने परिवार के चार सदस्यों की रोजी-रोटी बचाना भी है, जो वहां सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करते हैं. परिवार ने कचरा अलग-अलग करने से इनकार कर दिया और पहले उन्हें सुरक्षा का सामान देने की मांग की.
मंगलवार सुबह एक चैरिटेबल ट्रस्ट वाल्मीकि समाज के सदस्य भी सोसाइटी के गेट के बाहर प्रदर्शन में शामिल हो गए और RWA के सदस्यों के खिलाफ नारे लगाए.
हाथों में झाड़ू लिए प्रदर्शनकारियों ने RWA के सदस्यों के खिलाफ “संतोष सिंह मुर्दाबाद” और “विकास वाजपेयी मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए.
यह प्रदर्शन रविवार को शुरू हुआ, जब RWA ने कर्मचारियों को हाथ से लिखा नौकरी खत्म करने का पत्र दिया और उनसे सोमवार से काम बंद करने को कहा. पत्र में कर्मचारियों पर स्टाफ के सदस्यों और सोसाइटी के लोगों के साथ बदतमीजी करने का आरोप लगाया गया.
सिंह के लिए, जिन्होंने उसी सोसाइटी में दो दशक से ज्यादा समय तक काम किया है, यह पत्र अचानक लगा बड़ा झटका था. अगले ही दिन जिस गेट से वह सालों से सोसाइटी में आते-जाते थे, वह उनके लिए बंद कर दिया गया.
हाथ से लिखे पत्र में कहा गया है, “आपकी सेवा समाप्त कर दी गई है और आप 7.9.2026 के बाद किसी भी दिन आकर अपने पैसे ले सकते हैं.”
सोसाइटी के मुख्य गेट को बढ़ते प्रदर्शन की जगह बना चुके पांच सफाई कर्मचारियों ने अब मांग की है कि RWA नौकरी खत्म करने का फैसला वापस ले. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें बिना किसी पहले से सूचना या वजह बताए नौकरी से क्यों निकाला गया.
34 साल के अनुज सिंह, जो गोपाल के बेटे हैं, उन्होंने कहा, “हम RWA बनने से पहले से यहां काम कर रहे हैं, लेकिन अब वे बिना कोई पहले से वजह बताए हमें नौकरी से निकाल रहे हैं. RWA यह सब अपने अहंकार की वजह से कर रही है. हमने अपने नंगे हाथों से कचरा अलग करने से इनकार किया और सही सुरक्षा और साफ-सफाई के इंतेजाम की मांग की.”
सुरक्षा, सम्मान और बदलाव की मांग
लेकिन गेट पर टकराव एक साल से ज़्यादा समय से चल रहे विवाद का सिर्फ नया चैप्टर है.
मौजूदा RWA के कार्यभार संभालने के बाद से तनाव बढ़ना शुरू हुआ. इसके बाद काम, मजदूरी और काम की परिस्थितियों को लेकर मतभेद लगातार सामने आते रहे और सफाईकर्मियों तथा रेजिडेंट्स एसोसिएशन के बीच टकराव बढ़ता गया.
अनुज ने कहा, “नई RWA बने एक साल से अधिक समय हो चुका है और तभी से वे हमें हटाने की कोशिश कर रहे हैं. वे ऐसे नए लोगों को लाना चाहते हैं, जो कम पैसे में और उनकी शर्तों पर काम करें.”
इस विवाद के केंद्र में एक ऐसा सवाल है, जिसका सामना देशभर के सफाईकर्मी लंबे समय से करते आए हैं—क्या जोखिम भरे सफाई और कचरा प्रबंधन के काम को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से किया जा सकता है?
सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, सीवर और मैनहोल की सफाई के सुरक्षित तरीके अपनाने, उचित स्वच्छता उपाय सुनिश्चित करने और समय पर मजदूरी देने जैसी मांगें लंबे समय से सफाईकर्मियों के संघर्ष का हिस्सा रही हैं. जोखिम के बावजूद सफाईकर्मी आज भी सीवर में उतरते हैं, कचरा उठाते हैं और खतरनाक सफाई का काम करते हैं. कई बार उनके पास असुरक्षित परिस्थितियों में काम स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता.
लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है. सफाईकर्मी तेजी से उन कामों पर सवाल उठा रहे हैं, जिन्हें वे खतरनाक मानते हैं, और सुरक्षा उपकरणों की मांग कर रहे हैं. विजया अपार्टमेंट में भी नई पीढ़ी के सफाईकर्मियों ने नंगे हाथों से कचरा अलग करने से इनकार कर दिया. कुछ मौकों पर उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना सीवर में उतरने से भी मना कर दिया.
धीरे-धीरे ये इनकार और मतभेद सफाईकर्मियों और RWA के बीच संबंधों में तनाव का प्रमुख कारण बन गए.
हालांकि, रेजिडेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने सफाईकर्मियों के आरोपों को निराधार बताया. उनका कहना था कि कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का फैसला मनमाने ढंग से नहीं लिया गया, बल्कि निवासियों और RWA ने मिलकर उनके काम में लापरवाही पाए जाने के बाद यह निर्णय लिया.
RWA के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “सफाईकर्मियों के खिलाफ निवासियों और अन्य कर्मचारियों से कई शिकायतें मिली थीं. इनमें काम पूरा करने में देरी और दूसरों के साथ अनुचित या अभद्र व्यवहार की शिकायतें भी शामिल थीं. निवासियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के बाद RWA ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया.”

नौकरी जाने के अलावा उत्पीड़न के आरोप
अनुज अपने पिता गोपाल, 35-वर्षीय पत्नी लता और 30 तथा 32 वर्ष की उम्र के अपने दो भाइयों के साथ सोसाइटी के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एक कोने में बैठे हैं.
उनके पास रखी एक झाड़ू उनके सफाईकर्मी के रूप में किए जाने वाले काम का प्रतीक बनी हुई है. सोमवार दोपहर विरोध स्थल पर एक पोस्टर भी लगाया गया, जिसमें RWA के तीन सदस्यों पर सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया था.
यह विरोध केवल नौकरी से निकाले जाने के खिलाफ नहीं था, बल्कि लता जैसी महिला सफाईकर्मियों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ भी था.
28 जून की एक घटना को याद करते हुए लता ने बताया कि परिवार ने इंदिरापुरम की कनावनी पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में छेड़छाड़ और जातिसूचक गालियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था.
लता ने कहा, “उन्होंने हमसे सीवर में उतरकर उसकी सफाई करने को कहा. जब मैंने कहा कि मेरे पति अगले दिन यह काम कर देंगे, तो उन्होंने जातिसूचक टिप्पणियां करनी शुरू कर दीं. उन्होंने हमें ‘भंगी’ कहा और नौकरी से निकालने की धमकी दी.”
लता ने आरोप लगाया, “उन्होंने कई बार मुझे गलत तरीके से छुआ और मेरे बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं.”
जुलाई में अनुज और उनके परिवार ने RWA के मैनेजर और सदस्यों के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में RWA सदस्यों पर जातिसूचक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया गया था.
कई निवासियों ने सफाईकर्मियों को लेकर चिंता जताई और उनका समर्थन किया, हालांकि वे सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए.
विजया अपार्टमेंट के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह सिर्फ RWA के उन सदस्यों के अहंकार का मामला है, जो सत्ता और अधिकार की स्थिति में हैं. उन्हें लगता है कि जिस व्यक्ति के पास उनसे कम ताकत और पैसा है, वह उन्हें ‘ना’ कैसे कह सकता है?”
उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह अन्यायपूर्ण है. हमने पिछले एक साल से RWA को इस परिवार के साथ ऐसा व्यवहार करते देखा है. ऐसा लगता है कि उनका मकसद सिर्फ परिवार को हटाना और अपना अहंकार संतुष्ट करना है.”
घरेलू कामगार, सोसाइटी के निवासी और वहां से गुजरने वाले लोग रुककर प्रदर्शन की तस्वीरें खींचते रहे और वहां मौजूद लोगों से पूछते रहे कि यह विरोध क्यों किया जा रहा है. कुछ लोगों ने इसे गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के प्रति RWA की क्रूरता का उदाहरण बताया.

गेट पर पुलिस
सोमवार दोपहर बाद हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस प्रदर्शन स्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से वहां से हट जाने को कहा. पुलिसकर्मियों ने उन्हें बिना अनुमति सोसाइटी परिसर में प्रवेश न करने की हिदायत भी दी.
एक पुलिसकर्मी ने प्रदर्शनकारियों पर चिल्लाते हुए कहा, “यहां गंदगी या शोर मत करो, वरना तुम्हें हवालात में डाल देंगे.”
