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Wednesday, 4 March, 2026
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हवाई हमलों से भारत की पाकिस्तान समस्या दूर नहीं होगी

हवाई हमलों से न तो कश्मीर में भावी हमलों पर रोक लगने, न ही आगे और अधिक रोमांचक जवाबी कार्रवाई की आवश्यकता खत्म होने के आसार हैं.

बीजेपी ने तो अपना चुनावी मुद्दा चुन लिया, कांग्रेस क्या करेगी?

कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल कोशिश में हैं कि सरकार के पौने पांच साल के कामकाज को मसला बनाया जाए. वहीं मोदी ने सैन्य कार्रवाई और सैनिकों के मारे जाने से देश में उपजे गुस्से को मसला बना लिया है.

क्या महागठबंधन को मार गिराने वाला ब्रह्मास्त्र मोदी ने हासिल कर लिया है?

बात इमरान खान के हाथ में है- वे चाहें तो सीमा पर कायम तनाव के माहौल को जारी रखें और भारत में होने जा रहे आम चुनाव की थाली नरेन्द्र मोदी के हाथ में थमा दें.

शहादत दिवस: चंद्रशेखर ‘आजाद’ की ऐतिहासिक ‘माउजर’ व ‘कोल्ट’ पिस्तौलों का क्या हुआ?

अवध के किसी भी जिले के किसी भी हज्जाम के सैलून में चले जाइये, आपको वहां चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू जैसे नायकों की तस्वीरें लगी मिल जायेंगी.

मोदी ने पाकिस्तान को दिखाया 56 इंच का सीना

पुलवामा हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने हमले कर पाकिस्तान को कायदे से समझा दिया कि अब ख़ैरियत चाहते हो तो औकात में रहना.

जैसा बुरे वैवाहिक संबंधों में होता है, शिवसेना और भाजपा का गठबंधन भी ठीक वैसा है

वाजपेयी और आडवाणी गठबंधन के विवादित मुद्दों पर चर्चा करने बाल ठाकरे के पास जाते थे. मोदी और शाह के मन में उद्धव के प्रति वो सम्मान नहीं है.

कश्मीरी छात्रों पर हमले की निंदा देरी से करना, पीएम मोदी की पुरानी रणनीति का हिस्सा

पीएम नरेंद्र मोदी की देश में फैली किसी हिंसा या मामले में देरी से बोलना एक सुविचारित रणनीति का एक हिस्सा है, जो ऊना और अख़लाक़ मामलों में भी देखा गया..

लड़ाई को कश्मीरियों की ओर तो आपके लोग ही मोड़ रहे हैं मोदी जी!

पिछले पांच सालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही रहा है कि जब भी उन्होंने देश को कोई उदात्त संदेश देने की कोशिश की, उसकी सबसे ज्यादा अनसुनी उनके भक्तों, मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने ही की.

केवल आदिवासी ही इस बात को समझते हैं कि प्राकृतिक जंगल उगाये नहीं जा सकते

भारत में 10 करोड़ से ज्यादा आदिवासी हैं, जो ब्रिटेन या जर्मनी की आबादी से ज्यादा हैं. देश में जंगल सिर्फ वहीं बचे हैं, जहां आदिवासी रहते हैं. जंगल में रहने के उनके अधिकार की रक्षा होनी चाहिए.

जातीय सम्मेलन: हाशिए पर पड़ी जातियों की गगनचुंबी अपेक्षाएं

जातीय सम्मेलनों में प्रायः ऐसे नेता होते हैं जो चुनाव लड़ने के लिए टिकटों के इंतज़ाम में लगे होते हैं और भारी भीड़ जमा कर अपनी ताकत राजनीतिक पार्टियों को दिखाते हैं.

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म्यांमा के नेतृत्व वाली और इसकी अपनी शांति प्रक्रिया का समर्थन करता है भारत : जयशंकर

नयी दिल्ली, चार मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत, म्यांमा के नेतृत्व वाली और उसकी अपनी शांति प्रक्रिया...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.