ताज़ा घटनाओं को हमें कथनी और करनी में छत्तीस का आंकड़ा रखने की चीन की पुरानी चाल के मद्देनज़र पूरी सावधानी बरतते हुए ही आंकना होगा, चाहे ये घटनाएं कितनी अच्छी क्यों न दिखती हों.
उत्तर प्रदेश में सपा को आसानी से दी गई छूट, और महाराष्ट्र तथा झारखंड के मामले में काँग्रेस के ज्यादा व्यावहारिक रुख से जाहिर होता है कि उसे यह एहसास हो गया है कि उसने पिछले आम चुनाव के नतीजों को अपने लिए कुछ ज्यादा ही अनुकूल मान लिया था.
भारत में नैतिकता कोई व्यक्तिगत और स्वनिर्मित अवधारणा नहीं है. यह ऐसी चीज़ है जो अक्सर इस बात से प्रभावित होती है कि समाज हमें क्या सिखाता है, हमसे क्या अपेक्षित है और धार्मिक व्यवस्थाएं क्या लागू करती हैं.
जिन लोगों ने शेख हसीना को महज़ 80 दिन पहले सत्ता से बेदखल किया था, उनके लिए शेख हसीना पर राष्ट्रपति मोहम्मद शाहबुद्दीन का बयान आखिरी बात थी जिसे वह सुनना चाहते थे.
मोदी सरकार को आंतरिक जांच करवानी चाहिए थी और जहाँ जरूरी हो वहां ज़िम्मेदारी तय करनी चाहिए थी. अहम बात यह है कि विपक्षी नेताओं को भरोसे में लेना चाहिए था
नवजात संगठन होने और इसके सदस्यों में मुख्य रूप से मध्यम वर्ग के हिंदू शामिल होने के कारण, आरएसएस के पास कभी भी अपने खिलाफ स्थापित किए गए नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए वित्तीय साधन नहीं थे.
सिख अलगावादी अगर सिरदर्द हैं तो उनके मेज़बान देशों के लिए हैं जहां वह बसे हुए हैं. उनका एक ‘अंडरवर्ल्ड’ है जिसमें गिरोहों के बीच खूनी लड़ाई चलती रहती है और उनके पड़ोसी असुरक्षित होते हैं, तो भारत इस सबसे क्यों परेशान हो?
मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) निजी इक्विटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एडवेंट इंटरनेशनल, आदित्य बिड़ला हाउसिंग फाइनेंस (एबीएचएफ) में 14.3 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने...