राजपूतों की शौर्य गाथाएं उनकी हार को भी स्वीकार्य दिखाती हैं और जब उनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठाए जाते हैं तो लगता है कि उनके जीवन के सबसे सुनहरे दिन बीते चुके हैं।
हमें अपने राष्ट्रपति के प्रति किसी भी अपमान की निंदा करनी चाहिए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू और ममता बनर्जी से जुड़ी घटना कई सवाल खड़े करती है, जिनमें कुछ असहज करने वाले भी हैं.
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) वरिष्ठ पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाली कंपनी एक्सईडी एक्जिक्यूटिव डेवलपमेंट ने अपने 1.2 करोड़ डॉलर के आरंभिक सार्वजनिक...