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Saturday, 7 March, 2026
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खबरें अब हिंसक और जानलेवा हो गई हैं

आजकल संचार और संप्रेषण के चालाक औजार को राजनीति का एक अहम जरिया बना लिया गया है. इसका मुख्य इस्तेमाल हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है.

सरकारें कब तक बीएसएनएल जैसे उपक्रमों को दिवालिया होने से बचाती रहेंगी?

बीएसएनएल जैसी टेलीकॉम कंपनियां तन्ख्वाह नहीं दे पा रहीं. उनके लाभकारी बनने के कोई संकेत भी नहीं. इससे बचने का सही उपाय कंपनियों में पैसा डालने के बजाय, इसमें काम कर रहे लोगों को पैसा देकर विदा करना बेहतर उपाय है.

क्या अब भी किसी को शक है कि गांव की अर्थव्यवस्था नहीं सुधरी?

अरे भाई ! कुछ किसान आत्महत्या जरूर कर रहे हैं यही सही है. लेकिन, यह समझना चाहिए कि यह हत्या खेती के अलाभकारी होने मात्र से है या उसके कारण अन्य भी हैं.

आखिर क्यों चुनाव आयोग के लिए बड़ी चुनौती है, 2016 से खाली पड़ी अनंतनाग सीट

अनंतनाग लोकसभा सीट पर शांतिपूर्वक व सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न करवाना चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा से जुड़ चुका है.

मोदी विदेश नीति की वो 5 घातक गलतियां, जिसकी वजह से चीन ने भारत को अपमानित किया

मोदी का कद भी है और करिश्मा भी, मगर यह उन तैयारियों और कार्यवाहियों की जगह नहीं ले सकता जो प्रोफेसनल कूटनीति के लिए जरूरी हैं.

अम्बेडकरवाद को नई बुलंदियों पर ले गए मान्यवर कांशीराम

कांशीराम के नजरिए से अंबेडकरवाद को देखें तो किसी भी संगठन या फिर संस्थान को अंबेडकरवादी तभी कहा जा सकता है, जब यह पता हो कि उसका उद्देश्य क्या है.

तो क्या चीन अज़हर मसूद से डरा हुआ है, इसीलिए बचा रहा है

चीन भारत को अपना प्रतिद्वंदी मानता है और जो भी तत्व भारत के लिए सिरदर्द हैं उनकी मदद कर रहा है. वह भारत से सीधे कोई दुश्मनी मोल लेने से बचता है.

बेटे के चुनाव लड़ने की बात पर चंद्र शेखर ने कहा था- घर छोड़कर चले जाओ

देश की राजनीति ने कई ऐसे दिग्गज भी पैदा किये हैं, जिन्होंने वंशवाद की बड़ी बुराई की जड़ में मट्ठा डाल अपने बेटे-बेटियों का लिहाज नहीं किया.

लोकसभा में सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता की सबसे बुलंद आवाज

संसद में आखिर के दो वर्षों में शरद यादव की अनुपस्थिति में जिस एक नेता ने सामाजिक न्याय और वंचितों के समर्थन में सबसे जोरदार तरीके से अपनी बात रखी, उनमें धर्मेंद्र यादव सबसे आगे रहे.

परंपरा और आस्था के असली निशाने पर मुसलमान नहीं, दलित और पिछड़े हैं

दलित-पिछड़ी जातियों की भागीदारी के हर सवाल को ‘परंपरा और आस्था’ के पर्दे से ढंका गया, उसके नाम पर ही दफन किया गया.

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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राजनीति

देश

केंद्र ने अपनी विदेश नीति अमेरिका के पास गिरवी रख दी है: कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे

कलबुर्गी, सात मार्च (भाषा) कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने शनिवार को केंद्र सरकार की विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.