एनडीए से कई सहयोगी दल बिछड़ चुके हैं और जो दल गठबंधन में हैं वे साथ बने रहने के लिए बहुत निष्ठुर होकर सौदेबाजी कर रहे हैं. बीजेपी सहयोगी दलों की मांग मानने को मजबूर हो रही है.
एक बार ‘रेजीम चेंज’ को सही मान लिया जाए, तो यह सोच फैलने लगती है. प्रभाव और ताकत को लेकर ईर्ष्या रखने वाली और पश्चिम पर शक करने वाली प्रतिद्वंद्वी शक्तियां भी इसी तर्क का इस्तेमाल दूसरी जगहों पर करेंगी.