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Saturday, 11 April, 2026
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मत-विमत

अर्थव्यवस्था से जुड़े सवाल बाद में, बड़ी बात ये है कि कांग्रेस ने इतनी सारी आजादियों के वादे किए हैं

कांग्रेस के कई वादे शायद पूरे नहीं किये जा सकते. अगर एक राष्ट्रीय दल व्यक्तिगत स्वाधीनता का इस तरह खुल कर पक्ष ले रहा है तो इसका खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए.

अहीर रेजिमेंट का वादा या सपा से यादव मतदाता छिटकने का डर

अगर समाजवादी पार्टी सचमुच लोहियावाद पर चल रही होती, तो वह किसी जाति के लिए नया रेजिमेंट बनाने का वादा करने की जगह, जाति नाम वाले तमाम रेजिमेंट को भारत रेजिमेंट में बदलने की मांग करती.

मोदी का मुक़ाबला है 20 मजबूत प्रादेशिक नेताओं से, और कहीं कोई लहर नहीं है

आज करीब 20 नेता अपने भौगोलिक क्षेत्र तथा राजनीतिक दायरे में इतने ताकतवर हैं कि मोदी समेत कोई भी राष्ट्रीय नेता उनके वोट बैंक में सेंध नहीं लगा नहीं सकता.

गांधी, लोहिया और कांशीराम: कितने पास-कितने दूर

समकालीन भारतीय इतिहास के इन तीन महान व्यक्तित्वों ने राजनीति और समाज पर गहरी छाप छोड़ी. तीनों का रास्ता अलग था, लेकिन उनमें कई समानताएं भी थीं

ओपिनियन: ‘सेना को बलात्कारी कहने वाले कन्हैया से अब सवाल पूछे देशप्रेमी बेगूसराय’

कन्हैया कुमार उन लोगों में से हैं, जिन्हें विशुद्ध रूप से सोशल मीडिया ने क्रिएट किया है. उन्होंने कभी जनता के बीच कभी कोई काम नहीं किया है.

रविशंकर प्रसाद और मनीष तिवारी: नाक फुलाकर हर बात सही साबित करने की कला

मोदी सरकार केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रह चुके हैं.मनीष तिवारी 2012-13 में केंद्रीय मंत्री थे.

मोदी, शराब और जाति: क्यों भाजपा की अगुआई वाले एनडीए को बिहार में स्पष्ट बढ़त प्राप्त है

बिहार के राजनीतिक महत्व से कौन नहीं अवगत होगा. ये उन तीन राज्यों (बाकी दो पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश हैं) में से है जहां चुनाव के सातों चरणों में वोटिंग होगी.

आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून बनाने वाली कांग्रेस, क्या अब ‘नरम’ पड़ गई है

हमें एक बात समझ लेनी चाहिए कि आतंकवाद रोकथाम के मुद्दे पर कांग्रेस कोई नई-नवेली नहीं है. राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वो भाजपा से ज्यादा गंभीर है.

नफरत के रास्ते पर चलकर तो भारत पाकिस्तान बन जाएगा

भारतीय भाषाओं के दो सौ से भी अधिक नामचीन लेखकों ने एक बयान जारी करके इस बात पर चिंता जताई है कि नफ़रत की...

दलितों की सामूहिक हत्याएं और हिंसा ‘हिंदू आतंकवाद’ है या नहीं?

अगर कोई ताकतवर समूह सुनियोजित और योजनाबद्ध हमला कर किसी खास वंचित सामाजिक समूह के दर्जनों लोगों को मार डालता है, तो क्या उसे आतंकी घटना नहीं कहा जाना चाहिए?

मत-विमत

दुनिया तेजी से बदल रही है—भारत को खुद को सुधारना, मजबूत करना और आर्थिक ताकत बढ़ानी चाहिए

आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.

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राजनीति

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उप्र : देवबंद में एटीएस की कार्रवाई, भड़काऊ पोस्ट साझा करने के आरोप में मुफ्ती गिरफ्तार

सहारनपुर, 11 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ और आपत्तिजनक सामग्री साझा करने तथा पाकिस्तान...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.