पटना: दिसंबर 2025 में, पटना के एक पॉश इलाके में ‘हिप हॉप इन द हाउस’ नाम की एक रैप बैटल चल रही थी. बिहार की राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से करीब एक दर्जन रैप आर्टिस्ट पाटलिपुत्र इलाके के ‘स्पोर्ट्स अप टर्फ’ में परफॉर्म करने के लिए जुटे थे. जब शहर के एक लोकल रैपर ने स्टेज संभाला, तो माहौल बदल गया. जैसे ही अरिनार ब्लैक ने अपना अनरिलीज़्ड ट्रैक ‘चेंज’ शुरू किया, अचानक लाइटें बंद कर दी गईं और पुलिस को बुला लिया गया. ‘चेंज’ गाना सरकार की नाकामी और खराब होती अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाता है.
ब्लैक के लिए, इस प्रतिक्रिया ने उनके संगीत की अहमियत साबित कर दी. यह गाना बिहार की आर्थिक तंगी, ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल, सरकार की नाकामी और बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता पर सीधा हमला करता है. गाने की एक लाइन एक साथ नारे और आरोप की तरह लगती है: ‘सरकार फेल होती है लेकिन कॉम्पिटिटिव फायदे के लिए नैरेटिव बिकता है. बिहार, अब बदलाव का समय है.’
पटना में जन्मे 29 साल के हर्ष राज, जिन्हें अरिनार ब्लैक के नाम से जाना जाता है, कोई आम गायक नहीं हैं. वह बिहार की नई आवाज़ हैं. बिहार को अक्सर उसके लोक गीतों या अश्लील भोजपुरी गानों के लिए जाना जाता है, लेकिन उनका काम अपने आसपास की हर चीज़ पर सवाल उठाता है. एमिनेम से प्रेरित यह कलाकार अंग्रेज़ी में रैप करता है, ताकि उसके गाने ज्यादा लोगों तक पहुंच सकें.
ब्लैक ने कहा, “मेरे गाने समाज की सच्चाई दिखाते हैं और अगर वह सच्चाई ही बदसूरत है, तो मैं वही दिखाता हूं.” उन्होंने एक लूज़ काली टी-शर्ट पहनी थी, जिस पर पीले रंग की आग की लपटें बनी थीं और गहरे लाल रंग में ‘वाइल्ड चाइल्ड चेज़िंग यू’ लिखा था.
अरिनार का रैप उस अश्लील और बहुत ज्यादा कमर्शियल भोजपुरी म्यूज़िक इंडस्ट्री से बिल्कुल अलग है, जिसने लंबे समय से राज्य की छवि बनाई है. अगर भोजपुरी की कमर्शियल म्यूज़िक इंडस्ट्री इशारों वाली बातों और वायरल होने के सहारे आगे बढ़ी, तो बिहार का अंडरग्राउंड रैप मूवमेंट खुद को एक सांस्कृतिक विद्रोह के रूप में पेश कर रहा है, जो ज्यादा गंभीर, ज्यादा गुस्से वाला और दिखावे के बजाय सामाजिक मुद्दों पर आधारित है.
राज्य के उभरते हिप-हॉप सीन में, ब्लैक और मेरियो जैसे रैपर इस फॉर्मेट का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि विरोध और अपनी बात रखने के लिए कर रहे हैं. बिहार का हिप-हॉप असली ज़िंदगी की सच्चाइयों को सामने ला रहा है — जैसे पलायन, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, गरीबी और लंबे समय से स्टीरियोटाइप में फंसे राज्य की निराशा. कोशिश यह है कि एक ग्लोबल म्यूज़िक फॉर्मेट के भीतर एक असली बिहारी आवाज़ बनाई जाए.
टुपैक, एमिनेम और नैश जैसे अमेरिकी रैप स्टार्स से प्रेरित होकर, अरिनार ब्लैक हिंदी भाषी इलाके में इंग्लिश रैप लाकर नई पहचान बना रहे हैं. और वह इस बदलाव को पूरी तरह अपना रहे हैं. उनके इंस्टाग्राम बायो में लिखा है — ‘इंडियन हिप-हॉप को नए सिरे से परिभाषित करना.’
ब्लैक ने कहा, “हमारे लिए हिप-हॉप अब सिर्फ परफॉर्मेंस नहीं है. यह विरोध, पहचान, कड़वी सच्चाइयों को बताने और एक ऐसे राज्य की खोई हुई पहचान वापस पाने का ज़रिया बन रहा है, जिसे लंबे समय तक रूढ़िवादी धारणाओं में बांधकर रखा गया है.” वह व्यस्त बोरिंग कैनाल रोड पर अपने दोस्त के घर के एक छोटे से कमरे में बैठे थे, जो उनका स्टूडियो भी है.

ब्लैक ने कहा कि बिहार के गानों में हमेशा से असलियत की कमी रही है और वह इसी को बदलना चाहते हैं.
ब्लैक ने कहा, “लोगों को रैप के जरिए बिहार की सामाजिक स्थिति के बारे में कभी पता नहीं चला. यह बिल्कुल नया तरह का म्यूज़िक है, जो लोगों को हमसे जोड़ता है.”
गाने की थीम
पिछले छह महीनों में, ब्लैक ने चार गाने रिलीज़ किए हैं – Degrade, Madness, Change और Jagao. यूट्यूब पर इन गानों को ज़्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन इंस्टाग्राम पर इन्हें लाखों बार देखा गया. असल में, ब्लैक के दर्शक इंस्टाग्राम पर ही हैं.
पिछले साल, राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान Jagao गाना रिलीज़ हुआ था. पटना की सड़कों पर शूट किए गए इस रैप गाने में जो इंस्टाग्राम पर ब्लैक का सबसे ज़्यादा देखा जाने वाला ट्रैक है, बेरोज़गारी, ईएमआई, नौकरी का दबाव और युवाओं में निराशा जैसे मुद्दों पर बात की गई है.
यह गाना ब्लैक और उनके साथी मेरियो ने लिखा था. मेरियो भी पटना के एक रैपर हैं, जिन्हें स्थानीय लोग ‘रैपर चाय वाला’ के नाम से जानते हैं.
“…बिहार ज़िंदा रहने के लिए लड़ता रहेगा…आवाज़ उठाओ, जनता को जगाओ” – यह इस गाने के बोल हैं, जिसे इंस्टाग्राम पर अब तक 27 लाख बार देखा जा चुका है.
ब्लैक कहते हैं, “मैं कभी बैठकर यह तय नहीं करता कि गाने के बोल लिखने हैं. यह सब अपने-आप होता है. विचार कहीं से भी आ सकते हैं, बस उन्हें सही समय पर पकड़ना होता है. विचार किसी एक की बपौती नहीं होते.”
ब्लैक के म्यूज़िक प्रोड्यूसर आदित्य प्रकाश का कहना है कि ये गाने बिहार के बाहर रहने वाले लोगों को भी पसंद आते हैं.
प्रकाश कहते हैं, “एक प्रोड्यूसर के तौर पर मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं बोल के हिसाब से म्यूज़िक तैयार करूं – उसमें उथल-पुथल, आक्रामकता और दर्द जैसे भाव डालूं ताकि एक खास भावना उभरकर सामने आए.”

एक कमरे का स्टूडियो
बोरिंग कैनाल रोड पर सबसे ऊपर वाली मंज़िल का कमरा आदित्य प्रकाश का है, जिसे उन्होंने रिकॉर्डिंग स्टूडियो में बदल दिया है. यहां का सेटअप बहुत साधारण है – एक पुराना एचपी लैपटॉप, जो एमपीके मिनी कीबोर्ड के बगल में रखा है, टेप से जुड़े दो स्पीकर, और माइक स्टैंड से लटके हेडफोन. यहीं पर ब्लैक अपने ज़्यादातर गाने रिकॉर्ड करते हैं.
