नई दिल्ली: सोमवार को एफिल टावर आम लोगों के लिए बंद रहा. इसकी वजह कर्मचारियों की हड़ताल थी. कर्मचारी एक हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों के साथ किए गए व्यवहार के विरोध में हड़ताल पर थे. कर्मचारियों और मैनेजमेंट के मुताबिक, यात्रा के दौरान वहां काम करने वाली महिलाओं से कथित तौर पर अपनी काम की जगह छोड़ने या नज़रों से दूर रहने को कहा गया था.
खबरों के मुताबिक, बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) से जुड़े करीब 100 लोगों का एक समूह पेरिस के पास नए मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत वहां पहुंचा था. यूनियन प्रतिनिधि डायने डावोइन ने कहा कि जब प्रतिनिधिमंडल वहां से गुज़र रहा था, तब महिलाओं को एक तरफ हटने और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को खड़े होने के लिए कहा गया था.
डावोइन ने रॉयटर्स को बताया, “इस प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिलाओं से अपनी काम की जगह छोड़ने के लिए कहा गया, ताकि वहां पुरुषों को रखा जा सके.”
उन्होंने यह भी कहा कि घटना को लेकर प्रबंधन ने कर्मचारियों से माफी मांगी थी.
उन्होंने कहा, “इससे कर्मचारियों, खासकर महिलाओं को बहुत बुरा लगा. जो हुआ और जिस तरह से कुछ महिलाओं के साथ व्यवहार किया गया, उससे वे सभी अपमानित महसूस कर रही हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “वीकेंड में तनाव बढ़ गया. इसलिए आज सुबह कर्मचारियों ने बैठक करने का फैसला किया. पहला उद्देश्य प्रबंधन के साथ बातचीत शुरू करना था और दूसरा यह सुनिश्चित करना था कि कंपनी में महिलाओं के साथ दोबारा कभी इस तरह का व्यवहार न हो.”
एक बयान में कर्मचारियों ने “ऐसे काम से जुड़े निर्देशों” की निंदा की, जिनकी वजह से महिला कर्मचारियों को उनके जेंडर के कारण किनारे किया गया, उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को लगाया गया और उन्हें नज़रों से दूर कर दिया गया. बताया गया कि समूह के वहां रहने के दौरान कुछ कर्मचारियों से दूसरे इलाकों में चले जाने या कुछ खास जगहों से दूर रहने को कहा गया था. यात्रा के कुछ हिस्सों में, जिसमें तीसरी मंजिल भी शामिल थी, प्रतिनिधिमंडल के साथ केवल पुरुष कर्मचारी ही थे.
एफिल टावर का संचालन करने वाली Société d’Exploitation de la Tour Eiffel (SETE) ने पुष्टि की कि प्रतिनिधिमंडल ने ऐसी व्यवस्था करने की मांग की थी, जिससे “महिलाओं के साथ बातचीत” कम हो. SETE ने कहा कि “ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था” और प्रबंधन ने कर्मचारियों से माफी मांगी है. SETE के अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि कंपनी इस मामले की जांच करेगी और “जरूरी निष्कर्ष निकालेगी.”
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने इस व्यवस्था को “अस्वीकार्य” बताया.
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी शर्तों को सहन किया जाए. ये न तो मेरे मूल्य हैं और न ही एफिल टावर के वे मूल्य हैं, जहां हर व्यक्ति—चाहे वह महिला हो या पुरुष, बिना किसी भेदभाव के स्वतंत्र रूप से आ-जा और काम कर सके.”
फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं महिलाओं को विदेशी मेहमानों की मांग पूरी करने के लिए एक तरफ हटने के लिए मजबूर किए जाने की अनुमति नहीं दूंगी. फ्रांस में महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर पूरी तरह मौजूद रहती हैं. वहां कोई उन्हें यह तय करके नहीं बता सकता कि उन्हें अदृश्य हो जाना चाहिए.”
बाद में पेरिस में BAPS मंदिर ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने इन चिंताओं को “बहुत गंभीरता से” लिया है.
बयान में कहा गया, “हमारी जानकारी के अनुसार, किसी भी समय किसी को एफिल टावर में जाने से नहीं रोका गया. फिर भी, हुई किसी भी परेशानी या असुविधा के लिए हम दिल से माफी मांगते हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)