कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद बंगालियों के बदलते चेहरे पर सबसे तीखी टिप्पणी एक लाइव शो में देखने को मिली, जहां स्टैंड-अप कॉमेडियन नसीफ़ अख़्तर ने अपने दर्शकों को टोका. दर्शक उनके ‘जय श्री राम’ के नारे को बड़े उत्साह से दोहरा रहे थे. इस पर उन्होंने याद दिलाया कि 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले तक यही लोग टीएमसी के समर्थक थे. उनका वायरल क्लिप उन लोगों के मूड को दिखाता है जो अब अपना राजनीतिक रंग बदलने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर टॉलीवुड यानी बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में.
4 मई तक ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी के साथ खड़े रहने वाले ज्यादातर बंगाली फिल्म कलाकार अब खुलकर पार्टी से दूरी बना रहे हैं. राज्य में बीजेपी के बड़े और कुछ हद तक अप्रत्याशित चुनावी नतीजों के बाद वे खुद को नए माहौल के हिसाब से ढाल रहे हैं.
इंडस्ट्री में बीजेपी की लहर के बीच अब ‘हिंदू थीम’ वाली नई फिल्मों की स्क्रिप्ट पर तेजी से चर्चा हो रही है. वहीं अब तक टीएमसी के मजबूत नियंत्रण में रहने वाले टॉलीवुड यूनियन भी तेजी से टूट रहे हैं, जिससे स्क्रिप्टिंग और प्रोडक्शन में नए समीकरण बन रहे हैं.
जब उन्होंने बीजेपी को कहा था ‘ना’
2021 विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने “नो वोट टू बीजेपी” नाम का एक मंच बनाया था. इस मंच ने बंगाल के लोगों से अपील की थी कि वे मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी से दूर रहें.
मंच के वरिष्ठ नेता कुशल देबनाथ ने 2021 में एक इंटरव्यू में कहा था, “2019 लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी ने 42 में से 18 सीटें जीत लीं, तभी खतरे की घंटी बज गई थी. हमें पता था कि कुछ करना होगा. बीजेपी की विचारधारा और संस्कृति यहां के लोगों के स्वभाव और सोच से मेल नहीं खाती.”
इस अभियान के तहत कलाकारों के एक समूह ने “आमी ओन्नो कोथाओ जाबोना, आमी एई देशेतेई ठाकबो” नाम का एक म्यूजिक वीडियो जारी किया था. इसका मतलब था, “मैं कहीं नहीं जाऊंगा, मैं इसी देश में रहूंगा.” यह उन लोगों को जवाब था जो बीजेपी की राजनीति का विरोध करने वालों से अक्सर कहते थे, “पाकिस्तान चले जाओ.” इस अभियान में टॉलीवुड के कई बड़े नाम शामिल थे, जैसे ऋद्धि सेन, अनिरबन भट्टाचार्य, अनुपम रॉय और परमब्रत चट्टोपाध्याय.
2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी हार गई थी.
इस साल भी विधानसभा चुनाव से पहले टॉलीवुड का एक हिस्सा बीजेपी के खिलाफ खुलकर बोल रहा था. 2021 की तरह इस बार भी परमब्रत चट्टोपाध्याय ने बीजेपी का विरोध किया, लेकिन इस बार वह एक कदम आगे बढ़कर टीएमसी के लिए प्रचार करने लगे. कृष्णानगर साउथ सीट से टीएमसी उम्मीदवार उज्जल बिस्वास के लिए प्रचार करते हुए उन्होंने कहा था, “2026 का चुनाव कोई आम चुनाव नहीं है. यह बंगालियों के आत्मसम्मान की लड़ाई है. हर बंगाली को इस लड़ाई का हिस्सा बनना चाहिए.”
लेकिन 4 मई को बीजेपी की बड़ी जीत के बाद परमब्रत चट्टोपाध्याय का सुर बदला हुआ दिखा. उन्होंने कहा कि अगर नई सरकार राज्य में कारोबार और उद्योग के विकास के लिए काम करे, खासकर टॉलीवुड के हित में काम करे, तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी होगी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को राजनीतिक विचारों में मतभेद को भी जगह देनी चाहिए.
लेखक और कलकत्ता हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील जॉयदीप सेन ने कहा कि चट्टोपाध्याय का रवैया ज्यादा से ज्यादा पाखंड और कम से कम “साफ झूठ” जैसा है.
सेन ने द प्रिंट से कहा, “यह अभिनेता बीजेपी के खिलाफ सबसे तेज आवाज उठाने वालों में से एक रहा है. 2021 में चुनाव बाद हुई हिंसा के दौरान जब बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बलात्कार और हत्याएं हो रही थीं, तब इसने एक शब्द नहीं कहा. अब यह नई सरकार की कृपा पाने की कोशिश कर रहा है.”
परमब्रत चट्टोपाध्याय अकेले ऐसे अभिनेता नहीं हैं जो टीएमसी से दूरी बना रहे हैं. टीएमसी के पूर्व विधायक और टॉलीवुड के बड़े निर्देशकों में से एक राज चक्रवर्ती ने X पर ऐलान किया कि वह राजनीति छोड़ रहे हैं. उन्होंने इस चुनाव में बैरकपुर सीट से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 15,822 वोटों से हार गए थे.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत पर बधाई देते हुए बंगाली सुपरस्टार और घाटाल सीट से मौजूदा टीएमसी सांसद देव अधिकारी ने नई सरकार से अपील की कि वह बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में एकता और रचनात्मक आजादी की भावना को बनाए रखे और ‘सांस्कृतिक बैन’ की राजनीति खत्म करे.
