बेंगलुरु (कर्नाटक): अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज समेत कई सिविल सोसाइटी संगठनों के सदस्यों को मंगलवार दोपहर बेंगलुरु पुलिस ने हिरासत में ले लिया. उन्हें फ्रीडम पार्क में आयोजित ‘Election Commission Chalo’ विरोध मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया.
प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. उनका कहना था कि इस प्रक्रिया में कुछ खामियां हैं और उन्होंने इसे लेकर चिंता जताई.
मीडिया से बात करते हुए प्रकाश राज ने कहा, “SIR को खत्म करना होगा. जब तक इसे खत्म नहीं किया जाता, कर्नाटक चैन से नहीं बैठेगा… हम अदालत जाएंगे. हम देश के हर नागरिक के लिए लड़ेंगे.”
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. अभिनेता किशोर ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
किशोर ने कहा, “इतनी बड़ी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पारदर्शिता और पर्याप्त समय जरूरी है. इस प्रदर्शन के पीछे सबसे बुनियादी बात यह है कि यह एक मूल अधिकार है. किसी को भी उस अधिकार को छीनने का अधिकार या ताकत नहीं है. इसलिए हर योग्य वोटर का नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए. यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक भारत में वोट देने के योग्य हर व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं हो जाता.”
इससे पहले मीडिया से बात करते हुए प्रकाश राज ने कहा, “SSR शुरू होने से पहले ही चुनाव आयोग के सदस्यों को चुनने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं थी. इसमें सत्तारूढ़ पार्टी के दो सदस्य और विपक्ष का सिर्फ एक सदस्य है, तो इसमें लोकतंत्र कहां है? इसके अलावा, सरकार ने संसद में चुनाव आयोग को न्यायिक सुरक्षा देने का फैसला किया, जिससे किसी अधिकारी के खिलाफ जीवनभर कोई मामला दर्ज नहीं किया जा सकता. लोकतांत्रिक व्यवस्था में आमतौर पर न्यायिक सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट के जजों को दी जाती है. इसे पूरी संस्था तक क्यों बढ़ाया गया? इससे ऐसी स्थिति बनती है कि उन्हें लगता है कि वे बिना किसी जवाबदेही के कुछ भी कर सकते हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “इस देश के एक वोटर और नागरिक को कितने साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे? आप देश के हर वोटर को इतनी परेशानी में क्यों डाल रहे हैं? और कर्नाटक में अभी दो साल बाकी हैं, इसलिए कोई जल्दबाजी भी नहीं है. इसे सिर्फ एक महीने में करने की क्या जरूरत थी?”
उन्होंने उन वोटरों के नाम हटाने पर भी सवाल उठाया, जिन्हें अनुपस्थित (Absent) या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए (Permanently Shifted) के रूप में चिन्हित किया गया है. उन्होंने कहा कि इन लोगों को अपनी पात्रता साबित करने का उचित मौका दिया जाना चाहिए, न कि उन्हें फॉर्म 6 के जरिए दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए कहा जाना चाहिए.
यह मामला कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से SIR-2026 प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी किए जाने के बाद सामने आया है.
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट राज्य में 30 जून से 17 अगस्त 2026 के बीच बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की ओर से घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के बाद जारी की गई.
CEO कार्यालय के मुताबिक, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 4,46,35,975 वोटर हैं. इसमें 2,24,73,864 महिला वोटर, 2,21,59,240 पुरुष वोटर और 2,871 थर्ड-जेंडर वोटर शामिल हैं.
वोटर लिस्ट में 44,176 सर्विस वोटर और 18-19 साल की उम्र के 3,70,341 युवा वोटर भी शामिल हैं.
गणना प्रक्रिया के दौरान कुल 1,07,96,339 नाम, यानी कुल नामों के 19.48 प्रतिशत, ASDDO कैटेगरी में पाए गए. इसमें Absent (अनुपस्थित), Shifted (दूसरी जगह चले गए), Dead (मृत), Duplicate (एक से ज्यादा बार दर्ज) और Others (अन्य) शामिल हैं.
बाकी 4.46 करोड़ वोटरों को सक्रिय वोटर बेस में रखा गया है. हालांकि, इनमें से 20.35 लाख वोटरों को कुछ गड़बड़ियों के लिए चिन्हित किया गया है, जबकि 23.45 लाख वोटरों को NoMapping कैटेगरी में रखा गया है.
CEO कार्यालय ने कहा कि इन दोनों कैटेगरी में शामिल कुल 43.8 लाख से ज्यादा वोटरों को नोटिस जारी किए जाएंगे. उन्हें अपनी पात्रता की पुष्टि करने और अंतिम वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने के लिए जवाब देना होगा.
इस रिवीजन के लिए 1 अक्टूबर 2026 को पात्रता की तारीख तय की गई है. दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी. इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट जारी की जाएगी.
CEO कार्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपनी जानकारी जांचें और तय समय के भीतर दावे या आपत्तियां दर्ज करें, ताकि अंतिम वोटर लिस्ट में उनके नाम सही तरीके से शामिल किए जा सकें. (ANI)