दिल्ली-एनसीआर की हाउसिंग सोसाइटियों में सालों तक चुनाव नहीं होते, या फिर वही चेहरे बार-बार लौट आते हैं. ‘खुद को चुना हुआ मानने वाले लोग हमारी सेवा करना छोड़ देते हैं और अपनी सेवा करने लगते हैं.’
एमसी कूपर मलयालम रैप की तुलना लेखक वैकोम बशीर की लिखाई से करते हैं. ‘राज्य को रैप जैसे और सांस्कृतिक सहारे चाहिए, जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखें.’
रूस की क्रांति से भारत की राजनीति तक, कम्युनिज्म ने शोषण-मुक्त समाज का सपना दिखाया. सौ साल बाद वही विचारधारा क्यों बौद्धिक म्यूजियम की वस्तु बन चुकी है.
भारत का पहला ऐसा मॉल जो पूरी तरह हस्तशिल्प को समर्पित है—‘द कुंज’—अपने नेहरू युग के समकक्ष जनपथ स्थित कॉटेज एम्पोरियम से ज़्यादा पास के भव्य DLF एम्पोरियो जैसा है.
उद्धव और राज ठाकरे ने बीएमसी चुनावों के लिए चुनावी गठबंधन बनाया है, हम उस परिवार पर एक नज़र डाल रहे हैं, जिसने दशकों तक मुंबई की राजनीति पर दबदबा बनाया, लेकिन अब अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है.
ताकतवर लोगों या किसी खास विचारधारा की सेवा करने वालों के लिए नया नियम यह है: तो क्या हुआ अगर आप दोषी पाए गए और जेल भेजे गए? हम आपको तुरंत बाहर निकलवा लेंगे.
धर्मेंद्र प्रधान से लेकर भूपेंद्र यादव और शिवराज सिंह चौहान तक, जब पार्टी के टॉप पद के लिए किसी ऑर्गनाइज़ेशनल व्यक्ति को चुनने की बात आई, तो पीएम नरेंद्र मोदी के पास कई विकल्प थे.
राजनीतिक क्षेत्र में गीता के फिर से पॉपुलर होने की वजह क्या है? क्या यह राजनीतिक लामबंदी के लिए इसे आगे बढ़ाने की सोची-समझी कोशिश है, या यह अपने आप हो रहा है? आधुनिक भारतीय इतिहास में इसके राजनीतिक सफर पर एक नज़र.
अगले वीकेंड तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार बन जाएगी. यह भारत के लिए मौका है कि वह चुनाव वाले पश्चिम बंगाल और असम में ‘घुसपैठिया’ वाली भाषा को नरम करके बिगड़े रिश्तों को फिर से ठीक करे.