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Friday, 16 October, 2026
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‘हम चुप क्यों हैं’—इमरान खान ने 2009 के एक वीडियो में भारतीयों से वोट देने की अपील की थी

टाइम्स ऑफ इंडिया का पुराना कैंपेन फिर चर्चा में है. इसमें इमरान खान के साथ अभिषेक बच्चन, करण जौहर, प्रियंका चोपड़ा और बॉलीवुड के दूसरे सितारे भी दिखे थे. उन्होंने जवाबदेही तय करने, चुनाव और नागरिकों की भागीदारी की मांग की थी.

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नई दिल्ली: एक वक्त ऐसा था, जब सिर्फ इमरान खान ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड के ज्यादातर लोग निष्पक्ष चुनाव और वोट देने के अधिकार के बारे में खुलकर बोल रहे थे.

2009 में इमरान खान ने बॉलीवुड के दूसरे बड़े सितारों के साथ लोगों से वोट देने की अपील की थी. इसके करीब दो दशक बाद, 2026 में 10 अक्टूबर को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा है. उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही यह पुराना कैंपेन सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में आ गया है.

यह जागरूकता फैलाने वाला विज्ञापन टाइम्स ऑफ इंडिया के एक कैंपेन का हिस्सा था. इसका नाम था—“इस देश का कुछ नहीं हो सकता.”

इस विज्ञापन में इमरान खान, रणबीर कपूर, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन, फरहान अख्तर और करण जौहर नज़र आए थे. इसका मकसद देश के कुछ बड़े मुद्दों को सामने लाना था. इनमें प्रदूषण, आपराधिक मामलों वाले नेता, पुलिस में भ्रष्टाचार, कमजोर और असहाय लोगों के खिलाफ अत्याचार और धार्मिक समुदायों के बीच हिंसा जैसे मुद्दे शामिल थे.

विज्ञापन के आखिर में सभी कलाकार एक साथ कहते हैं, “इस देश का कुछ नहीं हो सकता.”

आज जब ज्यादातर बॉलीवुड सितारों ने चल रहे प्रदर्शनों पर चुप्पी साध रखी है, वहीं इमरान खान इस प्रदर्शन में शामिल हुए हैं. 2009 के विज्ञापन में प्रियंका चोपड़ा प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों के बारे में बात शुरू करती हैं और इमरान खान उनकी बात को आगे बढ़ाते हैं.

प्रियंका चोपड़ा कहती हैं, “प्रदूषण की वजह से हज़ारों बच्चों की जान चली जाती है, लेकिन…” इसके बाद इमरान खान सवाल करते हैं, “…इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता. क्यों?”

2009 के इस जागरूकता कैंपेन में इमरान खान ने बताया था कि अखबार बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अत्याचार की खबरों से भरे रहते हैं. फरहान अख्तर के साथ उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि जब खिलाड़ियों और फिल्मी सितारों के बीच धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होता, तो लोग इसका जश्न मनाते हैं, लेकिन जब नेता धर्म के नाम पर उन्हें भड़काते हैं, तो वही लोग दूसरों की जान लेने के लिए तैयार हो जाते हैं.

वीडियो में आगे अभिषेक बच्चन बताते हैं कि सरकार में मंत्री पद पर बैठे कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. इसके बाद फिल्म निर्माता करण जौहर बताते हैं कि कहीं कोई पुलिस अधिकारी रिश्वत ले रहा है.

इसके बाद सभी कलाकार एक साथ सवाल करते हैं, “और हम चुपचाप खड़े हैं. क्यों?”

लेकिन इस बार प्रदर्शन या चुनावों की अहमियत को लेकर बहुत कम फिल्मी सितारों ने अपनी बात रखी है.

इमरान खान के खिलाफ मामला

इमरान खान के पास ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड है. यह कार्ड भारतीय मूल के लोगों को भारत आने और यहां रहने की अनुमति देता है. हालांकि, इससे उन्हें वोट देने या चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं मिलता.

10 अक्टूबर को इमरान खान ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. इस दौरान मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था. गुरुवार को पुलिस ने अभिनेता को 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया.

पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इमरान खान विदेशी नागरिक हैं और उन्होंने एक राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.

अधिकारी ने कहा, “इमरान खान के पास विदेशी नागरिकता है और वह भारतीय नागरिक नहीं हैं. विदेशियों और आव्रजन से जुड़े कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत विदेशी नागरिकों को भारत की जमीन पर राजनीतिक प्रदर्शन या राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं है.”

अधिकारी ने यह भी बताया कि इमरान खान को देश छोड़ने का औपचारिक नोटिस दे दिया गया है.

यह कार्रवाई बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया की शिकायत के बाद की गई. उन्होंने मुंबई पुलिस से इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी. उनका कहना था कि अमेरिकी नागरिकता और ओसीआई कार्ड होने के बावजूद इमरान खान ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था.

गामदेवी पुलिस थाने ने यह शिकायत विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) को भेज दी थी. इसके बाद एफआरआरओ ने इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस जारी किया.

10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए प्रदर्शन के दौरान भी इमरान खान को हिरासत में लिया गया था. इस प्रदर्शन में लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे.

प्रदर्शन के दौरान इमरान खान ने कहा था, “मेरी कोई मांग नहीं है. मैं यहां एक नागरिक के तौर पर आया हूं, एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो इस शहर में रहता है. मैं यह देखने आया हूं कि लोगों के आने-जाने की आज़ादी पर रोक क्यों लगाई जा रही है और लोगों की आवाज क्यों दबाई जा रही है.”

हालांकि, इमरान खान इस नोटिस को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं.

उनके वकीलों ने कहा, “हम एफआरआरओ के नोटिस के खिलाफ याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं.”

उन्होंने बताया कि याचिका शुक्रवार या सोमवार तक दर्ज हो सकती है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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