उन्होंने कहा, “मैं नई सरकार से ईमानदारी से अपील करता हूं कि वह एकता और रचनात्मक आजादी की भावना को बनाए रखे और यह सुनिश्चित करे कि बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में बैन और बंटवारे की संस्कृति अब खत्म हो जाए.”
दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं बैन और बंटवारे के लिए सबसे ज्यादा आरोप देव अधिकारी की पार्टी के नेताओं पर लगते रहे हैं.
यूनियन टूट रही हैं, नई कहानियां लिखी जा रही हैं
बीजेपी की जीत के बाद आने वाले दिनों में सबसे बड़ा बदलाव शायद फेडरेशन ऑफ सिने टेक्नीशियंस एंड वर्कर्स ऑफ ईस्टर्न इंडिया के कामकाज में देखने को मिलेगा. इस संगठन के तहत कई यूनियन और गिल्ड काम करते हैं और फिलहाल इसका संचालन टीएमसी नेता स्वरूप बिस्वास कर रहे हैं.
टॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों में काम करने वाले एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बंगाली फिल्म निर्देशक ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा कि बिस्वास बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में एक “सिंडिकेट” चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिस्वास और उनका करीबी समूह टेक्नीशियनों, शूटिंग के समय, शूटिंग यूनिट के कामकाज और यहां तक कि कलाकारों और निर्देशकों पर “बैन” लगाने तक को कंट्रोल करता है, अगर वे उनकी बात न मानें.
सीनियर एंटरटेनमेंट पत्रकार भास्वती घोष ने दिप्रिंट से कहा, “अब जब बीजेपी सत्ता में आ गई है, तो फेडरेशन में बड़े बदलाव हो सकते हैं, जिनमें नए अध्यक्ष की मांग भी शामिल है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले ही अभिनेता और बीजेपी नेताओं रुद्रनील घोष, पापिया अधिकारी, रूपा गांगुली और हिरण चटर्जी को टॉलीवुड की कार्य संस्कृति बदलने के तरीकों पर चर्चा के लिए बुला चुके हैं.”
टॉलीवुड में सिर्फ काम करने के तरीके और बैन की संस्कृति ही नहीं बदलने वाली, बल्कि उस तरह का सिनेमा भी बदल सकता है जिसके लिए इंडस्ट्री जानी जाती रही है. बीजेपी की पश्चिम बंगाल में जीत को अभी दो हफ्ते भी नहीं हुए हैं और फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म द बंगाल फाइल्स को राज्य में रिलीज की मंजूरी मिल गई. यह फिल्म पिछले साल सितंबर में पूरे भारत के सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, लेकिन पश्चिम बंगाल में नहीं. इससे पहले अग्निहोत्री फिल्म के पश्चिम बंगाल में रिलीज न होने के लिए टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहरा चुके थे.
अग्निहोत्री ने कहा, “हमारे ट्रेलर लॉन्च को रोक दिया गया था. हम पर हमला हुआ और हमारे साथ मारपीट की गई. मेरे खिलाफ दर्जनों एफआईआर दर्ज की गईं. बंगाल में मुझे पूरी तरह अलग कर दिया गया. मैं राज्यपाल से अपना पुरस्कार लेने भी नहीं जा सका. लेकिन हमने हार नहीं मानी. चुनाव के दौरान हमने कोशिश की कि यह फिल्म किसी तरह बंगाल में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे.”
बीजेपी की जीत के बाद अब टॉलीवुड के कई फिल्ममेकर भी “हिंदू मुद्दों” पर आधारित स्क्रिप्ट की तलाश में जुट गए हैं. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने द प्रिंट को बताया कि ऐसी किताबों और स्क्रिप्ट्स की खोज तेज हो गई है जो हिंदू दक्षिणपंथी सोच से मेल खाती हों, खासकर वे जिनकी जड़ें बंगाल के इतिहास में हों.
2025 में रिलीज हुई बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित पीरियड एक्शन-एडवेंचर बंगाली फिल्म देवी चौधरानी के निर्देशक शुभ्रजीत मित्रा का कहना है कि टॉलीवुड में जो हो रहा है, वह “शर्मनाक बौद्धिक गुलामी” है. मित्रा ने द प्रिंट से कहा कि टॉलीवुड परंपरागत रूप से उनके जैसे प्रोजेक्ट का मजाक उड़ाता रहा है.
मित्रा ने कहा, “जब मैंने अत्याचार के खिलाफ संन्यासी विद्रोह के ऐतिहासिक संघर्ष पर फिल्म बनाने का फैसला किया था, तब ऐसा नहीं था कि राजनीतिक माहौल हमारे पक्ष में था. बल्कि स्थिति बिल्कुल उलटी थी. और आज जो फिल्ममेकर हिंदुत्व की सोच के मुताबिक फिल्में बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वही लोग पहले देवी चौधरानी जैसे विषयों को पुराना, व्यावसायिक रूप से जोखिम भरा और राजनीतिक रूप से असुविधाजनक बताते थे. दर्शक स्क्रीन पर उनके झूठ को समझ जाएंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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