कर्पूरी ठाकुर ने बिहार और उत्तर भारत की राजनीति में ऐसी लकीर खींच दी है, जिसे छोटा कर पाना किसी के लिए संभव नहीं हुआ. गरीबों और वंचितों के लिए उन्होंने जो किया, वह एक अप्रतिम मिसाल है.
हाल के दशकों तक नेता जी के कहीं रहस्यमय ढंग से रहने या ‘प्रगट’ होने की ‘खबर’ मिलते ही अनेक श्रद्धाविह्वल लोग उन्हें निकट से निहारने की लालसा लिये वहां पहुंच जाते रहे हैं.
आंबेडकरवादी विचारों से प्रेरित परिवारों की शादियों में कर्मकांडों और पुरोहितों का निषेध किया जा रहा है. लेकिन कुछ शादियों में सनातन और आंबेडकरवाद के बीच का द्वंद्व भी दिखता है, जहां दोनो पद्धतियां साथ-साथ चल रही हैं.
नरेंद्र मोदी द्वारा खुद को पिछड़ा घोषित करने, चुनाव लड़ने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में ओबीसी का महत्व बढ़ रहा है. 52 फीसदी ओबीसी आबादी को अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस अपने घोषणापत्र में कई धमाकेदार घोषणाएं करने जा रही है.
मोदी समर्थक अब भी आश्वस्त हैं कि वे ही 2024 तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे और आलोचकों को मतदाता कड़ा जवाब देंगे. लेकिन ज्योतिषों में आम सहमति नहीं बन पा रही है.
शायद भारतीय पुरुषों के व्यवहार पर सही तरह से नज़र रखने का एकमात्र तरीका यह है कि हर ट्रिप पर उनकी मां उनके साथ हों. अगर वे किसी अजनबी से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें पहले मम्मी से पूछना चाहिए.