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Tuesday, 1 September, 2026
होमरिपोर्ट12वीं की पढ़ाई के साथ NEET-JEE Main क्लियर, भोपाल में छात्रों के टैलेंट से प्रभावित हुए CM मोहन यादव

12वीं की पढ़ाई के साथ NEET-JEE Main क्लियर, भोपाल में छात्रों के टैलेंट से प्रभावित हुए CM मोहन यादव

भोपाल में प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत 1.21 लाख से ज्यादा छात्रों के खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ रुपये से अधिक ट्रांसफर किए गए.

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भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को भोपाल में स्कूली बच्चों की प्रतिभा देखकर काफी प्रभावित हुए. किसी छात्र ने 12वीं की पढ़ाई के साथ NEET क्लियर किया, तो किसी ने NEET, JEE Main और CUET जैसी परीक्षाएं पास कीं.

मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सभागार में आयोजित ‘प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना’ कार्यक्रम का. मुख्यमंत्री ने 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले 1.21 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की. हर पात्र छात्र को 25 हजार रुपये दिए गए.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप भी दिए. खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ रिमोट का बटन दबाकर उनके खातों में राशि ट्रांसफर की.

मुख्यमंत्री ने मंच पर कई विद्यार्थियों से बातचीत की और उनसे उनके भविष्य के सपनों के बारे में पूछा.

फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

छात्र तन्वी ने 12वीं की पढ़ाई के साथ NEET भी क्लियर कर लिया और मेडिकल कॉलेज में पहुंच गई. मुख्यमंत्री ने बताया कि उसने पहली कोशिश में ही दोनों परीक्षाएं पास कीं. तन्वी ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है.

वहीं, छात्र ओम चौकसे ने बताया कि उसने 12वीं के साथ-साथ NEET, JEE Main और CUET भी क्लियर किया है. इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “आदमी छोटा, लेकिन छलांग बड़ी है.”

ओम ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ओम के पिता बैग बनाकर अपना परिवार चलाते हैं और उनके पास अपनी दुकान भी नहीं है.

कार्यक्रम में छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने मुख्यमंत्री से कहा कि वह राजनेता बनना चाहता है. इस पर मोहन यादव ने कहा कि अच्छे राजनेताओं की भी देश को जरूरत है और बच्चे राजनीति में आकर देश को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

मुख्यमंत्री ने बच्चों से पूछा कि किस-किस के घर में खेती-किसानी होती है और कौन किसान बनना चाहता है.

छात्रों की प्रतिक्रिया देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी हमारी जड़ है. उन्होंने कहा कि बच्चे डॉक्टर, वकील और इंजीनियर बनने की बात करते हैं, लेकिन कोई यह नहीं कहता कि वह किसान बनना चाहता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसान मेहनत करके अनाज नहीं उगाएगा, तो जीवन कैसे चलेगा. इसी तरह अगर अच्छे लोग राजनीति में नहीं आएंगे, तो अच्छे राजनेता कहां से आएंगे.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि विद्यार्थी अपनी मेहनत से सफलता हासिल कर परिवार और प्रदेश का नाम रोशन करते हैं.

उन्होंने कहा कि सफलता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए. अगर जीवन में कभी असफलता मिले, तो उसे दिल पर नहीं लगाना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने कहा, “हम जहां हैं, वहीं सामान्य बने रहें और हमेशा आगे बढ़ने का जज्बा बनाए रखें.”

उन्होंने कहा कि हमें अपनी पिछली गलतियों से सीखना चाहिए. एक अच्छा इंसान केवल कागज पर मिले नंबरों से नहीं बनता, बल्कि अच्छे विचार और अच्छा मन इंसान को बेहतर बनाते हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान और कौशल सफलता के दो महत्वपूर्ण साथी हैं. ज्ञान जीवन भर साथ देता है और कौशल व्यक्ति को अपने काम में दक्ष बनाता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने बताया कि योजना के पहले वर्ष में 473 बच्चों को लैपटॉप दिए गए थे. पिछले साल करीब 92 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला था. इस साल स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब 1.22 लाख विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं की मेरिट सूची में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से आते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने अच्छा काम किया है.

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार बेहतर शिक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत परिणाम देने वाले सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों, शिक्षकों और विद्वानों को गुरु पूर्णिमा के मौके पर सम्मानित किया गया है.

उन्होंने कहा कि बच्चों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, साइकिल, लैपटॉप और स्कूटी भी दी जा रही हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले स्कूलों की स्थिति ऐसी थी कि कई जगह बच्चों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं होती थी.

उन्होंने मेडिकल शिक्षा के विस्तार का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद 55 सालों में प्रदेश में सिर्फ पांच मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब निजी और सरकारी मिलाकर कुल 33 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं.

राज्य में इस समय साढ़े 6 हजार से अधिक MBBS सीटें हैं. पिछले दो साल में पांच नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, जिससे UG की 2,400 सीटें बढ़ी हैं.

सरकार ने 2028 तक कुल 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार UG सीटों का लक्ष्य रखा है.

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