scorecardresearch
Monday, 9 February, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

लड़ाई को कश्मीरियों की ओर तो आपके लोग ही मोड़ रहे हैं मोदी जी!

पिछले पांच सालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही रहा है कि जब भी उन्होंने देश को कोई उदात्त संदेश देने की कोशिश की, उसकी सबसे ज्यादा अनसुनी उनके भक्तों, मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने ही की.

केवल आदिवासी ही इस बात को समझते हैं कि प्राकृतिक जंगल उगाये नहीं जा सकते

भारत में 10 करोड़ से ज्यादा आदिवासी हैं, जो ब्रिटेन या जर्मनी की आबादी से ज्यादा हैं. देश में जंगल सिर्फ वहीं बचे हैं, जहां आदिवासी रहते हैं. जंगल में रहने के उनके अधिकार की रक्षा होनी चाहिए.

जातीय सम्मेलन: हाशिए पर पड़ी जातियों की गगनचुंबी अपेक्षाएं

जातीय सम्मेलनों में प्रायः ऐसे नेता होते हैं जो चुनाव लड़ने के लिए टिकटों के इंतज़ाम में लगे होते हैं और भारी भीड़ जमा कर अपनी ताकत राजनीतिक पार्टियों को दिखाते हैं.

अगर सही राजनीतिक फैसला न किया तो डूब जाएंगी अनुप्रिया पटेल

अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल की छवि एक ऐसे नेता ही है, जिन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए भी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार के गलत कामों की खिंचाई करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी.

विदेशी कंपनियां भारतीय उद्यमियों की जगह ले रही है, जोकि धूल फांक रहे हैं

सुज़ुकी का आधे कार बाज़ार पर कब्ज़ा है, चीनियों का मोबाइल फोन क्षेत्र पर और कोरियाइयों का उपभोक्ता सामान सेक्टर पर. और एतिहाद शायद जेट को उड़ाने लगे. विदेशी खिलाड़ियों के बिना भला हम कहां रहेंगे?

समानता और स्वच्छता के पहले प्रतीक गांधी नहीं, संत गाडगे हैं!

गांधी का स्वच्छता अभियान एक राजनीतिक मुहिम थी, जिसका उद्देश्य दलितों को कांग्रेस से जोड़ना था. इसके उलट संत गाडगे बाबा के लिए यह जीवन पद्धति थी.

बदला लेने से ज़्यादा ज़रूरी है दुश्मन के दिलो-दिमाग में खौफ़ पैदा करना

सवाल यह है कि बदले के बाद क्या? क्या इससे हमेशा के लिए अमन और सुरक्षा पक्की हो जाएगी, या यह सिर्फ एक सुर्खी, एक आयोजन बनकर रह जाएगा?

मी लार्ड! हमें भी चाहिए ऐसी सज़ा, आपको दुआ देंगे: देश के किसान

उद्योगपति अनिल अंबानी व एरिक्सन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कर्ज़मंद किसानों ने गुहार लगानी शुरू कर दी है कि उन्हें भी ऐसी सजा से नवाज़ा जाय.

मुलायम के दांव से बीएसपी का निकल सकता है दम

मुलायम सिंह जो कर रहे हैं, उससे सपा और बसपा की चुनावी संभावनाओं पर बुरा असर पड़ सकता है. इसका ज्यादा नुकसान बीएसपी को होगा, क्योंकि सपा में फैली उलझन के कारण सपा का वोट बीएसपी को ट्रांसफर नहीं हो पाएगा.

दो का पहाड़ा पढ़ने में व्यस्त सरकार आत्मबोधानंद से बात नहीं करना चाहती

आत्मबोधानंद उन्हीं चार मांगों पर अनशन कर रहे हैं जिन पर अडिग जीडी अग्रवाल ने शहादत दे दी थी, पर सरकार केवल सफल कुंभ के आयोजन व नमामि गंगे के प्रचार से काम चला रही है. उसने अभी तक उनसे बात भी नहीं की है.

मत-विमत

नया रक्षा बजट इतना अच्छा नहीं है कि भारत को 2047 की ‘विकसित सेना’ दे सके

विकसित सेना के गठन के लिए 2047 को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का एक स्पष्ट ‘विजन’, हर 5 साल में समीक्षा की जाने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति और एक ठोस नेशनल डिफेंस पॉलिसी की ज़रूरत है.

वीडियो

राजनीति

देश

दिल्ली के मंगोलपुरी में 10वीं कक्षा के छात्र की चाकू मारकर हत्या

नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) बाहरी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में सोमवार सुबह कुछ अज्ञात हमलावरों ने 10वीं कक्षा के एक छात्र की कथित...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.