गाने Studio One पर बनाए जाते हैं, जो एक ओपन-सोर्स फ्री सॉफ्टवेयर है. पिछले आठ सालों में उन्होंने और ब्लैक ने मिलकर लगभग 30 गाने बनाए हैं, हालांकि अब तक सिर्फ चार ही रिलीज़ हुए हैं. दोनों की योजना अगले 12 महीनों में और गाने रिलीज़ करने की है.

उनके लिए, कोई भी दो गाने एक ही तरह से नहीं बनते.
प्रकाश ने कहा, “कभी-कभी मैं पहले म्यूज़िक बनाता हूं और अरिनार उसके हिसाब से बोल लिखते हैं. कभी-कभी वह शब्द लेकर आते हैं और हम बाद में धुन बनाते हैं.” बैकग्राउंड में ब्लैक का एक गाना धीरे-धीरे बज रहा था.
ब्लैक बिस्तर पर पालथी मारकर बैठे थे और हाथ से लिखे बोल वाली नोटबुक के पन्ने पलट रहे थे. लगभग हर पन्ने पर काटी गई लाइनें, दोबारा लिखी गई पंक्तियां और जल्दी-जल्दी लिखे गए विचार भरे हुए थे – यह सब उनके गाने लिखने के सावधानी भरे तरीके का सबूत था.
हालांकि, सस्ती टेक्नोलॉजी की वजह से रैपर के लिए ऑडियो रिकॉर्ड करना काफी आसान हो गया है, लेकिन वीडियो शूट करना अभी भी एक चुनौती है.
इस साल की शुरुआत में, ब्लैक और उनकी छोटी सी टीम ने अप्रैल में रिलीज़ हुए गाने Madness का वीडियो शूट करने के लिए जहानाबाद के जगदीशपुर गांव का दौरा किया. उन्होंने वहां तीन दिन बहुत कम साजो-सामान और उससे भी कम बजट में बिताए. वीडियो में दिखने वाले ज़्यादातर लोग रिश्तेदार या दोस्त हैं, जो क्रू की मदद कर रहे थे. यह गाना राज्य में शराबबंदी और भ्रष्टाचार की आलोचना करता है और उन वजहों को बताता है जिनकी वजह से राज्य उपेक्षित रहा है.
ब्लैक ने हंसते हुए कहा, “सब कुछ जुगाड़ से हुआ. हम पटना के बाहर शूट करने का खर्च नहीं उठा सकते. छोटे शहरों के कलाकारों की यही सच्चाई है, भले ही लोग आपके काम की तारीफ करें.”
फिर भी, उनका कहना है कि सीमाओं ने उन्हें कभी भी रचनात्मक प्रयोग करने से नहीं रोका.
यह रचनात्मकता खास तौर पर ‘Change’ गाने में दिखती है, जो तीन मिनट का रैप है और जिसमें राजनीतिक टिप्पणी भी शामिल है. गाने की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की संसद में दी गई एक क्लिप से होती है, जिसमें वे बात कर रहे हैं कि कैसे भारत के साथ आज़ाद हुए देश आगे बढ़ गए, जबकि भारत पीछे रह गया.
ब्लैक ने कहा कि यह भाषण जान-बूझकर इस्तेमाल किया गया था.
“हमारा गाना जो संदेश देना चाहता था, वाजपेयी ने उसके लिए पहले ही माहौल बना दिया था.”
इसके बाद गाने के बोल आर्थिक तंगी, सांप्रदायिक राजनीति और असमानता की तीखी आलोचना करते हैं. एक लाइन है: “खस्ताहाल अर्थव्यवस्था खबरों में छाई है और अगर मेरी पहचान एक गाली है, तो ज़मीन पर आओ और दुख के रंग और सरकार की सुनियोजित दादागिरी देखो. ये खून चूसने वाली जोंकें धोखेबाज़ी करती हैं… ‘बांटो और राज करो’ इनकी एक नीति है, ये डर फैलाकर और हर धर्म को असहिष्णु बनाकर आपसी भाईचारे को बिगाड़ती हैं.”
