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Tuesday, 31 March, 2026
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एलके झा से पीएन हक्सर और पीके मिश्रा तक — PMO कैसे बना भारत का पावर हब

यह विडंबना है कि पीएमओ, जिस पर अक्सर भारत को वास्तविक राष्ट्रपति शासन प्रणाली देने का आरोप लगाया जाता है, का निर्माण सबसे अधिक सलाहकार प्रधानमंत्रियों में से एक, लाल बहादुर शास्त्री ने करवाया था.

आरक्षण खत्म होने के डर को दूर करने के लिए मोदी और शाह कैसे कर रहे हैं BJP की अगुवाई

मेरठ से उम्मीदवार अरुण गोविल ने संविधान में ‘परिवर्तन’ पर अपनी टिप्पणियों के लिए विपक्ष को उकसाया है. ऐसा करने पर वे लल्लू सिंह, अनंतकुमार हेगड़े और ज्योति मिर्धा की सूची में शामिल हो गए.

‘मटन, मुगल, मुस्लिम’, मोदी के लिए विपक्ष गैर-हिंदू और भारत विरोधी क्यों हैं

मोदी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को मांस-मछली खाने वाले आधे-मुसलमानों की तरह पेश करना पसंद करते हैं जो ‘मुस्लिम’ घोषणा पत्र जारी करते हैं, मुसलमानों को खुश करते हैं और उनसे भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद नहीं की जा सकती.

‘घुस के मारेंगे’ का ऐलान पड़ोसियों के लिए एक चेतावनी है, ‘हॉट पर्सूट’ को तो वैधता हासिल है ही

राजनीतिक नेतृत्व और फौजी कमांडर को ऐसी कार्रवाई की योजना बनाने और स्थानीय कमांडरों को छूट देने के मामले में सावधानी और संयम बरतना ज़रूरी है ताकि वह मान्य अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप हो.

BJP का ‘अब की बार 400 पार’ का नारा कोई नया विचार नहीं है, यह 73 साल पहले की एक राजनीतिक प्रतिज्ञा है

'अब की बार 400 पार' की उत्पत्ति जवाहरलाल नेहरू और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बीच हुई तीखी बहस से हो सकती है, जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू को चेतावनी दी थी कि वह उनकी 'कुचलने वाली मानसिकता' को कुचल देंगे.

आंबेडकर को सिर्फ दलित प्रतीक मानना ठीक नहीं, भारतीय महिलाओं के प्रति उनके नारीवादी दृष्टिकोण को भी समझें

मनुस्मृति में कहा गया है कि 'महिलाओं को शिक्षा का कोई अधिकार नहीं है.' उनकी शिक्षा और संपत्ति के अधिकारों के लिए अंबेडकर की लड़ाई से पता चलता है कि वह सिर्फ एक दलित प्रतीक क्यों नहीं थे.

अबू धाबी मंदिर गए अरब के मंत्रियों से भारतीय मुसलमानों को रूढ़िवाद से लड़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए

यूएई जैसे मुस्लिम-बहुल राष्ट्र का हिंदू धर्म के प्रति सम्मान दिखाना हमें भारत के हिंदू-मुस्लिम रिश्तों के संदर्भ में आशा देता है.

44 साल बाद, मोदी की भाजपा में केवल दो चीज़ें बदली, एक चीज़ है जो नहीं बदली

जैसा कि भाजपा सत्ता में लगातार तीसरे कार्यकाल की ओर अग्रसर है, इसलिए यह बहस दिलचस्प है कि यह मूल प्रस्ताव पर कितनी खरी उतरती है: एक अलग तरह की पार्टी.

TMC के विरोध प्रदर्शन से BJP की धमकी तक—बंगाल में राजनीतिक रणनीति कमज़ोर हो रही, मतदाता सब देख रहे हैं

टीएमसी की अवास्तविक विरोध की मांगें लोगों को 15 लाख देने का वादा करने की नरेंद्र मोदी की रणनीति की तरह हैं — दोनों ने अपना प्रभाव खो दिया है.

BJP अब मोदी की पार्टी है जैसे कांग्रेस इंदिरा गांधी की थी, लेकिन क्या PM जोखिमों के लिए तैयार हैं?

आप यह तर्क दे सकते हैं कि नरेंद्र मोदी जो कुछ करते हैं या जिसके बारे में बात करते हैं उसका उद्देश्य आरएसएस के वरिष्ठों की स्वीकृति हासिल करना नहीं है. वे ऐसा अपने निर्वाचन क्षेत्र को ध्यान में रखकर कर रहे हैं.

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दिल्ली में बना अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन, जिसकी कोई गारंटी नहीं: उदयनिधि

तिरुवन्नमलई, 30 मार्च (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक)- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.