रिया चक्रवर्ती की मज़बूती सच्ची है, लेकिन बर्बादी भी उतना ही बड़ी सच्चाई है. हो सकता है उन्होंने इस सब से समझौता कर लिया हो, लेकिन उनकी ज़िंदगी उनसे छीन ली गई.
एक गलत औपनिवेशिक चित्रण ने बनारस के राजघराने पर 200 साल तक कलंक लगाया. प्रदीप नारायण सिंह ने सारनाथ में अपने पूर्वज जगत सिंह की सही छवि करवाने के लिए 5 साल तक अभिलेखों की छानबीन की.
जीविका मिशन के 1.25 करोड़ सदस्यों में से एक करोड़ को 10,000 रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है. नालंदा ज़िले के लाभार्थी इस पैसे का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, यहां पढ़ें.
कई सीमावर्ती राज्य अशांति की चपेट में हैं, चीन और पाकिस्तान इसका लाभ उठाते रहे हैं. बांग्लादेश पुराने जख्मों को कुरेद रहा है. मानो मैकबेथ’ की चुड़ैलें लड़ाई और अशांति के कढ़ाही में उबाल लाने के लिए नाच-गा रही हैं.
यह बात अक्सर ध्यान में नहीं आती, लेकिन उत्तर भारत में बिहार ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां भाजपा अपने दम पर सत्ता में नहीं आई है. बिहार को उत्तर प्रदेश बनाने की पार्टी की चाहत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.
RJD के अति पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों की संख्या 13.13 प्रतिशत से घटकर 11.19 प्रतिशत हो गई है. ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में पार्टी ने अति पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों में सबसे कम स्ट्राइक रेट देखा था.
सीएजी की रिपोर्टें तो अब भी आ रही हैं, लेकिन उनमें पहले जैसी धार और असर नहीं रहा. कुछ मामलों में सीएजी अब भी सख्त है, पर निशाने पर एनडीए के बाहर की पार्टियों की सरकारें हैं.
हिंदी अक्षरों से लेकर टैश डिज़ाइन और कलाकारों के सहयोग तक, भारतीय ब्रांड भारत की अपनी स्नीकर कहानी गढ़ रहे हैं. "भारतीय ब्रांडों ने लोगों से ज़्यादा पैसे वसूलने की संस्कृति और आकांक्षा का निर्माण किया है."
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.