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Sunday, 30 August, 2026
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‘जाति जनगणना को खराब करने की कोशिश’ :पसमांदा मुस्लिम नेता अली अनवर का BJP पर आरोप

ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के अध्यक्ष अली अनवर अंसारी ने कहा कि 2026 की जाति जनगणना का हश्र भी 2011 की जनगणना जैसा ही हो सकता है, जिसके जाति संबंधी आंकड़े उस रूप में सार्वजनिक नहीं किए गए थे जिसकी कई समूहों को उम्मीद थी.

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नई दिल्ली: ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अंसारी ने रविवार को कहा कि केंद्र की BJP सरकार अपनी “मनुवादी विचारधारा” के तहत इस साल होने वाली जाति जनगणना को खराब करने की कोशिश कर रही है.

रविवार को जारी एक प्रेस रिलीज में अंसारी ने कहा कि पिछले साल जनता के दबाव के बाद केंद्र सरकार जाति जनगणना कराने पर राजी हुई थी. लेकिन इस जनगणना के लिए तैयार की गई “ओपन-एंडेड” यानी खुली प्रश्नावली से लगता है कि इसका भी वही हाल हो सकता है जो 2011 की जनगणना का हुआ था. 2011 की जनगणना का जाति से जुड़ा डेटा उस रूप में सार्वजनिक नहीं किया गया था, जिसकी कई समूहों को उम्मीद थी.

अंसारी ने हिंदी में जारी बयान में कहा, “जाति जनगणना के लिए जिस तरह की ‘ओपन-एंडेड’ प्रश्नावली तैयार की गई है, उससे साबित होता है कि इस बार भी 2011 की जनगणना जैसा ही हाल होगा.”

अंसारी ने आगे मांग की कि केंद्र सरकार को जाति जनगणना बिहार सरकार की ओर से 2022-23 में कराए गए जाति आधारित सर्वे की तरह करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से अलग-अलग जातियों की आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी.

उन्होंने यह भी मांग की कि जाति जनगणना की प्रश्नावली में राज्य सरकारों और केंद्र सरकार, दोनों की ओर से रखी गई आधिकारिक जाति सूचियों को शामिल किया जाए.

अंसारी ने सुझाव दिया कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग से जुड़े सवालों के साथ संबंधित राज्य और केंद्र की जाति सूचियां भी दी जानी चाहिए. इससे लोग मान्यता प्राप्त सूचियों के हिसाब से अपनी जाति का नाम लिख सकेंगे.

उन्होंने कहा, “अगर ऐसा नहीं किया गया, तो पूरी प्रक्रिया में बहुत बड़ी गड़बड़ी हो जाएगी.”

‘आरक्षण विरोधी ताकतें’

अंसारी जाति जनगणना के समर्थक हैं और पसमांदा मुसलमानों के अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात लगातार उठाते रहे हैं. उन्होंने जाति जनगणना कराने के केंद्र सरकार के तरीके को लेकर भी चिंता जताई है.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्षी दलों को कई खुले पत्र लिखे हैं. इन पत्रों में उन्होंने पसमांदा मुसलमानों के कल्याण और विकास की मांग की है.

बयान में कहा गया कि “आरक्षण विरोधी, मनुवादी ताकतें अचानक सक्रिय हो गई हैं” और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा उनके नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं.

बयान में आगे कहा गया कि इन नेताओं ने बताया है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है.

अंसारी ने आगे कहा कि मुसलमानों के बीच भी आरक्षण विरोधी समूह एक जोरदार तरीके से लोगों के बीच यह बात फैला रहे हैं कि जाति वाले कॉलम में अपनी बिरादरी यानी जाति/समुदाय का नाम लिखने के बजाय “मुस्लिम” लिखा जाए.

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने पहली बार 18 दिसंबर 2009 को राज्यसभा में जाति जनगणना का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि पसमांदा मुस्लिम महाज इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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