पवार महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य माने जाते हैं. जब केंद्र की राजनीति में थे तब उन्होंने चंद्रगुप्त बनने की कोशिश की मगर दूसरे चाणक्य नरसिंहा राव ने उनकी दाल नहीं गलने दी.
अंग्रेजों के समय में जाति और समुदायों के नाम पर बनी तमाम रेजिमेंट भारतीय सेना में अभी भी मौजूद हैं. लेकिन चमार रेजिमेंट को भंग कर दिया गया था. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी चमार रेजिमेंट को बहाल करने की मांग की है.
अखिलेश यादव ने अहीर रेजिमेंट इंफेंट्री बटालियन की बात को समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र में शामिल करके उस समुदाय का सम्मान किया है, जिसे देश के लिए बेशुमार कुर्बानियां देने के लिए जाना जाता है.
अगर सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा देश को बेहतर बनाने में खर्च करना चाहती है, तो ज्यादा अदालतें बनाए, टूटती हुई नौकरशाही को सुधारे, लेकिन, ज़ाहिर है, नेता सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे.