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Sunday, 12 April, 2026
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दिग्विजय सिंह के भोपाल से लड़ने से क्या वाराणसी की तरह हो जाएगी यह लोकसभा सीट

मध्य प्रदेश की यह सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. पार्टी ने यहां से लगातार आठ बार जीत दर्ज कर इसे अपनी परंपरागत सीट बना लिया है.

मोदी सरकार ने गन्ना किसानों की जिंदगी में कितनी मिठास घोली

गन्ना एक्ट में तो ये भी दर्ज है कि 14 दिन में भुगतान न होने पर चीनी मिल को 14 से 16 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा.

आखिर क्यों घट गई है निवेश की मांग, क्या इसका कारण विफलता नहीं सफलता है?

निवेश की मांग में निरंतर जो सुस्ती बनी हुई है उसके पीछे विफलता नहीं बल्कि सफलता का हाथ हो सकता है, जिसने सकल आर्थिक वृद्धि को भी प्रभावित किया है?

आदिवासियों के लिए लोकसभा चुनाव में क्या हैं अहम मुद्दे

यह समझने की जरूरत है कि आदिवासी इलाकों की राजनीति के मुद्दे देश के अन्य इलाकों से भिन्न होते हैं. आदिवासी राजनीतिक से ज्यादा, अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

राहुल की कांग्रेस का एक दिशाहीन एनजीओ में तब्दील होने का ख़तरा है

कांग्रेस के पास सवाल तो हैं, मगर सवालों के जवाब नहीं हैं, 'नेता' हैं मगर विजेता नहीं हैं. चुनाव के चंद सप्ताह पहले वह एक सदाचारी, व्यवस्था विरोधी एनजीओ की तरह पेश आ रही है, जो बस अपना फर्ज़ निभाने से मतलब रखता है.

वादों की तहकीकात: आखिर रोजगार देने में कितनी सफल रही मोदी सरकार

सरकार रोजगार के 2014 के चुनावी वादे पर विफल हुई है. आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि बेरोजगारी बढ़ी है व पिछले 5 साल में ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में रोजगार घटा है.

मंडल बांध, यानी चुनावी वर्ष में फिर एक बड़ी परियोजना

मंडल बांध परियोजना से 19 गांव के हजारों लोग विस्थापित होंगे. साढ़े तीन लाख पड़े कटेंगे. पर्यावरण को नुकसान होगा. ऐसी तमाम योजनाएं आदिवासियों के लिए विनाशकारी साबित हुई हैं.

भूमिगत जल के दोहन को लेकर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है

वर्चुअल वॉटर ने वैश्विक व्यापार को जो मज़बूती दी है, उसमें करीब 22 फीसद वैश्विक पानी निर्यात के लिए बनाए जाने वाले सामान के लिए उपयोग हो रहा है.

महाराष्ट्र में क्यों हाशिए पर हैं दलित पार्टियां

2019 लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में दो गठबंधन बने हैं मगर किसी ने भी किसी दलित पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया.

किसी युवा से ऊर्जावान हैं फ़ारूक़ अब्दुल्ला

दूसरे नेताओं में 80 वर्षीय मुलायम सिंह अपनी ही पार्टी में अलग-थलग हैं, वहीं 79 वर्षीय शरद पवार परिवार की अगली पीढ़ी के लिए चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुके हैं.

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दुनिया तेजी से बदल रही है—भारत को खुद को सुधारना, मजबूत करना और आर्थिक ताकत बढ़ानी चाहिए

आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.

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ओ’ब्रायन ने महिला आरक्षण, परिसीमन पर सरकार पर हमला बोला, कहा: सरकार की मंशा ठीक नहीं

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.