राहुल गांधी ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गतिरोध का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए सोमवार को ट्वीट किया था, ‘ सब को मालूम है ‘सीमा’ की हक़ीक़त, लेकिन दिल को ख़ुश रखने को ‘शाह-यद’ ये ख़्याल अच्छा है.’
भाजपा सूत्रों ने बताया कि यह भाजपा के ‘आत्मनिर्भर’ अभियान का हिस्सा है लेकिन तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा कोरोना वायरस महामारी के ‘कुप्रबंधन’, प्रवासी श्रमिक संकट तथा हिंसा को शाह बना सकते हैं मुद्दा.
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन की सेना के बीच जारी गतिरोध पर उन्होंने कहा, ‘भारत-चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. हम भी चाहते हैं कि ये विवाद जल्द सुलझ जाए.’
केजरीवाल ने कहा था, ‘90 प्रतिशत से अधिक लोग चाहते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान दिल्ली के अस्पताल केवल राष्ट्रीय राजधानी से ताल्लुक रखने वाले मरीजों का उपचार करें.
बीते 20 सालों से झारखंड के मजदूरों को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेश रिक्रूट कर ले जाती रही है, लेकिन सरकार के पास अब तक इन मजदूरों की कोई जानकारी ही नहीं थी. लेकिन जैसे ही सोरेन सरकार ने मजदूरों के हित की बात की तो उन्हें राष्ट्र निर्माण में मदद न करने वाला कहा जाने लगा.
शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में लिखे अपने साप्ताहिक कॉलम में राउत ने लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र के सामाजिक परिदृश्य में अचानक 'महात्मा' सूद के सामने आने को लेकर सवाल खड़ा किया.
मांझी ने शनिवार को अपने आवास पर महागठबंधन के अन्य घटक दलों राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा और वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी से मुलाकात की है.
मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?
इस्लामाबाद, 30 अप्रैल (भाषा) पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बृहस्पतिवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और भारत...