यूपी में भाजपा को 41.3 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि समाजवादी पार्टी ने 32.1 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं. बसपा को भी 12.9 प्रतिशत वोट मिले जबकि कांग्रेस 2.3 प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाई.
भाजपा नेताओं को लगता है कि महामारी के दौरान मुफ्त राशन और डीबीटी के माध्यम से नकद ट्रांसफर जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने चुनावी रूप से काम किया है. यह तथ्य अब काफी समय से लंबित सुधारों को शुरू करने के लिए सरकार को प्रोत्साहित करेगा.
वाराणसी जिले में भाजपा ने 7 सीटें जीती हैं, जबकि एक सीट उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के खाते में आई. इनमें से पांच निर्वाचन क्षेत्र पीएम मोदी की लोकसभा सीट के अंतर्गत आते हैं.
चौबे उस समय सुर्ख़ियों में आए जब उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें स्टेज पर उठक-बैठक करते देखा जा सकता था. इसी फरवरी में वो पूर्वी यूपी के सोनभद्र ज़िले में, अपने चुनाव क्षेत्र के एक गांव में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे.
‘विकास’ अब कोई ऐसी अच्छी चीज़ नहीं रह गया है जो कभी आता ही नहीं, क्योंकि UP में फायदे लक्ष्य तक पहुंचे, और योजनाएं भ्रष्टाचार की दावार को भेदने में सफल रहीं.
गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाली सीटों पर कांग्रेस को 2017 में 10 में से दो सीटें मिली थीं. इस बार उसे शून्य पर संतोष करना पड़ा है. बीजेपी ने पिछली बार छह सीटें पाई थीं. वोटों की गिनती में बीजेपी चार सीटों पर आगे है और सपा छह सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा पर विश्वास, भाजपा की नीति, भाजपा के निर्णयों पर जनता अपार विश्वास की मुहर लगाई है. पहले जनता अपने अधिकार के लिए बिजली, पानी के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती थी.
मोदी एक ऐसी प्रकांड हस्ती बन गए हैं जैसी भारतीय राजनीति ने कभी नहीं देखी थी, केजरीवाल ने अपनी राजनीति का दम दिखा दिया है, तो योगी भाजपा के नये सितारे के रूप में उभरे हैं जिनकी चालों पर नज़र रखने की जरूरत है.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.