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Wednesday, 2 September, 2026
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नेपाल की बाढ़ में देविघाट के पुलिस अधिकारी ने कैसे बचाई 350 लोगों की जान

देविघाट के सैकड़ों लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के बाद, एके बैथा अब उनके साथ बाढ़ से तबाह हुए शहर में वापस जा रहे हैं, ताकि वे अपना सामान निकाल सकें.

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देविघाट (नेपाल): नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद पुलिस अधिकारी एके बैथा के लिए यह एक हफ्ता बहादुरी और मुश्किल हालात से उबरने का रहा है. पहले उन्होंने त्रिशूली नदी में अचानक आए तेज़ पानी से देविघाट के करीब 350 लोगों को बचाया. अब वह लोगों को उनका जो भी सामान बचाया जा सकता है, उसे निकालने में मदद कर रहे हैं—साइकिल, नकदी, ज़रूरी दस्तावेज, तस्वीरें और दूसरी चीज़ें.

खाने और पानी की बोतलों से भरा एक ट्रक देविघाट के एक कमरे वाले पुलिस स्टेशन के पास पीछे की तरफ आता है. स्टेशन हाउस इंचार्ज बैथा इसकी देखरेख कर रहे हैं. नेपाल के नुवाकोट जिले के देविघाट शहर के बड़े बाढ़ग्रस्त इलाके में, पुलिस स्टेशन उन कुछ इमारतों में शामिल है जो 26 अगस्त की बाढ़ के बाद भी खड़ी हैं.

लेकिन भले ही अपनी जगह और भौगोलिक स्थिति की वजह से पुलिस स्टेशन बच गया, देविघाट के 350 लोगों की जान बैथा की वजह से बची.

पिछले बुधवार सुबह, बैथा अपने रोज के नियम के मुताबिक सुबह 8:30 बजे अपनी डेस्क पर बैठकर नाश्ता करने लगे थे. मुश्किल से दस मिनट बाद उन्हें रसुवा में पहाड़ी पर स्थित एक स्टेशन अधिकारी का फोन आया, जिसने कुछ धीमे और साफ न सुनाई देने वाले शब्द कहे.

बैथा ने कहा कि उन्हें बस इतना याद है कि उन्होंने सुना था, “बाढ़! अभी बड़ी बाढ़ आ रही है!” और उनके लिए इतना सुनना ही काफी था.

अपना नाश्ता आधा छोड़कर वह मोटरसाइकिल पर बैठ गए. उनके पास एक लाउडस्पीकर लटक रहा था और वह देविघाट बाज़ार रोड की तरफ निकल पड़े. उन्हें पता था कि यह समय के खिलाफ दौड़ थी. वह बाइक चला ही रहे थे कि उन्हें पहाड़ी इलाकों में रहने वाले और भी लोगों के फोन आने लगे, जिन्होंने बाढ़ देखी थी और किसी तरह बच गए थे.

उन्होंने बताया, “मैं घबराहट में ऐलान करने लगा कि बहुत बड़ी बाढ़ आ रही है, कृपया सुरक्षित जगह की तरफ भागें. बाजार त्रिशूली नदी के बिल्कुल पास था और कई घर भी नदी के पास थे.” उन्होंने कहा, “मैंने सभी को पहाड़ी की तरफ, नदी के किनारे से जितना हो सके उतना दूर भागने को कहा.”

यह एक व्यस्त बाज़ार था, इसलिए बैथा के ऐलान के समय बहुत से लोग अपनी दुकानें खोल रहे थे और दिन की शुरुआत कर रहे थे. उनकी बात सुनकर ज्यादातर लोग हैरान रह गए.

