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Monday, 2 March, 2026
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अखलाक लिंचिंग के 10 साल बाद—गांव में राजनीति भी बदली, खेल के मैदान भी

अखलाक केस कभी भी बिसाड़ा गांव की तंग गलियों से बाहर नहीं गया. यहां उसकी हत्या और बीफ की अफवाहों की बातें आज भी ताज़ा हैं, लेकिन किसी को भी नहीं पता कि जांच कहां पहुंची है.

बिहार चुनाव नतीजे असम, बंगाल, तमिलनाडु और केरल में BJP की संभावनाओं के बारे में क्या बताते हैं

एनडीए का बहुत बड़ा सामाजिक गठबंधन था, जिसमें अत्यंत पिछड़े वर्ग, गैर-यादव ओबीसी, दलित, ऊंची जातियां शामिल थीं, जिन्होंने बिहार में भारी जीत दिलाई.

मोदी सरकार के सीड्स बिल 2025 को पंजाब के किसानों के लिए क्या देना चाहिए

ड्राफ्ट सीड्स बिल में बड़े आइडिया सही हैं — यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन, ट्रेसबिलिटी, असली पेनल्टी. पंजाब के लिए काम तभी बनेगा जब इसमें फेडरल सिस्टम और किसान-हित से जुड़े बारीक मुद्दे ठीक से तय हों.

कैसे नीतीश कुमार ने वोटर व्यवहार के सारे नियम उलट दिए

आम धारणा यह है कि अगर कोई सरकार लोगों की हालत नहीं सुधारती, तो उसे सज़ा मिलती है, लेकिन नीतीश कुमार ने 20 साल में आर्थिक बदहाली के बीच सरकार चलाई और फिर भी भारी बहुमत से जीत गए.

ज़ोहरान ममदानी की न्यूयॉर्क जीत ने याद दिलाई गुजराती मुस्लिमों की भूली-बिसरी कहानी

मुगल दौर के बंदरगाहों से लेकर डचों से हुए समुद्री युद्धों और बॉम्बे के व्यापारी घरानों तक — गुजराती मुस्लिमों ने कभी हिंद महासागर की दुनिया को आकार दिया था, बहुत पहले, जब उनके एक वंशज ने न्यूयॉर्क जीता.

बिहार चुनाव में महिलाओं की वोटिंग अब तक की सबसे ज्यादा क्यों रही

इस विधानसभा चुनाव में बिहार में महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड तोड़ रही — 71.6 फीसदी जो 1962 के बाद सबसे ज्यादा है.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स में डर — ‘हो सकता है कोई और इसमें शामिल व्यक्ति अब भी अंदर हो’

यूनिवर्सिटी में काम करने वाले एक डॉक्टर ने कहा, ‘अभी एडमिशन का टाइम है, अगर यूनिवर्सिटी की छवि खराब हुई तो एडमिशन पर असर पड़ेगा. हम जांच एजेंसियों की मदद कर रहे हैं.’

कैसे ‘मोहब्बत की नदी’ से चिनाब बन गई बेचैन टिक-टिक करता टाइम बम

चिनाब नदी के किनारे रहने वाले 23 साल के एक युवक ने कहा, ‘अगर हम इसकी धार को यूं ही समेटते रहे, तो ये ज़रूर हमारे घरों में घुस आएगी. इसे गुस्सैल नदी कैसे कह सकते हैं, इसमें नदी की गलती तो नहीं है.’

मिशन त्रिशूल से मोहन भागवत की यात्राओं तक: बिहार में क्या खोज रहा है RSS?

मंडल की राजनीति ने पिछड़ों, दलितों और अति पिछड़ों की पहचान को राजनीतिक चेतना में बदल दिया है. ऐसे में, RSS का एकीकृत हिंदू समाज का विचार उस विविधता से टकराता है जो बिहार की राजनीति की आत्मा है.

BJP की एकरूपता वाली नीति ठीक नहीं है. लद्दाख दिखाता है कि संघवाद हमारी लोकतंत्र की असली नींव है

बीजेपी के बहुसंख्यकवादी और एकरूपता वाले एजेंडा, जैसे ‘वन नेशन, वन पीपल, वन कल्चर’, क्षेत्रीय पहचानों के लिए खतरा पैदा करते हैं.

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होली आपसी सद्भाव, प्रेम और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वांत रंजन

लखनऊ, एक मार्च (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने रविवार को कहा कि होली केवल रंगों का...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.