नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने 2010 में लक्ष्मण अहिरवार की आत्महत्या के मामले में राखी सावंत के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है.
यह वारंट सावंत के बार-बार अदालत में पेश नहीं होने के बाद जारी किया गया.
अहिरवार अपने वैवाहिक विवाद पर बात करने के लिए सावंत के रियलिटी टीवी शो ‘राखी का इंसाफ’ (2010) में आए थे.
इस शो का सिर्फ एक सीजन और 16 एपिसोड थे, जो पहले Imagine TV पर हर हफ्ते प्रसारित होते थे. ‘द जेरी स्प्रिंगर शो’ (1991-2018) जैसे पश्चिमी शो की तर्ज पर बनाए गए ‘राखी का इंसाफ’ में निजी, सामाजिक और वैवाहिक विवादों को लेकर सावंत के सामने लोगों का आमना-सामना और लाइव तरीके से विवादों का समाधान दिखाया जाता था.
एक एपिसोड के दौरान अहिरवार अपनी पत्नी अनिता के साथ शो में आए थे.
लक्ष्मण अहिरवार का मामला क्या था?
अहिरवार ने फरवरी 2010 में अनिता से शादी की थी, लेकिन जल्द ही दोनों के बीच वैवाहिक समस्याएं शुरू हो गईं. दोनों के बीच मतभेद के बाद अनिता अपने मायके लौट गईं.
अपने विवाद को सुलझाने की कोशिश में यह दंपति राखी सावंत के सामने आया. यह एपिसोड 23 अक्टूबर 2010 को प्रसारित हुआ था.
अहिरवार की मां सावित्री की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, सावंत ने एपिसोड के दौरान उनके बेटे का अपमान किया और उसे “नामर्द” कहा.
उनके परिवार ने कहा कि पत्नी और राष्ट्रीय टेलीविजन पर अपमानित होने से वह बहुत परेशान हो गया था. उनका दावा था कि इस बयान से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और घर लौटने के बाद वह इस अपमान से उबरने के लिए संघर्ष करता रहा.
अहिरवार ने नवंबर 2010 में आत्महत्या कर ली. यह कार्यक्रम प्रसारित होने के कुछ ही हफ्तों बाद हुआ.
हालांकि, नवंबर 2010 में झांसी पुलिस अधिकारियों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि अहिरवार की मौत तेज बुखार से हुई थी और इसके बावजूद उसकी मां के आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया था.
अहिरवार की मौत और शो में उनकी मौजूदगी के बीच संबंध अभी अदालतों द्वारा तय किया जाना बाकी है.
16 साल बाद मामला फिर क्यों सामने आया?
जिला सरकारी वकील (क्राइम) मृदुल कांत श्रीवास्तव ने 17 अक्टूबर को पीटीआई को बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने सावंत के बार-बार कोर्ट में पेश नहीं होने के बाद गैर-जमानती वारंट जारी किया.
अगली सुनवाई 1 दिसंबर को तय की गई है.
गैर-जमानती वारंट पुलिस को उसमें नाम दिए गए व्यक्ति को गिरफ्तार करके अदालत में पेश करने का अधिकार देता है. इसका यह मतलब नहीं है कि कानूनी तौर पर जमानत संभव नहीं है. आरोपी न्यायिक प्रक्रिया के जरिए उचित राहत मांग सकता है.
सावंत के लिए तुरंत चिंता यह है कि अगर वह वारंट वापस लेने या अदालत से राहत पाने में सफल नहीं होती हैं, तो वारंट पर कार्रवाई की जा सकती है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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