पिछले पचास वर्षों में पाकिस्तान भारत के साथ रिश्तों में न केवल शर्मसार होता रहा है, बल्कि दुनिया भर में अपना समर्थन और अपनी आर्थिक हैसियत भी गंवाता गया है.
देश में 10 करोड़ से ज्यादा आदिवासी हैं. उनके अधिकारों की रक्षा वह वादा है, जिसे राष्ट्र ने आजादी के वक्त उनसे किया था. वन अधिकार कानून की रक्षा आवश्यक है
ख़ान की घोषणा के बाद, पाकिस्तान में बहुत से लोग सवाल कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को बिना किसी शर्त या रियायत के क्यों छोड़ रहे हैं.
पलायनवाद हमारा चिन्तन चरित्र बन चुका है. हम पेन किलर खा कर अपनी बीमारी छिपाने वाले राष्ट्र में तब्दील हो गए हैं. 1947 में कश्मीर समस्या फुंसी थी, नेहरू ने तब इसका इलाज करने की जगह धारा 370 का पेन किलर लेना ठीक समझा.
आरएसएस एक ऐसी समाज व्यवस्था चाहता है जिसमें जातिभेद कायम रहे, लेकिन सभी जातियां समरसता के साथ रहें. इसी के तहत नरेंद्र मोदी दलितों के पांव धोए हैं. इससे जातियां कमजोर नहीं होंगी.
संभव है, बालाकोट हवाई हमले के बाद भी बारंबार होने वाले आतंकवादी हमले ना रुकें, लेकिन भारत ने कथानक को बदलने और यह दिखाने का विकल्प चुना कि वायुशक्ति से क्या कुछ संभव है.
सीवर में जान जाने का खतरा बॉर्डर से कम नहीं. देश के लिए सफाई का काम जरूरी भी है, वरना हर साल लाखों लोग बीमारी से मर जाएंगे. मोदी को सफाईकर्मियों के पैर धोने की जगह, उन्हें सम्मानजनक जिंदगी का हक देना चाहिए.
कुरुक्षेत्र, 17 फरवरी (भाषा) तेलंगाना के 19 वर्षीय एक छात्र ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में कथित तौर...