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Tuesday, 19 May, 2026
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ओडिशा चेस एसोसिएशन में गड़बड़ी, खिलाड़ियों का सवाल—राष्ट्रीय संस्था कुछ क्यों नहीं कर रही

इनामी राशि विवाद ने ओडिशा के शतरंज प्रशासन के गहरे संकट को उजागर कर दिया है. इस विवाद के बीच खिलाड़ी ऑल इंडिया चेस फेडरेशन पर भी भरोसा खो रहे हैं.

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नई दिल्ली: जनवरी में ओडिशा ओपन का खिताब जीतने के चार महीने बाद भी अर्जुन पुरस्कार विजेता ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता अपने 5.5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि का इंतज़ार कर रहे हैं. शुरुआत में आयोजकों ने उनसे “थोड़ा और इंतज़ार” करने को कहा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया और व्हाट्सऐप मैसेज का जवाब भी देना बंद कर दिया. गुप्ता अकेले नहीं हैं—टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले करीब 250 शतरंज खिलाड़ी अब तक अपनी जीती हुई पुरस्कार राशि नहीं पा सके हैं. कुल 45 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दो अधिकारियों—एक पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा सचिव के बीच चल रहे विवाद में फंसी हुई है.

ऑल ओडिशा चेस एसोसिएशन (AOCA) द्वारा आयोजित 16वां इंटरनेशनल ग्रैंडमास्टर चेस फेस्टिवल 16 से 24 जनवरी के बीच भुवनेश्वर में हुआ था. ओडिशा के आयोजकों से कोई जवाब नहीं मिलने पर गुप्ता ने ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) के अध्यक्ष और सचिव समेत कई अधिकारियों से संपर्क किया, इस उम्मीद में कि मामला सुलझ जाएगा. हालांकि, गुप्ता का कहना है कि वहां से भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

अभिजीत गुप्ता ने कहा, “मामला सिर्फ पैसे या देरी का नहीं है. पुरस्कार राशि मिलने में देरी हो सकती है और खिलाड़ी इसे समझते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा निराश करने वाली बात यह है कि अधिकारी हमारी कॉल और मैसेज का जवाब तक नहीं दे रहे हैं.” गुप्ता ने यह भी कहा कि वह अब कभी ओडिशा में किसी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेंगे.

शुरुआत में पुरस्कार राशि में देरी को आयोजकों की प्रक्रिया से जुड़ी समस्या माना जा रहा था, लेकिन बाद में इसे एसोसिएशन के बैंक खाते फ्रीज होने जैसी समस्याओं से जोड़ा गया. इस पूरे विवाद ने ओडिशा की शतरंज प्रशासन व्यवस्था में गहरे संकट को उजागर कर दिया है, जो सिर्फ आंतरिक विवादों तक सीमित नहीं है. वित्तीय गड़बड़ियों, प्रशासनिक अव्यवस्था, फंड फ्रीज होने और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ ओडिशा द्वारा सरकारी सहायता रोक दिए जाने के आरोपों के बाद AOCA के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं. इस विवाद के बीच खिलाड़ी AICF से भी नाराज हैं, जिस पर चुप रहने का आरोप लग रहा है.

इस विवाद ने राज्य स्तरीय खेल संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के कई महीनों बाद भी खिलाड़ी, अंपायर और आयोजन से जुड़े कर्मचारी पैसों का इंतज़ार कर रहे हैं.

ओडिशा सरकार के खेल एवं युवा सेवा विभाग के उप सचिव अमित कुमार नायक ने 21 अप्रैल को AICF अध्यक्ष को पत्र लिखकर AOCA में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की.

यह पत्र जिला शतरंज संघों, खिलाड़ियों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद लिखा गया. विभाग ने राष्ट्रीय संस्था से आरोपों की जांच कर सरकार को एक एक्शन रिपोर्ट देने को कहा.

पत्र में कहा गया, “विभिन्न जिला शतरंज संघों के सदस्यों और खिलाड़ियों के अभिभावकों द्वारा ऑल ओडिशा चेस एसोसिएशन (AOCA) में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और प्रशासनिक अराजकता को लेकर दी गई शिकायत संलग्न है, जिसे कृपया देखा जाए.”

