नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 20 जुलाई के देशभर में हुए NEET विरोध प्रदर्शन से जुड़े दिल्ली और अन्य राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दिए. इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना प्रदर्शन वापस ले लिया है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और बिहार की पुलिस द्वारा दायर उन अर्जियों को मंजूरी दी, जिनमें अपने-अपने राज्यों में प्रदर्शन से जुड़े दर्ज आपराधिक मामलों को रद्द करने की मांग की गई थी. इस प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी.
कोर्ट ने इन अर्जियों को मंजूरी देने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया. कोर्ट ने अपना आदेश उन राज्यों तक भी बढ़ा दिया, जहां इस प्रदर्शन को लेकर कोई मामला दर्ज हुआ हो, लेकिन वे एफआईआर रद्द करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं आए हैं.
CJP के सह-संयोजक सौरव दास, जो कोर्ट में मौजूद थे, ने बेंच को भरोसा दिलाया कि केंद्र के नए कदम और NEET पेपर लीक को लेकर अपनी सही शिकायत उठाने के लिए इकट्ठा हुए असली छात्रों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई खत्म करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए संगठन ने 5 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया है.
CJP ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने का फैसला इसलिए किया था क्योंकि केंद्र छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने और NEET पेपर लीक के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के अपने वादे को पूरा नहीं कर रहा था.
दास ने कोर्ट में अपने साथ लाया एक बयान पढ़ते हुए कहा, “केंद्र की ओर से दिए गए सकारात्मक भरोसे और इस कोर्ट के आदेश को देखते हुए, CJP अपना प्रदर्शन करने का आह्वान वापस लेता है.”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर दास को बयान देने के लिए कहा गया. मेहता ने कहा था कि CJP के सह-संयोजक कोर्ट में मौजूद हैं और उन्हें सरकार के नए कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान करना चाहिए.
मेहता ने कोर्ट से कहा, “यह आशंका थी कि सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर रही है. इसी वजह से उन्होंने 5 सितंबर को प्रदर्शन का आह्वान किया है. उन्हें प्रतिक्रिया देनी चाहिए… शायद इसे वापस ले लेना चाहिए.”
दास के बयान के बाद मेहता ने कहा, “मुझे उन पर भरोसा है.”
कोर्ट ने मेहता के उस बयान पर ध्यान दिया कि मामले रद्द करने का फैसला इस आधार पर लिया जा रहा है कि सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होना अपराध नहीं माना जाता.
आदेश में मेहता का यह वादा भी शामिल था कि 20 से 24 जुलाई के बीच प्रदर्शन के बाद हुई घटनाओं को लेकर दिल्ली या किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. इसके अलावा, कोई भी राज्य किसी प्रभावित व्यक्ति की कोर्ट में लंबित किसी दूसरी एफआईआर को रद्द करने की मांग का विरोध नहीं करेगा.
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में मौजूद गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी भी दी. इस एफआईआर के तहत जांच सिर्फ यह पता लगाने तक सीमित होगी कि क्या वे प्रदर्शन के दौरान किसी को शारीरिक चोट पहुंचाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल थे.
कोर्ट ने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की योजना को लेकर मेहता के बयान को भी रिकॉर्ड में लिया.
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र, राज्यों से सलाह-मशविरा करके पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले लोगों के परिवारों को मुआवजा देने की एक योजना बना रहा है. योजना की प्रक्रिया और नियम तय होने के बाद इसे सभी राज्यों के साथ साझा किया जाएगा.
इस योजना के आधार पर, केंद्र इस साल NEET पेपर लीक की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देगा. यह काम तीन महीने के भीतर किया जाएगा.
कोर्ट ने कहा, “नतीजतन, ये अर्जियां मंजूर की जाती हैं और सभी एफआईआर (जिनका ज़िक्र दिल्ली पुलिस और चार राज्यों की अर्जियों में किया गया है) रद्द की जाती हैं.”
कोर्ट ने आगे कहा, “अगर इसी घटना को लेकर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कोई दूसरी एफआईआर दर्ज है, जो औपचारिक रूप से हमारे सामने नहीं लाई गई है, तो उस पर आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उसे सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा.”
कोर्ट ने अपने आदेश में दास के बयान को भी दर्ज किया और कहा कि दोनों पक्ष कोर्ट के सामने दिए गए बयान का पालन करेंगे.
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