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Sunday, 29 March, 2026
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मत-विमत

लोकसभा में सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की सबसे बुलंद आवाज

संसद में आखिर के दो वर्षों में शरद यादव की अनुपस्थिति में जिस एक नेता ने सामाजिक न्याय और वंचितों के समर्थन में सबसे जोरदार तरीके से अपनी बात रखी, उनमें धर्मेंद्र यादव सबसे आगे रहे.

परंपरा और आस्था के असली निशाने पर मुसलमान नहीं, दलित और पिछड़े हैं

दलित-पिछड़ी जातियों की भागीदारी के हर सवाल को ‘परंपरा और आस्था’ के पर्दे से ढंका गया, उसके नाम पर ही दफन किया गया.

कई बार प्लेइंग 11 में दिखती है विराट कोहली की मनमर्जी

कोई भी खेल किंतु-परंतु-अगर-मगर से नहीं खेला जाता है. दिल्ली वनडे में टीम इंडिया को जीत के लिए 273 रनों की जरूरत थी लेकिन वो 237 रन पर ऑल आउट हो गई.

बहुमत नहीं मिलने के डर से घबराए पीएम मोदी, चले वाजपेयी की राह

मोदी और शाह दिग्गजों को ध्वस्त करने और तमाम राजनीतिक अवसरों को हथियाने वाले नेताओं की अपनी छवि को चुपचाप बदल रहे हैं.

बेरोज़गारी का वार इस चुनाव में हो सकता है घातक, भाजपा इसको हल्के में न ले

बेरोजगारी 2019 के लोकसभा चुनाव में सबसे घातक सियासी हथियार साबित होने जा रही है.

ओबीसी आरक्षण पर कांग्रेस ने कमलनाथ और भूपेश बघेल को फंसा दिया

मध्य प्रदेश सरकार ने ओबीसी का आरक्षण दोगुना तो कर दिया है, लेकिन इसे लेकर पार्टी कोई उत्साह नहीं दिखा रही है. इससे सवर्ण वोटर कांग्रेस से नाराज हो जाएंगे.

राजनीति में कभी रंग भरा करते थे ‘रॉबिनहुड’ और ‘इंडियन जिमी कार्टर’ जैसे प्रत्याशी

वोट मांगने वाले छोटे बड़े नेता तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कोई ऐसा भी नेता देखा है जो वोट मांगने आये तो ढिठाई से एक भेली गुड़ की मांग भी कर बैठे?

यूपी-बिहार की बाउंस लेती पिच पर क्यों खेल रही है कांग्रेस

यूपी में कांग्रेस के दलित मतदाता बसपा में शिफ्ट हो गए, मुसलमानों की पहली प्राथमिकता सपा और दूसरी बसपा हो गई. बचे सवर्ण, तो वो अब पूरी तरह से भाजपा में हैं.

2014 में लड़ाई कांग्रेस से थी, 2019 में मोदी खुद से लड़ रहे हैं

2014 में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस से 70 सालों का हिसाब मांगकर मैदान ही क्लियर कर लिया था. पर अब ये जुमला दुबारा नहीं दुहराया जा सकता.

नदियां किसी की बपौती नहीं होती, इन पर मालिकाना हक नहीं हो सकता

भारत ने मात्र 0.53 मिलियन एकड़ फीट पानी को रोका है जोकि मामूली है और ये तीनों नदियों का पानी समझौते के अनुसार भारत ही उपयोग करता रहा है.

मत-विमत

खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

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दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा:मंत्री कपिल मिश्रा

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शनिवार को कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफडी) प्रतिभाओं के लिए...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.