नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की पुलिस ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की जगह पर या उसके आसपास आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,800 से ज्यादा लोगों की मौजूदगी की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी. इसके पीछे एक वजह यह भी है कि शुरुआती जांच में पाया गया कि इनमें से 162 लोग उस समय आधिकारिक तौर पर जेल में बंद थे.
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि पहली नजर में इन 2,873 लोगों में से 162 लोग हत्या और बलात्कार के मामलों में दोषी ठहराए जा चुके थे और जेल के रिकॉर्ड से पता चलता है कि प्रदर्शन के दौरान वे जेल में बंद थे. सूत्रों ने कहा कि इनमें से करीब एक दर्जन लोग 10 या उससे ज्यादा मामलों में आरोपी बनाए गए थे, जबकि 42 लोगों पर दो या उससे ज्यादा मामलों में आरोप लगाए गए थे.
दिल्ली पुलिस के शुरुआती जांच के नतीजों से परिचित एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “इनमें से कुछ लोग सच में पैरोल, फरलो पर हो सकते हैं या इलाज करा रहे हो सकते हैं, लेकिन इन सभी बातों की गहराई से जांच की ज़रूरत है.”
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से 20 जुलाई को हुई हिंसा की जांच के लिए दर्ज सभी 13 एफआईआर बंद करने की अनुमति मांगी. उस दिन सीजेपी की ओर से बुलाए गए ‘चलो संसद’ मार्च के तहत हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए थे. प्रदर्शन के संबंध में पांच पुलिस थानों में कुल 13 मामले दर्ज किए गए थे—पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पांच, कनॉट प्लेस में पांच और कर्तव्य पथ, बाराखंभा रोड और मंदिर मार्ग थाने में एक-एक मामला.
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन 2,873 हिस्ट्रीशीटरों की मौजूदगी की जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देने की भी मांग की. सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अर्जी में पुलिस ने कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में इन लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं.
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी में कहा, “यह बताया जाता है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के मुताबिक गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोग पहली नजर में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पाए गए. यह पता लगाने के लिए जांच जरूरी है कि इन प्रदर्शनों के दौरान लोगों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े अपराधों में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं.”
पुलिस ने आगे कहा, “दिल्ली पुलिस केवल इन 2,873 लोगों के लिए नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगती है.”
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