दिप्रिंट ने इस पत्र की एक प्रति देखी है.

AOCA के अंदर क्या चल रहा है

9 मार्च को लगातार जवाब न मिलने से परेशान होकर अभिजीत गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट कर पुरस्कार राशि न मिलने का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया. खेल मंत्रालय को टैग करने के बाद गुप्ता ने कहा कि उन्हें AICF की ओर से फोन आया और भरोसा दिया गया कि मामला जल्द सुलझाया जाएगा और बकाया भुगतान कराया जाएगा.

अभिजीत गुप्ता ने कहा, “उन्होंने फोन कर भरोसा दिलाया कि मामला सुलझ जाएगा, लेकिन अब तक यह साफ नहीं है कि हमें पैसे कब और कैसे मिलेंगे.”

गुप्ता ने बताया कि कई अन्य खिलाड़ियों ने भी उनसे संपर्क कर अपनी लंबित पुरस्कार राशि के बारे में जानकारी मांगी. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि खिलाड़ियों के सम्मान और पहचान से भी जुड़ा है.

अभिजीत गुप्ता ने कहा, “अगर अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ी के साथ ऐसा हो सकता है, तो ज़मीनी स्तर के खिलाड़ियों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. पुरस्कार राशि सिर्फ आर्थिक मदद नहीं होती, यह खिलाड़ी की भावनाओं और सम्मान से भी जुड़ी होती है.”

जब खिलाड़ी लगातार जवाब तलाश रहे थे, तब गुप्ता और अन्य खिलाड़ियों ने देरी की वजह जानने की कोशिश की. कई महीनों तक उन्हें कोई साफ कारण नहीं बताया गया. बाद में गुप्ता को पता चला कि AOCA का बैंक खाता कथित तौर पर दिसंबर 2025 से फ्रीज है, जिसके कारण वित्तीय लेन-देन नहीं हो पा रहे हैं.

टूर्नामेंट में करीब 1,400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और लगभग 250 विजेता अब भी अपनी पुरस्कार राशि का इंतज़ार कर रहे हैं. कुल लंबित भुगतान करीब 45 लाख रुपये बताया जा रहा है.

इस विवाद के केंद्र में AOCA के भीतर चल रही सत्ता की लड़ाई है, जहां अधिकारी एक-दूसरे पर संकट के लिए आरोप लगा रहे हैं.

विवाद की शुरुआत तब हुई जब तत्कालीन अध्यक्ष सत्य रंजन पटनायक ने सचिव देबब्रत भट्टा को कथित वित्तीय गड़बड़ियों और ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने के आरोप में निलंबित कर दिया. पटनायक ने फरवरी 2025 में पद संभाला था.

पटनायक के मुताबिक, फरवरी 2026 में हुई कार्यकारी समिति की बैठक में भट्टा को 2024-25 और 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट पेश न करने के कारण निलंबित किया गया.

अपने निलंबन को चुनौती देते हुए भट्टा ने 7 मार्च को उड़ीसा हाई कोर्ट में पटनायक के खिलाफ याचिका दायर की. कोर्ट ने AOCA, AICF, रजिस्ट्रेशन महानिरीक्षक और पटनायक को नोटिस जारी किया.

ओडिशा ओपन के मुख्य आयोजक रहे देबब्रत भट्टा ने मौजूदा संकट के लिए पटनायक को जिम्मेदार ठहराया. उनका आरोप है कि व्यक्तिगत मतभेदों के चलते पटनायक ने एसोसिएशन का बैंक खाता फ्रीज करवा दिया, जिसकी वजह से खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि नहीं मिल सकी.

देबब्रत भट्टा ने दिप्रिंट से कहा, “मामला अदालत में है. हम भी खिलाड़ियों को पैसे देना चाहते हैं, लेकिन पटनायक के कदमों और आंतरिक विवादों की वजह से खिलाड़ी परेशान हो रहे हैं.” उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत दुश्मनी ने हालात और खराब कर दिए हैं.