प्रकाश के अनुसार, यही ईमानदारी सुनने वालों को ब्लैक के संगीत की ओर खींचती है.
प्रकाश ने कहा, “और चूंकि हम बिहार से हैं, इसलिए हमारे संगीत में वह बिहारीपन अपने-आप आ जाता है. यह हमारी अपनी पहचान का हिस्सा है.”
सोशल मीडिया पर उनके गानों के नीचे कमेंट सेक्शन “गर्दा”, “बवाल” और “बिहार बैंगर” जैसे शब्दों से भरा रहता है.
इंस्टाग्राम पर ‘जगाओ’ गाने के नीचे, एक सुनने वाले ने लिखा: “क्या हम सस्ते भोजपुरी गानों के बजाय इसे प्रमोट कर सकते हैं?” एक और व्यक्ति ने लिखा: “कलाकार का सम्मान है, अरिनार ब्लैक ट्रेंड्स के पीछे नहीं भाग रहे हैं, बल्कि अपना अलग रास्ता बना रहे हैं.”
अपने अनुभवों से बनी पहचान
ब्लैक ने कभी रैपर बनने के बारे में नहीं सोचा था. उनका बचपन उतार-चढ़ाव भरा रहा – परिवार में झगड़े, ज़मीन-जायदाद के विवाद और आर्थिक अनिश्चितता. कई सालों बाद, यही यादें उनके संगीत का आधार बनीं.
ब्लैक ने कहा, “मैंने अपने घर में जो माहौल देखा और अब जब मैं अपने बचपन को याद करता हूं, तो मुझे लगता है कि उन्हीं घटनाओं ने मुझे ऐसा बनाया है.”
फिर भी, इस उथल-पुथल के बीच कुछ ऐसे संकेत थे, जिनसे पता चलता था कि वह शायद कोई अलग रास्ता चुनेंगे. जहां ज़्यादातर परिवार अपने बच्चों को सुरक्षित करियर की ओर धकेलते थे, वहीं ब्लैक के कुछ रिश्तेदारों ने अलग तरह के पेशे चुने. उनके चाचा नुक्कड़ नाटक करते थे और रेडियो स्टेशनों पर काम करते थे.
उन्होंने याद करते हुए कहा, “उन्हें देखकर मुझे हमेशा लगता था कि मैं कोई आम नौकरी नहीं करूंगा.”

उनकी ज़िंदगी में बड़ा मोड़ तब आया, जब केंद्रीय विद्यालय में 10वीं कक्षा के दौरान एक स्कूल दोस्त ने उन्हें वेस्टर्न म्यूज़िक से परिचित कराया. इससे उनके सामने एक बिल्कुल नई दुनिया खुल गई.
उन्होंने हंसते हुए कहा, “कभी-कभी हम सिर्फ वेस्टर्न म्यूज़िक सुनने के लिए क्लास बंक कर देते थे. यह जादुई था. उस समय हम बॉलीवुड गानों से पूरी तरह ऊब चुके थे.”
फिर एक ऐसा पल आया जिसने सब कुछ बदल दिया. एक दिन, उनके दोस्त ने फ्री ऑडियो-एडिटिंग सॉफ्टवेयर ‘Audacity’ और यूट्यूब से डाउनलोड की गई बीट का इस्तेमाल करके ‘Tell Me Why’ नाम का एक गाना बनाया. ब्लैक हैरान रह गए.
उन्होंने कहा, “तब मुझे संगीत के बारे में कुछ नहीं पता था. लेकिन जब मैंने उसे सुना, तो मुझे लगा कि मैं भी ऐसा कर सकता हूं.”
जल्द ही उन्होंने अपना पहला गाना ‘A New Game’ लिखा और रिकॉर्ड किया.
