नई दिल्ली: जैन, शक्त और अद्वैत परंपरा के सैकड़ों संत और साधु नई दिल्ली में नौ घंटे लंबे एक बड़े सम्मेलन में जुटे. उनका एक ही उद्देश्य था—सनातन धर्म और हिंदू परंपराओं की रक्षा करना.
जैन मुनि लोकेश मुनि ने दिल्ली के राम कृष्ण मिशन में आयोजित कार्यक्रम के अंत में कहा, “यह सवाल नहीं है कि सनातन खतरे में है या नहीं. हर युग में अच्छाई और बुराई की ताकतें साथ-साथ रही हैं. हमें बस हर समय सतर्क और जागरूक रहना है.” देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संत, आध्यात्मिक और धार्मिक नेता तथा श्रद्धालु भारतीय संत महा परिषद (बीएसएमपी) के दूसरे सम्मेलन में शामिल हुए.
इस सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया भर के उन लोगों को एक साथ लाना था, जो भारतीय संस्कृति को अपनी साझा विरासत मानते हैं. बीएसएमपी का लक्ष्य एक मजबूत, संस्कारी और मूल्यों पर आधारित समाज बनाना है, जो विश्व शांति, वैश्विक सद्भाव और सार्वभौमिक भाईचारे को बढ़ावा दे.
हर सत्र के बीच थोड़ी-थोड़ी देर में “जय श्री राम” के नारे सुनाई दे रहे थे. हॉल में जूते पहनकर जाने की अनुमति नहीं थी और सभी लोगों से शरीर पूरी तरह ढककर आने को कहा गया था. बीएसएमपी की शुरुआत पिछले साल जून में हुई थी. इस समुदाय से 1500 से ज्यादा संत जुड़े थे. अप्रैल 2026 में बीएसएमपी का वैश्विक लॉन्च ग्रीस के एथेंस में हुआ था.
अंतिम सत्र कुछ हद तक ओपन माइक जैसा था. कुछ नेताओं ने सभी लोगों से “ॐ” का जाप करने पर जोर दिया, जबकि कुछ ने देश में हिंदुओं के सामने मौजूद खतरों पर बात की.
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता ने पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर में हिंदुओं के सामने मौजूद खतरों पर बात की.
गुप्ता ने कहा, “जिन राज्यों में हिंदू खुद को घिरा हुआ महसूस करते हैं, वहां उन्हें यह भरोसा दिलाने की जरूरत है कि बड़ा हिंदू समाज उनके साथ खड़ा है.” उन्होंने कहा कि अगर हिंदू नहीं होंगे, तो समाज भी नहीं होगा.
वहीं नेपाल से आए संत स्वामी निर्मल ने संस्कृति को बचाने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, “जब तक हम संस्कृति के बारे में गंभीरता से नहीं सोचेंगे, तब तक संस्कृति सुरक्षित नहीं रह पाएगी.” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भारत की व्यापक वैदिक परंपराओं को सीमित नजरिए से देखती है.
इस सम्मेलन में 350 से ज्यादा संत शामिल हुए. सम्मेलन का मुख्य फोकस अलग-अलग दर्शन और परंपराओं को एकजुट करना था, ताकि सनातन धर्म को “लगातार हो रहे हमलों” से बचाया जा सके.
कई युवा भी इस सम्मेलन में शामिल हुए. इनमें हैदराबाद के अमोघ देशपाती ने सोशल मीडिया पर हिंदू बनाम हिंदू की बहस को लेकर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, “जब विदेशी प्लेटफॉर्म भारत को सिर्फ कारोबार के बाजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं, तब ज्यादा नियम और जवाबदेही की जरूरत है.”
उन्होंने आगे कहा, “इंस्टाग्राम पर ‘जय श्री राम’ लिखने वाले कमेंट्स तक छिपाए जा रहे हैं, जबकि हिंदू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक चित्रण पर अक्सर कोई आपत्ति नहीं होती.”
देशपाती ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवाओं को राजनीति के लिए इस्तेमाल करने के बजाय आध्यात्मिक नेताओं द्वारा सही दिशा दी जानी चाहिए.
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