धार: भोज उत्सव समिति के सदस्य अशोक कुमार जैन ने शनिवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मंदिर बताया गया है. उन्होंने कहा कि उनकी “लंबे समय से चली आ रही लड़ाई” आखिरकार सफल हुई और हिंदू समाज से वहां आकर पूजा करने की अपील की.
जैन ने कहा, “हमारी वर्षों पुरानी लड़ाई आज सफल हुई है और हम हिंदू समाज से अपील करते हैं कि वे यहां आकर पूजा करें.”
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिगविजय सिंह के कार्यकाल में हिंदुओं की पूजा पर प्रतिबंध लगाए गए थे.
उन्होंने कहा, “हम यहां हर मंगलवार पूजा करते थे, लेकिन दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने हम पर रोक लगा दी और सिर्फ साल में एक बार बसंत पंचमी पर पूजा की अनुमति दी, जबकि मुसलमानों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया.”
जैन ने आगे दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और सत्याग्रह किए गए. उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा.
उन्होंने कहा, “हमने प्रदर्शन और सत्याग्रह किया, जिसमें हमारे तीन कार्यकर्ताओं की मौत भी हुई… यहां हिंदुओं को उसी तरह प्रताड़ित किया गया, जैसे ममता सरकार में किया गया था… कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा. 8 अप्रैल 2003 को हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा का अधिकार मिला.”
फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए जैन ने कहा कि यह फैसला सबूतों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर दिया गया है.
उन्होंने कहा, “यह खुशी की बात है कि रिपोर्ट के आधार पर फैसला आया और इसे देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया.”
उन्होंने उम्मीद जताई कि लंदन के संग्रहालय में रखी देवी सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाया जाएगा.
उन्होंने कहा, “हम उस प्रतिमा के लंदन से वापस आने का इंतजार कर रहे हैं, जिसके लिए अदालत ने राज्य और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है.”
इस बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा हिंदू पक्ष को विवादित स्थल पर पूजा का अधिकार दिए जाने के बाद कई श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में पूजा की और हनुमान चालीसा का पाठ किया.
एक श्रद्धालु ने बिना किसी रोक और शुल्क के पूजा कर पाने पर खुशी जताई.