एमिनेम के फैन
दुनिया भर के अनगिनत रैपर्स की तरह, ब्लैक भी एमिनेम को अपना आदर्श मानते हैं. उनके स्टेज नाम में भी उनके हीरो की झलक मिलती है. उन्होंने ‘हर्ष’ और ‘राज’ से ‘AR’ अक्षर लिए, बीच में ‘IN’ जोड़ा – जो एमिनेम के नाम से प्रेरित था और ‘Arinar’ नाम बनाया. वहीं ‘Black’ नाम रखने के पीछे उनका मकसद “अश्वेत लोगों को सम्मान देना था, क्योंकि यह संगीत मुख्य रूप से उन्हीं का है.”
ब्लैक ने कहा, “वह मेरे गॉड हैं. सालों तक मैंने उनके स्टाइल और बोलने के अंदाज़ की नकल की. मेरे आस-पास के लोग कहते थे, ‘ये तो एमिनेम बन गया है’.”
आखिरकार, उन्हें एहसास हुआ कि नकल करने की भी एक सीमा होती है.
अपनी खुद की आवाज़ खोजने के लिए, ब्लैक ने लगभग चार साल तक एमिनेम को सुनना पूरी तरह बंद कर दिया. इसके बजाय, उन्होंने खुद को ऑनलाइन रैप कम्युनिटीज़ में शामिल किया और 2012 के आसपास फेसबुक रैप बैटल्स में हिस्सा लेना शुरू किया.
घर पर इंटरनेट की सीमित सुविधा के कारण, वह दिन में सात से आठ घंटे लोकल साइबर कैफे में बिताते थे, जहां वह गानों के बोल लिखते थे और देश भर के रैपर्स के साथ मुकाबला करते थे.

दिन में पत्रकार
महामारी ने ब्लैक के परिवार पर बुरा असर डाला. उनके पिता की प्राइवेट सेक्टर में सेल्स की नौकरी चली गई, जिससे ब्लैक को काम ढूंढना पड़ा और परिवार को सहारा देना पड़ा. अगले दो साल तक उन्होंने पटना के लोकल डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म ‘पटना बीट्स’ के लिए काम किया और साथ ही संगीत भी बनाते रहे.
इस दौरान ज़्यादातर समय उनके माता-पिता को यह पता नहीं था कि वह रैप को कितनी गंभीरता से ले रहे थे.
बिहार के कई युवाओं की तरह, पटना के बी.एन. कॉलेज से सोशियोलॉजी में ग्रेजुएट ब्लैक ने भी ‘सुरक्षित रास्ता’ अपनाने की कोशिश की — सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करना. 2019 में करीब सात महीने तक, उनका दिन बैंकिंग परीक्षाओं के लिए शॉर्टकट, फॉर्मूले और प्रैक्टिस पेपर्स के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा.
उन्होंने कहा, “मुझे इसमें मज़ा नहीं आ रहा था.”
फिलहाल, ब्लैक पटना के न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म ‘जानो जंक्शन’ में पत्रकार के तौर पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता से घर का खर्च तो चलता ही है, साथ ही इससे उनके संगीत को भी बढ़ावा मिलता है.
उन्होंने कहा, “यह नौकरी मुझे दुनिया में हो रही घटनाओं से अपडेट रखती है. जब मैं गाने के बोल लिखता हूं तो इससे मदद मिलती है.”
उन्होंने यह भी बताया कि अपनी कला को बेहतर बनाने के लिए वह किताबें भी पढ़ते हैं. हाल ही में, उन्होंने पॉल एडवर्ड की किताब ‘हाउ टू रैप: द आर्ट एंड साइंस ऑफ द हिप-हॉप एमसी’ पढ़ी. यह किताब 104 मशहूर रैपर्स के इंटरव्यू पर आधारित है, जिसमें वे बताते हैं कि वे अपने गाने के बोल कैसे लिखते और गाते हैं.
