कांग्रेस ने इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किए जाने, जिसकी संभावना 2029 तक है. इसे एक और बड़ा जुमला करार दिया है. जबकि सपा समेत विपक्ष ने बिल में ओबीसी कोटे की मांग की है.
नई संसद में शुरू हुए विशेष सत्र के दौरान आज महिला आरक्षण बिल पेश किया गया. इसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गरमा-गरमी हुई. कांग्रेस ने जहां इसे अपना बताया तो अमित शाह ने इसे उनकी सरकार द्वारा लाया गया बताया.
विशेष सत्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री सहित सभी सांसद पुराने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में अंतिम बार बैठे. इस दौरान वक्ताओं ने संसद भवन और खासकर सेंट्रल हॉल के इतिहास पर प्रकाश डाला.
विश्लेषकों का कहना है कि कम अंतर वाली सीटें आमतौर पर राज्य स्तर पर विजेता और हारने वाले का फैसला करती हैं. सत्तारूढ़ भाजपा और प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उन सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां करीबी मुकाबला है.
केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि मंत्रिमंडल ने महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दे दी है, लेकिन उन्होंने एक घंटे के भीतर ही अपना यह पोस्ट सोशल मीडिया ‘एक्स’ से हटा दिया था.
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान लोगों को दिए गए सूचना के अधिकार कानून, खाद्य सुरक्षा, मनरेगा का कोई जिक्र नहीं किया."