नई दिल्ली: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) नेताओं के शिखर सम्मेलन की जो तस्वीरें एक्स पर शेयर कीं, उनमें से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सदस्य देशों के चार अन्य राष्ट्राध्यक्षों को क्रॉप कर दिया गया.
पाकिस्तान ने, कुछ अजीब तरीके से, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को भी तस्वीर से हटा दिया, जबकि तेहरान और वॉशिंगटन, DC के बीच युद्धविराम वार्ता में उनकी अहम भूमिका रही है.
इस्लामाबाद के नजरिए से इस क्रॉप की गई तस्वीर का शायद एकमात्र फायदा यह था कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ फ्रेम के बीच में नज़र आ रहे थे. पोस्ट में लिखा गया, “प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज शरीफ 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट समिट में राष्ट्राध्यक्षों के साथ ग्रुप फोटो में.”
दूसरी ओर, भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पूरी तस्वीर पोस्ट की, जिसमें शरीफ दाईं ओर से चौथे स्थान पर खड़े नज़र आ रहे थे.
PM @narendramodi along with SCO leaders in Bishkek. pic.twitter.com/0VAUpFWpsz
— PMO India (@PMOIndia) September 1, 2026
भारतीयों ने जल्दी ही दोनों तस्वीरों के बीच का अंतर पकड़ लिया.
भारतीय पत्रकार जफर चौधरी ने एक्स पर लिखा, “यह गैर-कूटनीतिक और असभ्य है, पाकिस्तान! अपने प्रधानमंत्री को बीच में दिखाने और उन्हें एक केंद्रीय व्यक्ति के रूप में पेश करने के लिए SCO सदस्य देशों के पांच नेताओं को ग्रुप फोटो से क्रॉप कर दिया गया. प्रधानमंत्री के आधिकारिक हैंडल से ऐसा होना इसे और भी खराब और शर्मनाक बनाता है.”
That’s is undiplomatic and discourteous, Pakistan! Five leaders of the SCO member States cropped out from the group photo to position your Prime Minister in the middle, to give an impression of being a central figure. This coming from Prime Minister’s official handle makes it… https://t.co/8ekb7UQskB pic.twitter.com/3JJ7bZ8FJL
— Zafar Choudhary (@ZafarChoudhary_) September 1, 2026
सोशल मीडिया पर तस्वीरों को लेकर यह सब उस समय हुआ, जब मोदी ने SCO समिट में एक सीधा संदेश दिया और देशों को आतंकवाद को “सरकारी नीति के हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की बात कही. उन्होंने कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को साफ संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंक को किसी के लिए रणनीतिक हथियार नहीं माना जा सकता.
उनका भाषण ऐसे समय आया, जब पाकिस्तान किर्गिज गणराज्य से SCO की अध्यक्षता संभालने वाला है. इसका मतलब है कि अगला नेताओं का शिखर सम्मेलन इस्लामाबाद में होगा.
भारत बार-बार पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को लेकर चिंता जताता रहा है. अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव बढ़ गया था, जब आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 लोगों की हत्या कर दी थी. इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया.
नई दिल्ली ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि पाकिस्तान के SCO की कमान संभालने के बाद भारत इस संगठन में कितनी सक्रियता से हिस्सा लेगा. विदेश सचिव स्तर के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस पर फैसला “उचित समय पर उचित अधिकारी” करेंगे.
SCO की स्थापना को 25 साल पूरे हो चुके हैं. इसकी शुरुआत शंघाई फाइव के रूप में हुई थी, जिसमें चीन, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान शामिल थे. 2001 में संगठन के औपचारिक रूप से बनने के बाद उज्बेकिस्तान इसमें शामिल हुआ. इसके बाद 2017 में भारत और पाकिस्तान जुड़े और बाद में ईरान तथा बेलारूस भी सदस्य बने.
बिश्केक में SCO नेताओं के शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि संगठन ने अपने पहले 25 वर्षों में “मजबूत नींव” तैयार की है और अब उसे ठोस नतीजे देने पर ध्यान देना चाहिए.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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