हालांकि, पटनायक ने अलग पक्ष रखा. उनका दावा है कि भट्टा के निलंबन के बावजूद मार्च 2025 में 10 से ज्यादा सदस्यों के साथ एक जनरल बॉडी बैठक आयोजित की गई, जिसमें उन्हें अध्यक्ष पद से हटा दिया गया.

सत्य रंजन पटनायक ने कहा, “लोगों ने मेरे खिलाफ साजिश रची और मुझे पद से हटा दिया, इसलिए मैंने एसोसिएशन के पैसे सुरक्षित रखने के लिए खाता फ्रीज कराया.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समय पर ऑडिट रिपोर्ट जमा न होने के कारण सरकारी फंडिंग रोक दी गई.

31 दिसंबर 2025 को ओडिशा सरकार के खेल एवं युवा सेवा विभाग द्वारा जारी एक पत्र भी इस दावे की पुष्टि करता है. पत्र में कहा गया था कि 2024-25 की जरूरी ऑडिट रिपोर्ट जमा न होने के कारण 2025-26 की अनुदान राशि जारी नहीं की जा सकी. विभाग ने AOCA समेत अन्य संस्थाओं को 5 जनवरी 2026 तक जरूरी ऑडिट दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया था.

नोटिस में कहा गया, “कृपया वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट 05.01.2026 तक व्यक्तिगत रूप से जमा करें, ताकि विभाग फंड जारी कर सके.”

पटनायक ने यह भी दावा किया कि बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद ऑडिट रिकॉर्ड जमा नहीं किए गए और खाता फ्रीज होने की जानकारी होने के बावजूद जनवरी में टूर्नामेंट आयोजित कर दिया गया.

सत्य रंजन पटनायक ने कहा, “यही तरीका है जिससे लोग कार्यकाल खत्म होने के बाद भी सत्ता में बैठे हैं और खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.”

दिप्रिंट ने AICF से संपर्क किया है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है. हालांकि, AICF के एक अधिकारी ने कहा कि फेडरेशन का मानना है कि AOCA को यह मामला खुद संभालने देना चाहिए, क्योंकि सचिव के निलंबन से जुड़ा मामला अभी उड़ीसा हाई कोर्ट में लंबित है.

‘खिलाड़ी परेशान हो रहे हैं’

AOCA के अधिकारियों और सदस्यों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अभिजीत गुप्ता और कई खिलाड़ियों ने AICF पर समय रहते दखल न देने और चुप रहने का आरोप लगाया.

टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले एक खिलाड़ी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “राज्य संघ के अंदरूनी विवाद काफी समय से चल रहे हैं. AICF और खेल मंत्रालय को मामले में दखल देकर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए.”

एक शतरंज खिलाड़ी के पैरेंट्स ने कहा कि एसोसिएशन के अधिकारियों के बीच आंतरिक विवाद कोई नई बात नहीं है.

उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “सरकार पैसा दे रही है, लेकिन वह हमारे बच्चों और खिलाड़ियों तक नहीं पहुंच रहा. अधिकारी सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और उनकी लड़ाई में खिलाड़ियों का भविष्य बर्बाद हो रहा है.”

गुप्ता की एक्स पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने खेल अधिकारियों और AICF की भूमिका पर सवाल उठाए.

एक यूजर ने लिखा, “‘कार्रवाई शुरू कर दी गई है’ कहना बहुत अस्पष्ट लगता है और AICF की तरफ से लीपापोती जैसा लगता है. @narangnitin कृपया बताइए कि समाधान कब पूरा होगा—सिर्फ ‘शुरू’ नहीं. मुझे लगता है कि पैसा स्थानीय आयोजक की जेब में है और शायद खर्च भी हो चुका होगा.”

अपनी पोस्ट में गुप्ता ने लिखा था कि AICF अध्यक्ष नितिन नारंग ने उन्हें फोन कर भरोसा दिया कि जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. हालांकि, गुप्ता ने कहा कि खिलाड़ियों को अब तक यह नहीं बताया गया है कि मामला आखिर कब सुलझेगा.

अभिजीत गुप्ता ने कहा, “सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि वास्तव में क्या कार्रवाई होगी. इस सबके बीच सबसे ज्यादा परेशानी हम खिलाड़ियों को हो रही है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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