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Tuesday, 13 January, 2026
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मत-विमत

गणेश की सूंड़ के ऑपरेशन पर भी ताली बजाई, ऐतिहासिक स्तंभों को गिराकर भी ताली ही बजाई

देश की विभिन्न ऐतिहासिक किलों, पत्थरों और मूर्तियों के हालत भी इन गिराए गए स्तंभों से अच्छी हालत में नहीं हैं.

चार बड़े भगोड़ों को भारत लाने की कोशिश तेज, क्या मोदी को होगा चुनाव में फायदा ?

नरेंद्र मोदी को विदेशी दौरों को लेकर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन आज यही यात्राएं भगोड़ों को न्याय की चौखट तक लाने में मदद कर रही हैं

ईवीएम में छेड़छाड़ जैसी बेकार की बहस बंद हो, पर कैसे?

मतदान व मतों की गिनती की बुनियादी प्रक्रिया पर बहस से हमारे लोकतंत्र की कुछ ठोस उपलब्धियों पर अविश्वास पैदा होता है. हमारा ध्यान चुनाव सुधारों पर होना चाहिए.

सच्ची रामायण छापने वाले ललई यादव क्यों बन गये बौद्ध?

पेरियार की चर्चित किताब 'सच्ची रामायण' को हिंदी में लाने और उसे पाबंदी से बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाले ललई सिंह बहुजन क्रांति के नायक थे. 7 फरवरी को उनका परिनिर्वाण दिवस है.

क्या होता अगर एक दलित ‘राग दरबारी’ लिखता?

राग दरबारी पढ़ते हुए छुआछूत के प्रति जुगुप्सा नहीं होती, हंसी आती है. पर मुर्दहिया का उद्धरण पढ़ कर क्रोध और ग्लानि होती है.

‘हल’ और ‘क़लम दवात’ के बीच ‘सेब’ कैसे बदलेगा कश्मीर की राजनीति

सज्जाद लोन इन दिनों अपनी पार्टी को नए रूप व नई ताक़त से सक्रिय करने में जुटे हुए हैं. हर दिन कोई न कोई बड़ा नेता उनके दल में शामिल हो रहा है.

सोशल मीडिया पर आते ही छा गईं बहन जी

मायावती का ट्विटर पर आना सोशल मीडिया की बेहद शानदार खबर है. इससे बीएसपी को तो फायदा होगा ही, सोशल मीडिया की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी.

नरेंद्र मोदी ने रणनीति के जरिये तैयार किया है अपना मतदाता वर्ग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया, विज्ञापन और प्रचार की बदौलत मतदाताओं को दो वर्गों में बांट कर एक को अपने हिस्से में पूरी तरह आरक्षित कर लिया है.

देश के राजनीतिक विमर्श को इतना अश्लील तो मत बनाइये!

विरोधी दलों की महिला नेताओं पर सामंतों जैसी ओछी टिप्पणियों में शालीन होने की कौन कहे, शालीन दिखने की भी परवाह नहीं कर रहे नेता.

कांग्रेस-मुक्त भारत की प्रक्रिया 2019 में क्यों तेज़ हो सकती है

मुख्य मुकाबले वाली अपनी सीटों पर कांग्रेस चाहे जितना बढ़िया प्रदर्शन करे, वैसी सीटों की संख्या बढ़ रही है जहां कि पार्टी मुकाबले में नहीं है.

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जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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नियुक्ति संबंधी निर्णय लालू के आधिकारिक कामकाज का हिस्सा नहीं : सीबीआई

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) जमीन के बदले नौकरी घोटाले के मामले में प्राथमिकी रद्द करने की पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद की...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.