BJD ने 90% सीटें जीत लीं जबकि BJP 2017 में 297 सीटों से सिमटकर 42 पर आ गई. BJD को अपने ज़मीनी काम और कल्याणकारी उपायों का फल मिला, जबकि प्रचार में शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति से BJP को नुक़सान पहुंचा.
वाराणसी के गुलाबी बाग़ स्थित BJP के डिजिटल वॉर रूम में, क़रीब 100 वॉलंटियर्स हैं जो एक तीन मंज़िला इमारत में बैठते हैं. ये वॉर रूम पार्टी कार्यकर्त्ताओं, पदाधिकारियों और वॉलंटियर्स को आपस में जोड़ता है.
ओडिशा की एक पूर्व कैबिनेट मंत्री और सत्तारूढ़ बीजद के विधायक के बेटे को पंचायत चुनाव में हार गए, जबकि कॉलेज की छात्रा, सब्जी विक्रेता और दंत चिकित्सक ने राज्य में ग्रामीण चुनाव में जीत हासिल की है.
आरएसएस की चुनाव सामग्री—पर्चे, पोस्टर और भाषण—से पता चलता है कि 2022 के चुनावों में भाजपा मुख्यत: पर तीन बातों पर जोर दे रही है. और चौथा ‘एम’ मस्कुलरिटी को माना जा सकता है क्योंकि अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी बीच-बीच में उठता रहता है.
एमवीए घटक दलों का कहना है कि राज्यपाल की यह टिप्पणी, कि समर्थ रामदास छत्रपति शिवाजी के गुरु थे, इतिहास को बदलने का एक प्रयास है. शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है जो कोश्यारी के बयान का समर्थन करता हो.
नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) मणिपुर में सीएम बिरेन सिंह के बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार में साझीदार है. लेकिन इस बार के चुनावों में उसने 60 सीटों में से 38 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. जबकि 2017 में उसके 9 उम्मीदवार मैदान में थे.
अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.