नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) को संबोधित करते हुए देशों को आतंकवाद को “सरकारी नीति के हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी दी. यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान अगले एक साल के लिए इस संगठन की अध्यक्षता संभालने वाला है.
मोदी ने किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में राष्ट्राध्यक्षों की बैठक के दौरान कहा, “आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है. इसके खिलाफ लड़ाई में हम सिर्फ ‘कार्रवाई-जवाबी कार्रवाई’ की सोच तक सीमित नहीं रह सकते. हमें आतंक के लिए पैसे जुटाने, लोगों की भर्ती, कट्टरपंथ फैलाने और आतंकवादियों को सुरक्षित जगह देने वाली पूरी व्यवस्था को खत्म करना होगा.”
उन्होंने कहा, “हमें एक आवाज़ में यह कहना चाहिए कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं है. जो देश आतंकवाद को सरकारी नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह और मदद देते हैं, उन्हें कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए: आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक हथियार नहीं बन सकता.”
एक संगठन के रूप में SCO की सिर्फ दो स्थायी संस्थाएं हैं—रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर (RATS) और एक सचिवालय. संगठन ने अपनी शुरुआत से ही सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और आतंकवाद से लड़ने पर ध्यान दिया है. पाकिस्तान अब किर्गिस्तान से SCO की अध्यक्षता संभालेगा और अगले साल होने वाले राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन तक अध्यक्ष रहेगा. अगला शिखर सम्मेलन दक्षिण एशियाई देश में होगा.
भारत लंबे समय से पाकिस्तान की सीमा से होने वाले सीमा पार आतंकवादी हमलों का मुद्दा उठाता रहा है. हाल ही में अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद नई दिल्ली ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. इस सैन्य अभियान में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था.
नई दिल्ली ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह पाकिस्तान की अध्यक्षता के दौरान SCO को लेकर किस तरह आगे बढ़ेगा. विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने पिछले हफ्ते कहा था कि इसमें शामिल होने का फैसला “सही समय पर उचित अधिकारी” करेंगे.
प्रधानमंत्री मोदी ने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ भारत के बढ़ते संपर्क पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली “अफगान लोगों के विकास और मानवीय ज़रूरतों में योगदान देती रहेगी.”
मोदी ने कहा, “शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा इच्छा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है. भारत अफगान लोगों के विकास और मानवीय जरूरतों में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा.”
पिछले 18 महीनों में तालिबान सरकार और इस्लामाबाद के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. दोनों देशों की सीमा पर कुछ बार हमले हुए हैं. इस्लामाबाद लगातार काबुल पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है.
भारत ने पिछले अक्टूबर में काबुल में अपने तकनीकी मिशन का दर्जा बढ़ाकर दूतावास के स्तर का कर दिया था. पिछले एक साल में तालिबान सरकार के कई बड़े प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली आए हैं. दोनों पक्ष मौजूदा संपर्क को और मजबूत करने के तरीके तलाश रहे हैं.
इस साल SCO की स्थापना के 25 साल पूरे हुए. इस संगठन की शुरुआत शंघाई फाइव के रूप में हुई थी, जिसमें चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजिकिस्तान शामिल थे. 2001 में संगठन को औपचारिक रूप दिए जाने के समय उज्बेकिस्तान भी इसमें शामिल हुआ. 2017 में भारत और पाकिस्तान संगठन में शामिल हुए. इसके बाद ईरान और बेलारूस को भी इसमें शामिल किया गया.
मोदी ने कहा, “पिछले 25 सालों में SCO ने पूरे यूरेशिया में बातचीत और सहयोग की एक मजबूत परंपरा बनाई है. साथ मिलकर हमने न सिर्फ अपने लोगों की भलाई के लिए, बल्कि पूरी मानवता की प्रगति के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है.”
उन्होंने कहा, “इन 25 सालों में हमने सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है. अब अगले 25 सालों के लिए हमारा लक्ष्य इस सहयोग को ऐसे नतीजों में बदलना होना चाहिए, जो जमीन पर साफ दिखाई दें.”
भारत ने 2023 में SCO की अध्यक्षता की थी. उस समय राष्ट्राध्यक्षों का शिखर सम्मेलन ऑनलाइन हुआ था. इसके एक साल बाद पाकिस्तान ने राष्ट्राध्यक्षों की जगह सरकार के प्रमुखों की बैठक की अध्यक्षता की थी. उस बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस्लामाबाद गए थे.
प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान की दो दिवसीय यात्रा सोमवार को शुरू हुई. इस दौरान उन्होंने कई द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर वी. पुतिन के साथ बैठक शामिल थी. उन्होंने उसी दिन किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की.
भारतीय प्रधानमंत्री ने बिश्केक में छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया. मंगलवार सुबह SCO शिखर सम्मेलन के लिए नेता एक जगह जुटे तो मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन के साथ अनौपचारिक बातचीत की और विचार साझा किए.
मोदी मंगलवार दोपहर बिश्केक से रवाना होंगे और मध्य एशिया की चार दिवसीय यात्रा के बाद भारत लौटेंगे. किर्गिस्तान पहुंचने से पहले मोदी उज्बेकिस्तान के अलग से किए गए द्विपक्षीय दौरे पर थे.
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