scorecardresearch
Tuesday, 3 March, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

ध्रुव राठी का सवाल अच्छा है, बस थोड़ा बदल कर पूछें कि भारत किस क़िस्म के ‘अ-लोकतंत्र’ में बदल रहा है

भारत में भले ही आदर्श लोकतंत्र कभी नहीं रहा लेकिन अभी चीजें इस हद तक रसातल को पहुंच गई हैं कि भारत को न्यूनतम अर्थों में भी लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता.प्रतिस्पर्धी अधिनायकवाद बेहतर नाम है.

राजनीति में नेताओं के दलबदल और बने रहने के कारण? विचारधारा, धन, सत्ता से इतर भी जवाब खोजिए

भारतीय राजनीति इतनी आकर्षक नहीं होती अगर इसकी राहें टेढ़ी-मेढ़ी न होतीं, इसकी खासियत यही है कि साफ-सपाट सी दिखने वाली किसी बात का भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं होता, किसी भी स्थिति को लेकर दावे के साथ नहीं कहा जा सकता-बेशक इसका कारण यही होगा.

शेख शाहजहां ने ED बनाम बंगाल पुलिस की लड़ाई शुरू की, लेकिन टीएमसी vs बीजेपी उनकी किस्मत का फैसला करेगी

ईडी अधिकारियों पर हमले के बाद संदेशखाली से शेख शाहजहां के भागने से टीएमसी बनाम बीजेपी युद्ध छिड़ गया. अब लगभग दो महीने बाद उनकी गिरफ्तारी ने हिरासत की लड़ाई शुरू कर दी है.

PM के रूप में नवाज शरीफ का कार्यकाल दिखाता है कि पाकिस्तानी नेता कभी भी देश की मूल समस्या को हल नहीं कर सकते

नवाज शरीफ ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर किया और इस्लामवादियों के साथ सहयोग किया.

शेख शाहजहां का घमंड चिंताजनक है, वह बहुत जल्द फिर से वापस आ सकता है

अगले कुछ महीनों में चुनाव अभियान यह दिखाएगा कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद जिस व्यक्ति की बॉडी लैंग्वेज से घमंड और अति-आत्मविश्वास की बू आ रही थी, वह टीएमसी के लिए फायदेमंद रहा या नुकसानदायक.

विचारधारा मर चुकी है, राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग से पता चलता है कि राजनीति अब खरीद-फरोख्त का बाजार बन गई है

मेरा मानना था कि गुप्त मतदान से छुटकारा मिलने से राज्यसभा चुनावों में खरीद-फरोख्त का खतरा समाप्त हो गया. लेकिन इस सप्ताह के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि हमने अपने कुछ विधायकों की नैतिकता पर ज़रूरत से ज़्यादा भरोसा किया.

ध्रुव राठी जो भी कहें, मोदी में तानाशाह तो छोड़िए, सख्त प्रशासक के भी लक्षण नहीं हैं

अपने दोनों शासन काल में नरेंद्र मोदी मनमानी करने की जगह, बेहद संभलकर चल रहे हैं और अक्सर आम सहमति के बनने के इंतजार में वे अपने बड़े फैसलों को स्थगित कर देते हैं.

हिमंत सरमा RSS-मोदी की राजनीति को गलत समझ रहे हैं, कट्टर छवि एक सीमा के बाद आगे मदद नहीं करेगी

हिमंत बिस्वा सरमा को याद रखना चाहिए कि मोदी आज श्री अरबिंदो के आध्यात्मिक हिंदुत्व को पसंद करते हैं, सावरकर के राजनीतिक हिंदुत्व को नहीं.

किसानों के प्रदर्शन ने बहस को ‘MSP क्यों’ से ‘MSP कैसे’ पर ला दिया, अब देखना है ‘कब’ की बारी कब आएगी

किसान को एमएसपी की गारंटी देने के ठोस तरीके पर आंदोलन की समझ परिपक्व हो चुकी है, देखना है कि सरकारी नौकरशाह, दरबारी मीडिया और किताबी अर्थशास्त्री उस मुकाम तक कब पहुंचते हैं.

मोदी के खिलाफ कांग्रेस के हाथ लगा MSP का मुद्दा, लेकिन 2024 की लड़ाई के लिए दो कदम और चलने की जरूरत

किसानों की मांग की फेहरिश्त में स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के हिसाब से एमएसपी की कानूनी गारंटी करने की मांग शीर्ष पर है. कांग्रेस ने अभी जमीनी स्तर पर चल रहे एक ताकतवर संघर्ष के साथ अपने को जोड़ लिया है.

मत-विमत

वीडियो

राजनीति

देश

स्कूली छात्रों ने त्वचा रोग बताने वाला ऐप विकसित किया

नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) अहमदाबाद के एक निजी स्कूल के छात्रों ने एआई-आधारित त्वचा स्वास्थ्य जागरूकता ऐप विकसित किया है, जिसने चर्म रोग...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.