देविघाट के 30 साल के दुकानदार बद्री अधिकारी ने कहा, “मैंने उन्हें कहते सुना कि बाढ़ आ रही है, सुरक्षित जगह की तरफ भागो, लेकिन एक पल के लिए मैंने सोचा कि आखिर बाढ़ कितनी तेज हो सकती है?” उन्होंने कहा, “मेरी दुकान नदी से 200 मीटर से भी ज्यादा दूर थी; मुझे लगा कि वह ज़रूर सुरक्षित होगी?”

लेकिन नीली पुलिस वर्दी पहने, मजबूत शरीर और छोटे कटे बालों वाले बैथा लगातार लोगों को समझा रहे थे. दस मिनट तक वह हर साइड रोड पर गए, दूसरे पुलिस अधिकारियों और सड़कों पर मिले युवकों को इकट्ठा किया और उनसे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए कहा.

इस समय तक अधिकारी समेत देविघाट के कुछ लोगों, जिनके रिश्तेदार नदी के ऊपर वाले इलाकों में रहते थे, को भी अपने परिवार के लोगों के फोन आने लगे थे. उन्हें समझ आ गया कि खतरा सचमुच बड़ा है और उन्होंने बैथा की बात मानने का फैसला किया. ज्यादातर लोग सड़क से भागकर पुलिस स्टेशन और उससे आगे की तरफ चले गए, जबकि कुछ लोग अपने घरों के पीछे गए और शहर से लगी पहाड़ी पर चढ़ गए.

बाढ़ का असर और राहत

जब तक बाढ़ का तेज़ पानी नदी के रास्ते नीचे पहुंचा, बैथा देविघाट के ज्यादातर लोगों—करीब 350 से 400 लोगों, को सुरक्षित जगह पहुंचा चुके थे. पहाड़ी के ऊपर खड़े होकर उन्होंने देखा कि उनके घर और दुकानें कुछ ही पलों में बह गईं. उन्होंने यह भी देखा कि कुछ पड़ोसी, जिन्होंने पहाड़ी की तरफ जाने के बजाय घरों की छतों पर जाने का फैसला किया था, बाढ़ के पानी में बह गए.

बैथा ने कहा, “मैंने जितने ज्यादा लोगों को बचा सकता था, बचाने की कोशिश की, लेकिन मैं भी इस बात का अंदाजा नहीं लगा सकता था कि यह घटना इतनी बड़े स्तर की होगी.”

उन्होंने कहा, “शायद अगर मुझे पहले पता चल जाता, तो मैं यह सुनिश्चित कर सकता था कि सभी लोग अपने घरों से बाहर निकल जाएं.”

सभी आम लोग बाजार से कुछ सौ मीटर दूर स्थित श्री चंद्रज्योति सेकेंडरी स्कूल में रुके, जबकि घायलों को पास के एक आयुर्वेदिक मेडिकल सेंटर ले जाया गया. अब बाढ़ को आए एक हफ्ता हो चुका है, लेकिन बैथा अब भी अपनी पुलिस पोस्ट पर रहते हैं. वह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पहाड़ी पर रहने वाले लोगों को खाने के लिए पर्याप्त सामान मिले और सरकार व कई एनजीओ से आने वाले राहत के राशन का सही हिसाब रखा जाए.

कभी-कभी लोग अपने सामान को ढूंढने और बाढ़ के बाद जो कुछ बचा है उसे निकालने के लिए शहर में चले जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र और नेपाल स्काउट्स एंड गाइड्स की राहत टीमें आने से पहले, बैथा खुद लोगों के साथ अंदर जाते थे.

बैथा ने राहत कैंप में लोगों के एक समूह को पानी की बोतलें देते हुए कहा, “ज्यादातर लोग अपने जरूरी दस्तावेज, कुछ नकदी और सोना चाहते हैं. कई लोग अपने परिवार और दोस्तों की तस्वीरें निकालते हैं.”

उन्होंने कहा, “कल एक लड़का अपनी साइकिल ढूंढने आया था. मैं उसके साथ गया और घर के अंदर से उसकी साइकिल निकालकर बचा ली.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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