मौके पर मौजूद एक अन्य पुलिसकर्मी ने कहा, “हमें शिकायत मिली थी कि ये लोग प्रदर्शन के दौरान सोसाइटी परिसर में गंदगी फैला रहे हैं. हालांकि, अभी तक इनके खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है.”
सोमवार को अनुज और उनकी पत्नी लता ने जिलाधिकारी, गाजियाबाद को भी एक शिकायत दी. इसमें उन्होंने उत्पीड़न, पुलिस में दर्ज शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाए जाने और नौकरी से निकाले जाने का आरोप लगाया.
लता ने कहा, “पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है. जिन निवासियों के लिए हमने काम किया, वे हमारी मदद के लिए सामने नहीं आ रहे हैं. वहीं RWA के लोग गुंडों की तरह हमें धमका रहे हैं और हमारी शिकायतें वापस लेने, प्रदर्शन खत्म करने और सोसाइटी छोड़ने के लिए दबाव बना रहे हैं.”
लता ने आगे बताया कि पिछले डेढ़ साल से उनका परिवार लगातार उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना झेल रहा है.

आरोप-प्रत्यारोप और न्याय की लड़ाई
परिवार ने अपना धरना जारी रखते हुए अन्य सफाईकर्मियों से भी अपील की कि वे उनकी नौकरी समाप्त किए जाने के खिलाफ चल रही लड़ाई में उनका साथ दें. लेकिन उन्हें दूसरे सफाईकर्मियों या उनके यूनियनों से कोई समर्थन नहीं मिला.
सोसाइटी के दूसरे ब्लॉक में काम करने वाले एक सफाईकर्मी ने कहा, “अगर हम इनके साथ खड़े होते हैं, तो निवासी और RWA हमें भी निशाना बनाएंगे और हमारा काम भी प्रभावित होगा. फिर हम क्या करेंगे?”
उन्होंने आगे कहा, “पुलिस, प्रशासन और बाकी सभी लोग हमेशा पैसे वाले लोगों का साथ देते हैं. ये लोग धूप में बैठकर न्याय की मांग कर रहे हैं और अपना समय बर्बाद कर रहे हैं.”
RWA का पक्ष
आरोपों से इनकार करते हुए RWA ने कहा कि उसे परिवार के काम में अनियमितताओं को लेकर कई शिकायतें मिली थीं.
RWA के एक सदस्य ने आरोप लगाया कि सोसाइटी के मेंटेनेंस मैनेजर और अन्य कर्मचारियों ने परिवार के खिलाफ कई शिकायतें की थीं. इनमें लोगों के साथ गाली-गलौज करने और अपना काम ठीक से करने के लिए कहे जाने पर उनके साथ बहस करने के आरोप भी शामिल थे.
RWA के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “निवासियों ने उनके काम को लेकर शिकायतें की थीं. इसके बाद हमने आपसी सहमति से उन्हें हटाने का फैसला लिया और सेवा समाप्ति का पत्र जारी कर दिया.”
उन्होंने आगे दावा किया कि जुलाई में सफाईकर्मियों और RWA के बीच हुए एक विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत लगभग बंद हो गई.
उन्होंने कहा कि कुछ निवासियों ने भी सफाईकर्मियों से बात करना बंद कर दिया था. उन्हें डर था कि यह परिवार उनके खिलाफ भी शिकायत दर्ज करा सकता है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी/एसटी एक्ट के तहत शिकायत भी शामिल हो सकती है.
RWA सदस्य ने कहा, “अब निवासी और यहां तक कि दूसरे कर्मचारी भी डरते हैं कि कहीं वे उनके खिलाफ शिकायत न कर दें या एससी/एसटी एक्ट न लगा दें. उनके परिवार के सभी लोग यहां काम करते हैं और वे चाहते हैं कि पूरे इलाके पर उनका ही दबदबा रहे.”
एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच परिवार अब भी सोसाइटी के बाहर धरने पर बैठा है और न्याय की मांग कर रहा है.
लता ने कहा, “हमें पैसे या वह एडवांस रकम नहीं चाहिए, जो काम छोड़ने के बदले हमें दी जा रही है. हमें अपनी नौकरी वापस चाहिए.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: सीवर में होने वाली मौतें सालों तक परिवारों को कैसे परेशान करती हैं