नई दिल्ली: नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए बेहद अहम हैं. इन इलाकों पर नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ का असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों ने कहा कि बाढ़ का खतरा अभी बना हुआ है, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत की तरफ नारायणी नदी का पानी खतरनाक स्तर तक नहीं बढ़ा है.
CWC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को दिप्रिंट को बताया कि नेपाल की तरफ से छोड़े जा रहे पानी पर लगातार नज़र रखी जा रही है, ताकि भारत में बाढ़ जैसी स्थिति बनने पर पहले से तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके.
अधिकारी ने कहा, “हम पानी छोड़े जाने के स्तर पर नजर रख रहे हैं और भारत की तरफ नदी के जलस्तर को भी लगातार देख रहे हैं. हम NDRF और राज्य की आपदा प्रबंधन टीमों को रियल टाइम अपडेट दे रहे हैं.”
बुधवार रात 9 बजे CWC ने पहली एडवाइजरी जारी की थी. इसमें नेपाल के फुरके खोला में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की चेतावनी दी गई थी. यह जगह भारतीय सीमा से करीब 160 किमी दूर है. CWC ने कहा था कि यह बढ़ोतरी नेपाल-चीन सीमा के पास अचानक आई बाढ़ की वजह से हो सकती है.
एडवाइजरी में कहा गया था, “बाढ़ का असर नीचे की ओर बहते हुए भारत में गंडक नदी तक पहुंच सकता है.”
हिमालय के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर टूटने से नेपाल में आई बाढ़ के कुछ ही घंटों बाद भारतीय अधिकारियों ने बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी. NDRF के बयानों के अनुसार, राज्य सरकारों को नेपाल सीमा के पास वाले जिलों से लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के निर्देश पहले ही दे दिए गए हैं.
NDRF के इंस्पेक्टर-जनरल नरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा, “हम लगातार यह देख रहे हैं कि नेपाल की बाढ़ का भारत की तरफ क्या असर हो सकता है. हमारे पास पहले से रिजर्व फोर्स मौजूद है, जिसे स्थिति खराब होने पर तैनात किया जा सकता है.”
भारत के लिए अलर्ट क्यों?
विशेषज्ञों ने कहा कि बिहार के पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर तथा उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिले सबसे ज्यादा खतरे में हो सकते हैं.
भारत में बाढ़ के संभावित असर की वजह यह है कि नेपाल की भोटेकोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली का बाढ़ का पानी भारत में आने के बाद नारायणी-गंडक नदी प्रणाली का हिस्सा बन जाता है. इसके बाद यह गंगा नदी में मिलती है, लेकिन वहां इसका असर बहुत ज्यादा होने की संभावना नहीं है.
स्काईमेट वेदर सर्विसेज में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि भारत में बाढ़ का खतरा अभी बना हुआ है, लेकिन सीमा के इस तरफ पहुंचने के बाद नदी का बहाव कम हो रहा है.
CWC के आंकड़ों के अनुसार, वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बुधवार रात 11 बजे 1.50 लाख क्यूसेक से घटकर गुरुवार सुबह 1.04 लाख क्यूसेक हो गई. पलावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश होने का अनुमान भी है, लेकिन इससे नदी के जलस्तर पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है.
पलावत ने कहा, “नेपाल के अधिकारी कल रात से गंडक बैराज से पानी छोड़ रहे हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि जब पानी मैदानी इलाकों में पहुंचता है, तो वह काफी फैल जाता है. इसलिए तेज बाढ़ का खतरा उतना ज्यादा नहीं रहता, जितना पहाड़ी इलाकों में होता है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: नेपाल में 288 भारतीय लापता, चीन में कम से कम 200 भारतीय तीर्थयात्री बाढ़ के बाद फंसे