नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक जगहों से हटाए गए स्ट्रे डॉग्स को केवल शेल्टर में ही रखा जाए. कोर्ट ने उन कई याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उसके 2025 के उस आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी, जिसमें आठ हफ्तों के भीतर डॉग्स को एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटरों में रखने का निर्देश दिया गया था.
कोर्ट ने कहा कि अपने कर्तव्यों को पूरा करने में विफल रहने के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं.
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच, जिसने पिछले नवंबर में भी इस मामले की सुनवाई की थी—ने नए निर्देश जारी किए. कोर्ट ने अपने पहले के रुख को दोहराया और उसके दायरे को और बढ़ाया.
आदेश सुनाते हुए जस्टिस मेहता ने कहा, “सम्मान के साथ जीने के अधिकार में बिना डर के आज़ादी से जीने का अधिकार भी शामिल है. लोगों को स्ट्रे डॉग्स के काटने के खतरे से मुक्त जीवन मिलना चाहिए. राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता. कोर्ट उन कठोर जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता, जहां बच्चे, अंतरराष्ट्रीय यात्री और बुजुर्ग लोग कुत्तों के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं.”
बेंच ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियम लागू करने और हर जिले में कम से कम एक एबीसी सेंटर स्थापित करने का निर्देश दिया. साथ ही एंटी-रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोब्युलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा.
कोर्ट के निर्देशों को लागू करने वाले स्थानीय निकायों और संस्थानों के अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा भी दी गई. कोर्ट ने कहा, “अपनी ड्यूटी निभाने के लिए उनके खिलाफ सामान्य तौर पर एफआईआर या आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं की जानी चाहिए.” कोर्ट ने कहा कि ऐसे अधिकारियों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए.
बेंच ने यह भी कहा कि इंसानी जिंदगी के लिए खतरा बनने वाले रेबीज संक्रमित या डेंजरस स्ट्रे डॉग्स से निपटने के लिए अधिकारी कानून के तहत अनुमति प्राप्त सभी कदम उठा सकते हैं, जिसमें इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) भी शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स को भी निर्देश दिया कि वे इन आदेशों के पालन की निगरानी के लिए स्वत: संज्ञान लेकर मामले दर्ज करें. वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को हाईवे पर आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने का निर्देश दिया गया.
आदेश की विस्तृत कॉपी का इंतज़ार है.
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