ब्लैक ने कहा, “इस किताब से मुझे रैपर्स के सफर के बारे में जानने में मदद मिली. ज़्यादातर रैपर्स मिडिल क्लास परिवारों से आते हैं.”
पटना के ही एक और आर्टिस्ट मेरियो, जो मुसल्लहपुर हाट रोड पर ‘रैपर चाय वाला’ नाम से चाय की दुकान चलाते हैं, ने बताया कि कैसे ब्लैक ने राज्य में रैप का माहौल बदल दिया.
मेरियो ने कहा, “अरिनार ब्लैक ने इंग्लिश रैप को ऐसे पेश किया, जिसकी बिहार से किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी. उन्होंने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया.”
उन्होंने कहा, “उनके गाने के बोल बहुत गहरे और सोच-समझकर लिखे गए होते हैं. उनमें समाज की गहरी समझ दिखती है.”
ब्लैक की तरह, मेरियो को भी अमेरिकन हिप-हॉप से प्रेरणा मिली. उन्हें याद है कि वे अमेरिकन लेजेंड टुपैक शकूर का गाना ‘कैलिफ़ोर्निया लव’ बार-बार सुनते थे — और इस बात से बहुत प्रभावित होते थे कि रैपर ने अपने आसपास की चीज़ों को कितनी गहराई से दिखाया है.
मेरियो के लिए, इसका मतलब था बिहार की असलियत पर ध्यान देना.
उन्होंने कहा, “क्योंकि मैं बिहार से हूं, इसलिए यहां की समस्याओं को बेहतर समझता हूं. इसीलिए मैंने ‘जनता को जगाओ’ गाना लिखा. हम सच में समाज को जगाना चाहते हैं.”
उन्होंने अपनी निराशा जताते हुए कहा, “अफसोस की बात है कि जनता अभी भी सोई हुई है.”
‘अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल’
भारत में रैप का चलन अभी बढ़ रहा है. यह कला असलियत के ज़्यादा करीब है और कुछ लोगों को असहज कर देती है. इससे जुड़े खतरे सिर्फ कल्पना नहीं हैं. इस साल की शुरुआत में, हरियाणवी रैपर धंधा न्योलीवाला अपने एल्बम ‘वोमिट ऑन पेपर’ की एक लाइन को लेकर विवादों में घिर गए थे. लोगों का विरोध इतना ज़बरदस्त था कि उन्हें गाने के बोल बदलने पड़े.
‘वोमिट ऑन पेपर’ गाने की एक लाइन है: “अगर मेरे राम ने गेरुआ न पहना होता, तो कसम से मैंने कई ढोंगी बाबाओं की धुलाई कर दी होती. वे पर्चियां बनाते हैं और अर्जियां दाखिल करते हैं, जहां चाहें वहां प्राइवेट जेट से जाते हैं.”
ब्लैक सिस्टम पर सवाल उठाने से जुड़े खतरों को समझते हैं. ‘चेंज’ गाने में, वे बिहार की शराबबंदी नीति पर सवाल उठाते हैं और अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले भेदभाव की बात करते हैं.
ब्लैक ने कहा, “हम लोगों को जागरूक करने के लिए अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी का इस्तेमाल कर रहे हैं.”
ब्लैक के लिए, रैप सिर्फ शोहरत या वायरल होने का ज़रिया नहीं है. वे कलाकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच फर्क करते हैं और कहते हैं कि कला के पीछे एक इरादा, मकसद और साफ नज़रिया होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इन उसूलों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
ब्लैक ने कहा, “अगर कोई किसी को खुश करने के लिए इनसे समझौता करता है, तो वह कलाकार नहीं है. तब वह सिर्फ एक कंटेंट क्रिएटर है और उसे व्यूज़ मिलते हैं. कला वही है जो सिस्टम को असहज करे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: बलिराजगढ़ में चौथी बार खुदाई कर रहा है ASI, प्राचीन बिहार के इतिहास पर क्यों है मोदी सरकार की नज़र