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Sunday, 8 February, 2026
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मत-विमत

बदला लेने से ज़्यादा ज़रूरी है दुश्मन के दिलो-दिमाग में खौफ़ पैदा करना

सवाल यह है कि बदले के बाद क्या? क्या इससे हमेशा के लिए अमन और सुरक्षा पक्की हो जाएगी, या यह सिर्फ एक सुर्खी, एक आयोजन बनकर रह जाएगा?

मी लार्ड! हमें भी चाहिए ऐसी सज़ा, आपको दुआ देंगे: देश के किसान

उद्योगपति अनिल अंबानी व एरिक्सन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कर्ज़मंद किसानों ने गुहार लगानी शुरू कर दी है कि उन्हें भी ऐसी सजा से नवाज़ा जाय.

मुलायम के दांव से बीएसपी का निकल सकता है दम

मुलायम सिंह जो कर रहे हैं, उससे सपा और बसपा की चुनावी संभावनाओं पर बुरा असर पड़ सकता है. इसका ज्यादा नुकसान बीएसपी को होगा, क्योंकि सपा में फैली उलझन के कारण सपा का वोट बीएसपी को ट्रांसफर नहीं हो पाएगा.

दो का पहाड़ा पढ़ने में व्यस्त सरकार आत्मबोधानंद से बात नहीं करना चाहती

आत्मबोधानंद उन्हीं चार मांगों पर अनशन कर रहे हैं जिन पर अडिग जीडी अग्रवाल ने शहादत दे दी थी, पर सरकार केवल सफल कुंभ के आयोजन व नमामि गंगे के प्रचार से काम चला रही है. उसने अभी तक उनसे बात भी नहीं की है.

गठबंधन जरूरी है, मज़बूत सरकारों ने लोकतांत्रिक संस्थानों को ज्यादा आघात पहुंचाया है

1977 के बाद देश के तमाम राज्यों में क्षेत्रिय दलों का तेज़ी से उभार शुरू हो गया. इन दलों ने उन क्षेत्रिय मुद्दों और समस्याओं के आधार पर जनप्रचार कर जनाधार बनाना शुरू कर दिया.

सऊदी प्रिंस को गले लगा लिया मोदी ने, नाराज होने से पहले जरा हकीकतों पर गौर कर लीजिए

नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब से भारत के रिश्ते में पाकिस्तान और पुलवामा के नाम पर खटास न देकर समझदारी ही दिखाई. वे मनमोहन सिंह की पहल को ही जोरदार ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं.

स्नेहा, ये तो बताओ कि तुम्हारी जाति क्या है?

पहली बार देश में ये माना गया है कि कोई व्यक्ति जाति और धर्मविहीन हो सकता है. सरकार ने इसका सर्टिफिकेट जारी किया है. ये एक बड़ी सामाजिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है.

कोई महिला बुर्क़ा पहनना चाहती है, तो आपको क्या दिक्कत है?

कोई महिला क्या पहनना चाहती है, उस महिला पर ही छोड़ देना चाहिए. जो लोग बुर्का पर विवाद करना चाहते हैं, वे खुद अपने परिवार के पहनावे पर कभी बात नहीं करते.

बाबा साहेब से जुड़ गई है रविदास की वैश्विक परंपरा

रैदास ने भारतीय समाज की बुराइयों को खत्म करके एक आदर्श समाज बनाने की कल्पना की थी, जहां किसी को कोई कष्ट न हो. टेक्स्ट बुक में उनके बारे में खामोश हैं.

जब मुम्बई में दीये से लड़कर हार गया था तूफान!

जार्ज फर्नांडिस ने 48.5 प्रतिशत वोट के साथ मुंबई में एस. के. पाटिल को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. जार्ज की इस जीत ने सिद्ध किया था कि प्रतिद्वंद्वी कितना भी मजबूत क्यों न हो, बिना साधन वाला व्यक्ति भी युक्ति से हरा सकता है.

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डियर नरेंद्रभाई: बांग्लादेश चुनाव से भारत–बांग्लादेश के रिश्तों को ‘रीसेट’ करने का मौका है

अगले वीकेंड तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार बन जाएगी. यह भारत के लिए मौका है कि वह चुनाव वाले पश्चिम बंगाल और असम में ‘घुसपैठिया’ वाली भाषा को नरम करके बिगड़े रिश्तों को फिर से ठीक करे.

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हरियाणा के डीजीपी ने सूरजकुंड मेला हादसे में निरीक्षक की मौत पर शोक व्यक्त किया

चंडीगढ़, सात फरवरी (भाषा) हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने शनिवार रात निरीक्षक जगदीश प्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त किया। निरीक्षक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.