नामांकन के लिए पीएम मोदी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जिसका रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने समर्थन किया. इसके बाद दूसरे सेट के प्रस्तावकों में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री थे.
बागी शिवसेना खेमे का दावा है कि विधायक कभी मुख्यमंत्री से मिल तक नहीं पाते थे और उन्हें ‘उद्धव के करीबी कुछ लोगों’ के जरिये उनसे संपर्क साधना पड़ता था. उन्होंने एमवीए में अपने साथ ‘सौतेले व्यवहार’ का आरोप भी लगाया है.
संजय राउत ने कहा कि संख्या बल कागज में ज्यादा हो सकती है लेकिन अब यह लड़ाई कानूनी लड़ाई होगी. हमारे जिन 12 लोगों ने बगावत शुरू की है उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है.
भाजपा का मानना है कि वह महाराष्ट्र में सरकार बनाने से महज एक कदम दूर रह गई है लेकिन फिलहाल अपने पत्ते चलने में वो पूरी सावधानी बरत रही है—और एमवीए सरकार के अपने आप ही गिरने का इंतजार कर रही है.
एकनाथ शिंदे द्वारा विद्रोह करने के बाद गुरुवार को उद्धव ठाकरे ने पार्टी के विधायकों की एक मीटिंग बुलाई जिसमें 55 में से सिर्फ 13 विधायकों ने हिस्सा लिया.
शिवसेना नेता राउत ने कहा, 'उद्धव ठाकरे बहुत जल्द वर्षा बंगले में वापस आएंगे. गुवाहाटी के 21 विधायकों ने हमसे संपर्क किया है और जब वे मुंबई लौटेंगे, तो वे हमारे साथ रहेंगे.'
विधायकों ने पत्र में कहा है कि राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी के विधायकों को वर्षा बंगला (मुख्यमंत्री आवास) जाने का अवसर नहीं मिला. सीएम के आसपास के लोग तय करते थे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं. हमें लगा कि हमारा अपमान किया गया है.
जो बात मुझे परेशान करती है, वह यह है कि हर चीज़ को बहुत जल्दी वफादारी की कसौटी पर कसा जाने लगता है. जैसे भारतीय मुसलमानों को एक तरह से सोचना चाहिए और भारतीय हिंदुओं को दूसरी तरह से. इसका अंत कहां है?